Bihar Board 10th Hindi laghu Uttariya Question Answer

Bihar Board 10th Hindi Ka laghu Uttariya Question Answer | Class 10th Hindi Important Subjective Question Answer In HIndi

Hindi

Bihar Board 10th Hindi Ka laghu Uttariya Question Answer :- Bihar Board के लिए Bihar Board Matric Hindi laghu Uttariya Question Answer  दिया गया है। जो की  BSEB Class 10th Hindi Long Subjective Question है। जो की  Bihar Board Matric Hindi Exam के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। बोर्ड मैट्रिक हिंदी का लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर | बिहार बोर्ड कक्षा 10वीं हिंदी महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव प्रश्न Class 10th Hindi Important Subjective Question Answer In HIndi

Join For Latest News And Tips

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Matric Exam 2024 Whatsapp Group


Bihar Board 10th Hindi Ka laghu Uttariya Question Answer

प्रश्न 1. कवि अपने को जलपात्र और मदिरा क्यों कहता है ?

उत्तर— कवि स्वयं को ईश्वर का जलपात्र और मदिरा इसलिए मानता है, क्योंकि ईश्वर रूपी जल मानव रूपी पात्र में ही निवास करता है । केवल मनुष्य ही उस जल को शुद्ध और सुरक्षित रखता है। अगर मनुष्य उस जल की विशेषता का गुणगान नहीं करेगा अर्थात् उस जल का पान नहीं करेगा तो फिर कौन करेगा ? कवि का मंदिरा कहने का उद्देश्य यह है कि भगवान भक्त की प्रेमपूर्ण भक्ति से वैसे ही मस्त हो जाते हैं, जैसे मदिरा का पान कर कोई अपनी सुध-बुध खो बैठता है। इसीलिए कवि ने स्वयं को जलपात्र और मदिरा दोनों कहा है।


प्रश्न 2. शानदार लबादा किसका गिर जाएगा और क्यों ?

Join For Latest News And Tips

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

उत्तर— शानदार लबादा ईश्वर का गिर जाएगा, क्योंकि यदि भक्त का अस्तित्व नहीं रहेगा तो भगवान का भी कोई महत्त्व अथवा अर्थ नहीं रह जाएगा।


प्रश्न 3. कवि किसको कैसा सुख देता था ?

उत्तर— कवि अपने कपोलों की नर्म शय्या पर विश्राम कर रही ईश्वर की कृपादृष्टि को सुख प्रदान करता था। वह उसे चट्टानों की ठंडी गोद में सूर्यास्त के रंगों में घुलने का सुख देता था।


Class 10th Hindi Important Subjective Question Answer In HIndi

प्रश्न 4. कवि को किस बात की आशंका है? स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर— कवि को इस बात की आशंका है कि वह भक्त के बिना क्या कर पायेगा, क्योंकि भक्त के बिना ईश्वर वृतिहीन, वेशहीन, स्वागत विहीन, गृहहीन और सुखहीन हो जाते हैं। वे भक्त के बिना कहीं कुछ नहीं पा सकते ।


प्रश्न 5. कविता किसके द्वारा किसे संबोधित है? आप क्या सोचते हैं?

उत्तर— यह कविता एक भक्त के द्वारा भगवान को संबोधित है। मेरे विचार में यह कविता परम सत्ता के प्रति कवि के रहस्यवादी दृष्टिकोण को व्यक्त करती है, जो प्रेम के धरातल पर ही अवतरित हुई है।


प्रश्न 6. मनुष्य के नश्वर जीवन की महिमा और गौरव का यह कविता कैसे बखान करती है ? स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर— मनुष्य का जीवन नश्वर होता है। इस नश्वर जीवन की महिमा और गौरव केवल भगवान की भक्ति करने से ही प्राप्त होता है नास्तिक मनुष्य कभी भी भक्त कृपा दृष्टि का पात्र नहीं हो सकता। केवल भगवतत्य की प्राप्ति से ही यह नश्वर जीवन सार्थक हो पाता है । इस प्रकार स्पष्ट है कि यह कविता मनुष्य के नश्वर जीवन की महिमा और गौरव का ही बखान करती है।


बोर्ड मैट्रिक हिंदी का लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर

प्रश्न 7. कविता के आधार पर भक्त और भगवान के बीच सम्बन्ध पर प्रकाश डालिए ।

अथवा, मेरे बिना तुम प्रभु कविता का केन्द्रीय भाव क्या है ?

उत्तर— भक्त और भगवान के बीच अन्योन्याश्रय सम्बन्ध माना गया है। दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं जो सम्बन्ध जल और जलपात्र का होता है, प्याला तथा मदिरा का होता है, वही सम्बन्ध भक्त और भगवान का होता है। अगर जल के बिना जलपात्र सूना लगता है तो जलपात्र के बिना जल भी बिखर जाता है तथा प्याले के बिना मदिरा और मदिरा के बिना प्याला अस्तित्वहीन हो जाता है उसी तरह भक्त बिना भगवान और भगवान के बिना भक्त का कोई अस्तित्व नहीं है ।


प्रश्न 8. आशय स्पष्ट कीजिए: “मैं तुम्हारा वेश हूँ, तुम्हारी वृत्ति हूँ मुझे खोकर तुम अपना अर्थ खो बैठोगे ?”

उत्तर— इन पंक्तियों में कवि रेनर मारिया रिल्के प्रभु को संबोधित करता हुआ कहता है कि ईश्वर इस संसार में तुम्हारे स्वरूप, तुम्हारे यश, तुम्हारे कृत्य और तुम्हारी ख्याति तथा महिमा के आधार मेरे जैसे भक्त ही हैं। अगर तुमने मुझ जैसे भक्तों को खो दिया तो तुम्हारा कोई भी महत्त्व अथवा अर्थ नहीं रह जाएगा। कहने का आशय यह है कि ईश्वर का अस्तित्व भक्तों की आस्था पर ही निर्भर है। हम सब ऐसा मानते हैं कि ईश्वर हैं और वे कृपा तथा कल्याण के अदृश्य स्रोत हैं इसीलिए हमें ईश्वर की सत्ता तथा सर्वव्यापकता की अनुभूति होती है। अगर हम नास्तिक हो जाएँ अथवा हम मनुष्यों का अस्तित्व न रहे तो ईश्वर के अस्तित्व की तो कल्पना भी नहीं हो सकेगी। इसीलिए भक्त के कारण ही भगवान की महत्ता बनी हुई है।


Bihar Board Matric Hindi laghu Uttariya Question Answer

 Class 10th Hndi गोधूलि भाग 2 ( काव्यखंड ) Objective 2024
13. राम बिनु बिरथे जगि जनमा Click Here Click Here Click Here
14. प्रेम-अयनि श्री राधिका Click Here Click Here Click Here
15. अति सूधो सनेह को मारग है Click Here Click Here Click Here
16. स्वदेशी Click Here Click Here Click Here
17. भारतमाता Click Here Click Here Click Here
18. जनतंत्र का जन्म Click Here Click Here Click Here
19. हिरोशिमा Click Here Click Here Click Here
20. एक वृक्ष की हत्याClick HereClick HereClick Here
21. हमारी नींदClick HereClick HereClick Here
22. अक्षर-ज्ञानClick HereClick HereClick Here
23. लौटकर आऊंगा फिरClick HereClick HereClick Here
24. मेरे बिना तुम प्रभुClick HereClick HereClick Here

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *