Bihar Board 10th Hindi Long Subjective Question Answer

Bihar Board 10th Hindi Long Subjective Question Answer | ‘नौबतखाने में इबादत’ | Bihar Board Class 10th Hindi Naubatkhane Mein Ibadat Ka Dirgh Uttariya Question Answer

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Bihar Board 10th Hindi Long Subjective Question Answer 2024:- Bihar Board के लिए Bihar Board Class 10th Hindi Naubatkhane Mein Ibadat Ka Dirgh Uttariya Question Answer दिया गया है। जो की विष के दाँत BSEB Class 10th Hindi Long Subjective Question 2024 है। जो की  Bihar Board Matric Hindi Exam के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। नौबतखाने में इबादत के लॉन्ग सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर | बिहार बोर्ड मैट्रिक नौबतखाने में इबादत दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर Class 10th Hindi Naubatkhane Mein Ibadat Long Subjective Question Answer In HIndi

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Bihar Board 10th Hindi Long Subjective Question Answer

1. काशी संस्कृति की पाठशाला है-सप्रसंग व्याख्या करें।

उत्तर – काशी संस्कृति की पाठशाला है का आशय है कि काशी में काशी विश्वनाथ का मंदिर है, बालाजी का मंदिर है, जहाँ भक्तिभाव से पूजा-अर्चना होती है। गंगा है जिसमें स्नान करना धार्मिक दृष्टिकोण से पुण्यकारी है। तबलावादक कंठे और विद्याधरी, बड़े रामदास और मौजुद्दीन खाँ जैसे संगीत-साधक हैं। शहनाई के पर्याय बिस्मिल्ला खाँ यहाँ बसते हैं। साहित्यिक आयोजन होते रहते हैं, हर बरस संगीत समारोह होता है। खान-पान का अपना अन्दाज है। इस प्रकार, यहाँ की अपनी संस्कृति है, जहाँ पहुँचकर आदमी संस्कृति की शिक्षा पाता है।


2. खुदा फटा सुर न बख्खों। लुंगिया का क्या है, आज फटी है तो कल सिल जाएगी – सप्रसंग व्याख्या करें।

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उत्तर – ‘नौबतखाने में इबादत’ पाठ की यह पंक्ति है। बिस्मिल्ला खाँ की शिष्या ने जब उनकी फटी लुंगी न पहनने को कहा तो उन्होंने कहा कि लुंगी फटी है तो क्या, कल सिल जाएगी लेकिन खुदा फटा सुर न बख्शें। तात्पर्य यह कि बिस्मिल्ला खाँ का ध्यान अपने लिबास, शान-शौकत पर नहीं अपने सुर पर रहता था। उसी की साधना करते थे।


Bihar Board Class 10th Hindi Naubatkhane Mein Ibadat Ka Dirgh Uttariya Question Answer

3. ‘नौबतखाने में इबादत’ पाठ में वर्णित घटनाओं के आधार पर भारतरत्न बिस्मिल्ला खाँ का रेखा चित्र प्रस्तुत कीजिए ।

या, बिस्मिल्ला खाँ के जीवन के महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डालें।

उत्तर – माथे पर दुपलिया टोपी, मझोला कद, खुटिआई दाढ़ी, होठों पर मुस्कान और शरीर पर शेरवानी, नीचे पायजामा- हाँ, यही हैं बिस्मिल्ला खाँ – भारतरत्न, शहनाई के बादशाह !

सन् 1916 ई० में डुमराँव में उस्ताद पैगम्बर खाँ के यहाँ जो शहनाई बजी, वह सारे संसार में आगे चलकर गूंज उठी। अमीरुद्दीन यानी बिस्मिल्ला खाँ का जन्म हुआ।

5-6 वर्ष की उम्र और अमीरुद्दीन काशी में ननिहाल । नाना शहनाई बजाते हैं और अमीरुद्दीन छिपकर सुन रहे हैं। नाना गए कि मीठी शहनाई की खोज शुरू | ………मामा अलीबख्श शहनाई बजाते हुए सम पर आते हैं कि अमीरुद्दीन दाद देने की जगह खुशी में पटकते हैं पत्थर । चौदह की उम्र और अमीरुद्दीन का बालाजी मन्दिर शहनाई के रियाज के लिए जाना शुरू। रास्ते में सुनते हैं रसूलन बाई और बतूलन बाई के ठप्पे, ठुमरी, दादरा ………शुरू होती है संगीत की समझ । अच्छी लगती है कुलसुम हलवाइन की कचौड़ी। गीताबाली और सुलोचना की फिल्में आई कि दौड़े अमीरुद्दीन । ”

अमीरुद्दीन बिस्मिल्ला खाँ हो गए। गंगा, विश्वनाथ, बालाजी में पूरी आस्था । काशी में तो इनकी दर पर बजाते ही हैं, बाहर रहने पर भी कार्यक्रम के पहले इनके मंदिर की ओर रुख कर कुछ समय बजाते हैं। मुहर्रम बड़ी शिद्दत से मनाते हैं- शहनाई नहीं बजाते।

बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई में जादू है। फूंका नहीं कि सबके सिर चढ़ बोलने लगी। कब रात बीती, पता नहीं। एक पर एक सीढ़ियाँ चढ़ते हैं- मान-सम्मान की वर्षा होती है। कभी जापान, कभी रुस……..। फिर भी वही सादगी………. वही मीठे बोल ……… |

21 अगस्त 2006 | भारतरत्न बिस्मिल्ला खाँ अपनी अनंत संगीत यात्रा पर निकल गए। लेकिन उनकी शहनाई गूंज रही है, गूंजती रहेगी।


बिहार बोर्ड मैट्रिक नौबतखाने में इबादत दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर

4. एक कलाकार के रूप में बिस्मिल्ला खाँ का परिचय ‘नौबतखाने में इबादत’ पाठ के आधार पर दें।

अथवा, बिस्मिल्ला खाँ के बचपन का वर्णन करें।

उत्तर – सिर पर दुपलिया टोपी, मझोला कद, खुटिआई दाढ़ी, होठों पर मुस्कान और शरीर पर शेरवानी, नीचे पायजामा – हाँ, यही हैं बिस्मिल्ला खाँ – भारतरत्न, शहनाई के बादशाह । सन् 1916 ई. में डुमराँव में उस्ताद पैगम्बर खाँ के यहाँ जो शहनाई बजी वह सारे संसार में आगे चलकर गूँज उठी। अमीरुद्दीन यानी बिस्मिल्ला खाँ का जन्म हुआ। 5-6 वर्ष की उम्र और अमीरुद्दीन काशी में – ननिहाल । नाना शहनाई बजाते हैं और अमीरुद्दीन छिपकर सुन रहे हैं। नाना गए कि मीठी शहनाई की खोज शुरू |…. मामा अलीबख्श शहनाई बजाते हुए समय पर आते हैं कि अमीरुद्दीन दाद देने की जगह खुशी में पटकते हैं पत्थर। चौदह की उम्र और अमीरुद्दीन का बालाजी मन्दिर शहनाई के रियाज के लिए जाना शुरू। रास्ते में सुनते हैं रसूलन बाई और बतूलन बाई के ठप्पे, ठुमरी, दादरा ……..शुरू होती है संगीत की समझ । अच्छी लगती है कुलसुम हलवाइन की कचौड़ी गीताबाली और सुलोचना की फिल्में आई कि दौड़े अमीरुद्दीन। इस तरह उनका बचपन अभावपूरित मस्ती वातावरण में बीती ।


BSEB Class 10th Hindi Long Subjective Question

Chapter Name Objective QueSubjective QueLong Subjective
1. श्रम विभाजन और जाति प्रथाClick HereClick HereClick Here
2. विष के दाँतClick HereClick HereClick Here
3. भारत से हम क्या सीखेंClick HereClick HereClick Here
4. नाखून क्यों बढ़ते हैंClick HereClick HereClick Here
5. नागरी लिपिClick HereClick HereClick Here
6. बहादुरClick HereClick HereClick Here
7. परंपरा का मूल्यांकनClick HereClick HereClick Here
8. जित-जित मैं निरखत हूँClick HereClick HereClick Here
9. आवियों Click HereClick Here Click Here
10. मछली Click Here Click Here Click Here
11. नौबतखाने में इबादत` Click Here Click Here Click Here
12. शिक्षा और संस्कृति Click Here Click Here Click Here

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