Bihar Board 10th Subjective Question Answer In HIndi PDF

Bihar Board 10th Subjective Question Answer In HIndi PDF | Bharat Se Ham Kya Sikhe Subjective Question Answer In HIndi

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Bihar Board 10th Subjective Question Answer In HIndi PDF :- Bihar Board के लिए Bihar Board Matric Exam Hindi Ka Subjective Question Answer दिया गया है। जो की विष के दाँत BSEB Class 10th Hindi Subjective Question है। जो की  Bihar Board Matric Hindi Exam के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। भारत से हम क्या सीखें के सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर | भारत से हम क्या सीखें का लेखक कौन है bharat se ham kya sikhe Subjective Question Answer In HIndi

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Bihar Board 10th Subjective Question Answer In HIndi PDF

प्रश्न 1. लेखक की दृष्टि में सच्चे भारत के दर्शन कहाँ हो सकते हैं और क्यों?

उत्तर— लेखक की दृष्टि से सच्चे भारत के दर्शन गाँवों में हो सकते हैं क्योकि वहाँ के लोग, भूभाग और परिवेश सबकुछ प्राकृतिक रूप में और शुद्ध रूप में मिलते हैं। गाँवों में ही, भारत की आत्मा निवास करती है। सच्चे भारत के दर्शन ग्रामीण जीवन की सादगी, त्याग, प्रेम, उत्कृष्टतम पारस्परिक सम्बन्ध आदि में देखने को मिलते हैं ।


प्रश्न 2. भारत को पहचान सकने वाली दृष्टि की आवश्यकता किनके लिए वांछनीय है और क्यों ?

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उत्तर— भारत को पहचान सकने वाली दृष्टि की आवश्यकता यूरोपियन लोगों के लिए वांछनीय है। क्योंकि आज का भारत भी ऐसी अनेक समस्याओं से ग्रस्त है, जिनका समाधान यूरोपियन लोगों के लिए भी उतना ही वांछनीय है ।


प्रश्न 3. लेखक ने किस विशेष क्षेत्रों में अभिरुचि रखने वालों के लिए भारत का प्रत्यक्ष ज्ञान आवश्यक बताया है ?

उत्तर-  लेखक ने भू-विज्ञान, वनस्पति जगत, जीव-विज्ञान, नीति शास्त्र, पुरातत्त्व, पुराने सिक्के, देवत्व विज्ञान, नीति कथा, भाषा विज्ञान, राजनीतिक इकाइयाँ, धर्म, इतिहास, साहित्य इत्यादि क्षेत्रों में अभिरुचि रखने वालों के लिए भारत का प्रत्यक्ष ज्ञान आवश्यक बताया है।


प्रश्न 4. लेखक ने वारेन हेस्टिंग्स से सम्बन्धित किस दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना का हवाला दिया है और क्यों ?

उत्तर-  लेखक ने वारेन हेस्टिंग्स से सम्बन्धित उस दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना के सम्बन्ध में बताया है कि जब हेस्टिंग्स भारत का गवर्नर जनरल था । उसे 172 दारिस नामक सोने के सिक्कों से भरा एक घड़ा मिला था। उन सिक्कों को अपने ईस्ट इण्डिया कम्पनी के निदेशक मण्डल की सेवा में इसलिए भेजवा दिया कि यह एक ऐसा उपहार होगा जिसकी गणना उसके द्वारा प्रेषित सर्वोत्तम दुर्लभ वस्तुओं में होगी। वह स्वयं को अपने मालिक की दृष्टि में एक महान् उदार व्यक्ति साबित करना चाहता था किन्तु, कंपनी के निदेशक ने उनका ऐतिहासिक महत्त्व नहीं समझने के कारण उन दुर्लभ प्राचीन मुद्राओं को गला डाला जब हेस्टिग्स इंग्लैण्ड लौटा तो वे स्वर्ण मुद्राएँ नष्ट हो चुकी थीं। इसीलिए लेखक ने हेस्टिंग्स से सम्बन्धित दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना का हवाला दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और इंग्लैण्ड वाले ऐसी ऐतिहासिक दुर्लभ वस्तुओं के महत्त्व को समझें ।


Bharat Se Ham Kya Sikhe Subjective Question Answer In HIndi

प्रश्न 5. लेखक ने नीतिकथाओं के क्षेत्र में किस तरह भारतीय अवदान को रेखांकित किया है?

उत्तर – लेखक ने नीतिकथाओं के क्षेत्र में भारतीय अवदान के विषय में कहा है कि भारत ने ही विश्व में नीतिकथाओं के माध्यम से नवजीवन का संचार किया। इसके कारण ही विभिन्न मार्गों और साधनों के माध्यम में अनेक नीतिकथाएँ पूर्व से पश्चिम की ओर फैली हमारे यहाँ प्रचलित दन्तकथाओं का प्रमुख स्रोत बौद्ध धर्म को माना जाता है।


प्रश्न 6. भारत के साथ यूरोप के व्यापारिक संबंध के प्राचीन प्रमाण लेखक ने क्या दिखाए हैं ?

उत्तर- भारत के साथ यूरोप के व्यापारिक सम्बन्ध के बारे में लेखक का कहना है कि सोलोमन के समय में ही भारत तथा सीरिया और फिलीस्तीन के मध्य आवागमन के साधन सुलभ हो चुके थे साथ ही, संस्कृत शब्दों के आधार पर लेखक इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि हाथीदाँत, बन्दर, मोर और चन्दन आदि जिन वस्तुओं के निर्यात की बात बाइबिल में कही गई है, वे भारत के सिवा किसी अन्य देश में उपलब्ध नहीं थीं ‘शाहनामा’ के रचनाकाल दसवीं ग्यारहवीं शताब्दी में भी यूरोप के व्यापारिक सम्बन्ध थे


प्रश्न 7. भारत की ग्राम पंचायतों को किस अर्थ में और किनके लिए लेखक ने महत्त्वपूर्ण बतलाया है ? स्पष्ट करें ।

उत्तर— अत्यन्त सरल राजनीतिक इकाइयों के निर्माण और विकास से सम्बद्ध प्राचीन युग के कानून के पुरातन रूप, उनके महत्त्व और विशिष्टता के ज्ञान पाने वालों के लिए लेखक ने ग्राम पंचायत को महत्त्वपूर्ण बताया है। भारत की ग्राम पंचायतों को लेखक ने स्थानीय स्वशासन के अर्थ में लिया है यह ऐसी प्रणाली है जिसमें ग्रामीण अपना शासन खुद करते हैं।


प्रश्न 8. धर्मों की दृष्टि से भारत का क्या महत्त्व है ?

अथवा, धर्म की दृष्टि से भारत का क्या महत्त्व है ? ‘भारत में हम क्या सीखें’ पाठ के आधार पर बतायें।

उत्तर- भारत प्राचीन काल से ही धार्मिक विकास का केन्द्र रहा यहाँ धर्म के वास्तविक उद्भव, उसके प्राकृतिक विकास तथा उसके अपरिहार्य क्षीणमाण रूप का प्रत्यक्ष परिचय मिलता है। भारत वैदिक धर्म की भूमि है, बौद्ध धर्म की यह जन्मभूमि है, पारसियों के जरथुस्ट धर्म की यह शरण स्थली है आज भी यहाँ नित्य नये मत-मतान्तर प्रकट एवं विकसित होते रहते हैं।
इस तरह से भारत धार्मिक क्षेत्र में विश्व को आलोकित करनेवाला एक महत्त्वपूर्ण देश है।


प्रश्न 9. भारत किस तरह अतीत और सुदूर भविष्य को जोड़ता है ? स्पष्ट करें।

उत्तर- भारत एक ऐसा देश है जो सर्वत्र अति प्राचीन और सुदूर भविष्य के बीच खड़ा है। यह देश एक प्रयोगशाला है, जिसमें जीवन की प्रत्येक समस्या के उपाय वर्णित है। यह समस्या चाहे शिक्षा की हो अथवा संसद के प्रतिनिधित्व की, कानून बनाने की हो या फिर कोई और कानूनी समस्या सीखने-सिखाने सम्बन्धी ऐसी कोई बात विश्व के अन्य किसी देश में नहीं मिल सकती केवल भारत जैसे प्राचीन देश में ही अतीत तथा सुदूर भविष्य की समस्याओं के विषय में सुअवसर प्राप्त हो सकते


भारत से हम क्या सीखें के सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर

प्रश्न 10. लेखक वास्तविक इतिहास किसे मानता है और क्यों ?

उत्तर- लेखक ने संस्कृत तथा दूसरी आर्यभाषाओं को वास्तविक इतिहास माना है। वास्तविक इतिहास में मानव इतिहास से सम्बद्ध अत्यन्त बहुमूल्य तथा अत्यन्त उपादेय प्रमाणिक सामग्री उपलब्ध हो संस्कृत ने लेखक को वहीं अनुभूति दी जो किसी को अपने पुराने पुरखों की अज्ञात धरोहर या वस्तु अचानक मिल जाने से होती है। इसने मानव जाति के बारे में न केवल उदार दृष्टिकोण दिया बल्कि इसने मानव जाति के सम्पूर्ण इतिहास को वास्तविक रूप दिया।


प्रश्न 11. लेखक ने नया सिकन्दर किसे कहा है ? ऐसा कहना क्या उचित है ? लेखक का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- लेखक ने अपने समय इंग्लैण्ड से भारत आए नए अधिकारियों को नया सिकन्दर कहा है। ये नए सिकन्दर भारत के साहित्यिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, प्राकृतिक तथा गौरवपूर्ण ऐतिहासिक विरासत से अनजान है। लेखक का ऐसा कहना बहुत कुछ उचित है कारण इंग्लैण्ड उस समय विश्वविजयी था किन्तु, नए अधिकारी स्वयं के साम्राज्य में पधारे। इसलिए, लेखक का उनकी ओर संकेत था कि विजित देश होने के बावजूद भारत इतना समृद्ध था कि नए सिकन्दर को यहाँ बहुत कुछ अविजित दिखता।


प्रश्न 12. “सम्पूर्ण भूमंडल में सर्वविद् सम्पदा और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण देश भारत है।” लेखक ने ऐसा क्यों कहा है?

उत्तर- सम्पूर्ण भूमंडल में सर्वविद् सम्पदा और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण देश भारत है लेखक ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि यहीं वह देश है जहाँ सर्वप्रथम वेद की रचना हुई थी। यहीं पर हिमालय जैसा हिममंडित पर्वत है, गंगा जैसी पवित्र नदियाँ है तो फल-फूलों से लदे वन प्रांत हैं। मानव मस्तिष्क की उत्कृष्टतम उपलब्धियों का सर्वप्रथम साक्षात्कार इसी देश में हुआ। ‘प्लेटो’ तथा ‘काण्ट’ जैसे दार्शनिकों का अध्ययन एवं मनन का क्षेत्र भारत ही था । विश्व को मानवता की शिक्षा भारत से ही मिली। भारत ही भूतल पर स्वर्ग जैसा सुन्दर, सर्वविद् सम्पन्न रहा है। लेखक के कहने का तात्पर्य है कि भारत ने ही विश्व को ज्ञान-विज्ञान, सभ्यता-संस्कृति, धर्म-परंपरा आदि की शिक्षा दी।


प्रश्न 13. मैक्समूलर ने संस्कृत की कौन-सी विशेषताएँ और महत्त्व बताएँ हैं ?

उत्तर- मैक्समूलर ने संस्कृत की विशेषता तथा महत्त्व के बारे में कहा है कि संस्कृत एक ऐसी भाषा है जिसमें व्यक्ति को चिन्तन की गंभीर धारा- में अवगाहन से अज्ञात की जानकारी मिलती है। साथ ही साथ इससे , मानव हृदय की गहनतम सहानुभूति एवं सदाशयता की शिक्षा मिलती है।


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प्रश्न 14. संस्कृत तथा दूसरी भारतीय भाषाओं के अध्ययन से पाश्चात्य जगत् को प्रमुख लाभ क्या-क्या हुए ?

उत्तर-  संस्कृत तथा दूसरी भारतीय भाषाओं की विशेषता के संबंध में लेखक ने कहा है कि संस्कृत भाषा तथा इसका साहित्य तीन हजार वर्षों से भी अधिक लम्बे काल से विद्यमान है तथा यूनान तथा रोम के सम्पूर्ण साहित्य है से कहीं अधिक विशाल है। संस्कृत सारी भाषाओं की अग्रजा है। यह व्याकरणनिष्ठ है। संस्कृत, ग्रीक और लैटिन यूनानी आदि जातियाँ एक-दूसरी से पृथक् हुई थीं, उस सुदूर अतीत में आदि-आर्य भाषा चट्टान के रूप मे दिखाई देती है, जो चिन्तन परम्परा के प्रवाहों के उतार-चढ़ाव से घिस – मँजकर चिकनी और स्पष्ट हो चुकी थी। उस भाषा में प्रकृति और प्रत्यय के योग से बनी हुई अस्मि, ग्रीक एस्मि जैसी यौगिक क्रियाएँ मिलती हैं। लेकिन ‘मैं हूँ’ जैसे भाव को व्यक्त करने के लिए ‘अस्मि’ (मैं हूँ) क्रिया केवल आर्य भाषाओं में उपलब्ध हो सकती है। लेखक का मानना है कि संस्कृत सुनिश्चित तथा व्यापक ऐतिहासिक ज्ञान के लिए आवश्यक है, क्योंकि इसकी खोज ने हमारी ऐतिहासिक चेतना में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। इससे हमारे भूले-बिसरे बचपन की मधुर स्मृतियाँ साकार हो उठी हैं।

अतः संस्कृत तथा दूसरी भाषाओं के अध्ययन ने मानव जाति के बारे में हमारे विचार को व्यापक और उदार बना दिया है। लाखों-करोड़ों अजनबियों तथा बर्बर समझे जानेवाले लोगों को भी अपने परिवार के सदस्य की भाँति गले लगाना भी सिखाया है। तात्पर्य यह कि इसने मानव जाति के सम्पूर्ण इतिहास को वास्तविक रूप में प्रकट कर दिखाया है ।


प्रश्न 15. लेखक ने भारत के लिए नवागंतुक अधिकारियों को किसकी तरह सपने देखने के लिए प्रेरित किया और क्यों?

उत्तर – लेखक ने भारत के लिए नवागंतुक अधिकारियों को सर विलियम जोन्स की तरह सपने देखने के लिए प्रेरित इसलिए किया, ताकि आपमें से प्रत्येक को ठीक वैसा ही अनुभव हो सके जैसा कि सौ वर्ष पहले सर विलियम जोन्स को इंग्लैण्ड से आरंभ की हुई अपनी लंबी समुद्र यात्रा की समाप्ति पर क्षितिज में प्रकट होते हुए भारत के तट के दर्शन से अनुभव हुआ था। उन्होंने उस समय जो सपना देखा था, उनके मन में जैसी सुनहरी कल्पना जगी थी तथा जैसा सुन्दर दृश्य देखा था आदि का वर्णन कर लेखक उन नवागंतुओं में ललक पैदा करना चाहता है। इसलिए विलियम जोन्स द्वारा वर्णित अनुभवों का जिक्र करते हुए लेखक कहता है, “एशिया के सुविस्तीर्ण क्षेत्रों से चारों ओर से घिरी ऐसी श्रेष्ठ रंगभूमि के मध्य अपने-आपको पाकर मुझे जिस आनन्द का अनुभव हुआ, वह वस्तुतः अनिर्वचनीय है, क्योंकि यह भूमि नानाविध ज्ञान-विज्ञान की धात्री ललित एवं उपयोगी कलाओं की जननी, शानदार कार्यकलापों की दृश्यभूमि, मानव-प्रतिभा के उत्पादन का उर्वर क्षेत्र, धर्म, भाषा, रीति-रिवाजों, लोगों के रंग-रूप और आकार-प्रकार आदि की दृष्टि से अपनी विविधता के कारण सदा से सम्माननीय रही है। अतः इसी विशेषता की ओर उनका ध्यान आकृष्ट करने के लिए तथा विलियम जोन्स जैसे स्वप्नदर्शी बनने की प्रेरणा दी है, ताकि अपने सपनों को साकार और अपनी कल्पनाओं को वास्तविकता में में परिणत कर सकें।


प्रश्न 16. लेखक के अनुसार सफलता और चरितार्थता क्या है ?

उत्तर – लेखक के अनुसार सफलता और चरितार्थता में अंतर है । सफलता मनुष्यों का बड़े आडंबर के साथ मारणास्त्रों के संचयन से, बाह्य उपकरणों के बाहुल्य से उस वस्तु को पाना है जिनकी उसे चाहत है। जबकि प्रेमपूर्वक व्यवहार, मैत्रीपूर्ण व्यवहार, त्याग की भावना, अपने को सबके मंगल के लिए निःशेष भाव से समर्पित करना मनुष्य का चरितार्थता है


Bihar Board Matric Exam Hindi Ka Subjective Question Answer

Chapter Name Objective QueSubjective QueLong Subjective
1. श्रम विभाजन और जाति प्रथाClick HereClick HereClick Here
2. विष के दाँतClick HereClick HereClick Here
3. भारत से हम क्या सीखेंClick HereClick HereClick Here
4. नाखून क्यों बढ़ते हैंClick HereClick HereClick Here
5. नागरी लिपिClick HereClick HereClick Here
6. बहादुरClick HereClick HereClick Here
7. परंपरा का मूल्यांकनClick HereClick HereClick Here
8. जित-जित मैं निरखत हूँClick HereClick HereClick Here
9. आवियों Click HereClick Here Click Here
10. मछली Click Here Click Here Click Here
11. नौबतखाने में इबादत` Click Here Click Here Click Here
12. शिक्षा और संस्कृति Click Here Click Here Click Here

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