Bihar Board Class 10th Hindi Long Type Question Answer

Bihar Board Class 10th Hindi Long Type Question Answer | ‘नाखून क्यों बढ़ते हैं’ | Class 10th Hindi nakhun kyon badhate hain Long Subjective Question Answer In HIndi

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Bihar Board Class 10th Hindi Long Type Question Answer :- Bihar Board के लिए Bihar Board Class 10th Hindi nakhun kyon badhate haine Ka Dirgh Uttariya Question Answer दिया गया है। जो की विष के दाँत BSEB Class 10th Hindi Long Subjective Question है। जो की  Bihar Board Matric Hindi Exam के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। नाखून क्यों बढ़ते हैं के लॉन्ग सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर | बिहार बोर्ड मैट्रिक नाखून क्यों बढ़ते हैं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर Class 10th Hindi nakhun kyon badhate hain Long Subjective Question Answer In HIndi

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Bihar Board Class 10th Hindi Long Type Question Answer

1. हजारी प्रसाद द्विवेदी की दृष्टि में हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता क्या है? स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर – हजारी प्रसाद द्विवेदी की दृष्टि में हमारी परंपरा महिमामयी और संस्कार उज्ज्वल हैं। इस प्रकार, हमारी संस्कृति ऐसी है, जिसमें नाना प्रकार की जातियाँ और आक्रान्ता आकर समाहित हो गए। हमारे ऋषि-मुनियों ने बहुत पहले जान लिया था कि मनुष्य पशु से भिन्न इसलिए है कि इसमें संयम है, दूसरे के सुख-दुख के प्रति समवेदना, श्रद्धा, तप और त्याग के भाव हैं, वह मन, वचन और शरीर से किए गए असत्याचरण को बुरा मानता है। वस्तुतः ये सारी वस्तुएँ मनुष्य के स्वयं के उद्भावित बंधन हैं। यही कारण है कि हमारी संस्कृति ने ‘स्व’ के बंधन को सर्वोच्चता दी । द्विवेदी जी की दृष्टि में यह ‘स्व’ का बंधन ही हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है।


2. लेखक ने किस प्रंसग में कहा है कि बंदरिया मनुष्य का आदर्श नहीं ‘बन सकती? लेखक का अभिप्राय स्पष्ट करें।

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उत्तर – पुराने से चिपके रहने के प्रसंग में लेखक ने उस बंदरिया का जिक्र क्रिया है जो अपने सीने से अपने मृत बच्चे को चिपकाए घूमती थी । लेखक का कहना है कि ऐसी बंदरिया मनुष्य का आदर्श नहीं बन सकती। वह मृत और जीवंत में अन्तर नहीं कर सकती जबकि मनुष्य में चिंतन – शक्ति है, वह निर्जीव और सजीव में अन्तर कर सकता है, समझ सकता है कि क्या उपयोगी है और क्या अनुपयोगी वस्तुतः पुरातन और नवीन की अच्छी बातों को ग्रहण करना और व्यर्थ तत्त्वों का त्याग ही मनुष्य का आदर्श है।


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3. ‘नाखून क्यों बढ़ते हैं’ शीर्षक पाठ का सारांश लिखें।

या, ‘नाखून क्यों बढ़ते हैं’ शीर्षक पाठ में हजारी प्रसाद द्विवेदी ने क्या प्रतिपादित किया है? स्पष्ट कीजिए।

या, ‘नाखून क्यों बढ़ते हैं’ पाठ में व्यक्त हजारी प्रसाद द्विवेदी के विचारों को स्पष्ट कीजिए।

या, हजारी प्रसाद द्विवेदी ने ‘नाखून क्यों बढ़ते हैं’ शीर्षक ललित निबंध में सभ्यता और संस्कृति की विकास गाथा उद्घाटित की है। समझाकर लिखिए।

या, ‘नाखून क्यों बढ़ते हैं’ शीर्षक निबंध में हजारी प्रसाद द्विवेदी का मानववादी दृष्टिकोण झलकता है। विवेचन करें।

उत्तर – नाखून विचित्र हैं। काट दीजिए परन्तु फिर बढ़ जाते हैं। आदि काल में मनुष्य की आत्म-रक्षा के लिए ये जरूरी थे। बाद में तो मनुष्य ने लौह युग आते-आते एक से एक मारक अस्त्र तैयार कर लिए, आदमी की – पूँछ गिर गई, किन्तु नाखून जान ही नहीं छोड़ते।

हजारी प्रसाद द्विवेदी मानते हैं कि मनुष्य नहीं चाहता कि बर्बर युग की कोई निशानी उससे जुड़ी रहे इसलिए वह नाखूनों को काटता है लेकिन मनुष्य की पशुता अभी गई नहीं है घृणा, द्वेष और अहं को अभी भी नहीं छोड़ा है। सच यह है कि वह हथियार बना तो रहा है लेकिन अनुभव कर रहा है कि पशुता के सहारे वह तरक्की नहीं कर सकता। तभी तो निशानी नाखूनों को काटता है। पशुता की

भारत के ऋषि-मुनियों ने बहुत पहले ही जान लिया था कि पशुता प्रगति-विरोधी है, मानव-विरोधी है क्योंकि मनुष्य ने कभी भी अर्न्तमन से झगड़ा झंझट को अच्छा नहीं माना, सराहना नहीं की। मनुष्य की मनुष्यता है सबके सुख-दुख में सहभागिता, समवेदना, त्याग, श्रद्धा और तप प्रेम हमारे अन्तर में विराजमान है प्रेम बाँटकर मनुष्य जितना आनन्दित होता है उतना किसी अन्य विजय से नहीं। यही कारण है कि यहाँ अनेक जातियाँ आईं, आक्रान्ता आए किन्तु प्रेम से भारत के विशाल समूह में समा गए।

भारत की यह विशेषता ‘स्व’ के बंधन में है। स्वाधीनता, स्वराज्य, स्वतंत्रता और स्वशासन इसी ‘स्व’ के बंधन के विस्तार हैं। अपने-आप पर नियंत्रण, दूसरे की स्वाधीनता, स्वतंत्रता का सम्मान ।

द्विवेदीजी की मान्यता है कि सफलता से बड़ी वस्तु है चरितार्थता | सफलता वाह्यडंबरों के विशाल भंडार का नाम है जबकि चरितार्थता प्रेम, त्याग, मैत्री और सबके निमित्त मंगल भाव में है। इस प्रकार द्विवेदी जी सभ्यता और संस्कृति तथा इतिहास को खंगालते हुए इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि चाहे जो हो, मनुष्य पशुता को बढ़ने नहीं देगा-नाखून बढ़ते हैं तो बहें।


बिहार बोर्ड मैट्रिक नाखून क्यों बढ़ते हैं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर

4. कमबख्त नाखून बढ़ते हैं तो बढ़ें, मनुष्य उन्हें बढ़ने नहीं देगा—सप्रसंग व्याख्या करें।

उत्तर – प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्य पुस्तक ‘गोधूलि भाग-2 में संकलित हजारी प्रसाद द्विवेदी जी के निबंध ‘नाखून क्यों बढ़ते हैं से उद्धृत है।

द्विवेदी सुधी सहित्यकार हैं। मनुष्यता में उनका विश्वास है। यही कारण है कि नाखूनों के माध्यम से आदि मानव से लेकर आधुनिक मानव के इतिहास, संस्कृति और प्रवृत्ति पर विचार कर निबंध के अंत में इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि मनुष्य के भीतर की पशुता, चाहे जिस रूप में, नाखूनों की तरह बढ़ रही है, किन्तु एक दिन ऐसा आएगा जब मनुष्य अपनी पाशविक वृत्ति पर विजय हासिल करे लेगा, वह नाखूनों को बढ़ने नहीं देगा।  प्रस्तुत पंक्ति में द्विवेदी की मानवीय दृष्टि झलकती है।


5. काट दीजिए, वे चुपचाप दंड स्वीकार कर लेंगे, पर निर्लज्ज अपराधी की भाँति फिर छूटते ही सेंध पर हाजिर- सप्रसंग व्याख्या करें।

उत्तर – प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्य पुस्तक ‘गोधूलि -भाग-2 में संकलित, मनीषी रचनाकार हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबंध ‘नाखून क्यों बढ़ते हैं” से उद्धत है।

लेखक कहता है कि नाखून बढ़ते हैं, मनुष्य उन्हें काट देता है ये जरा भी चीं-चुपड़ नहीं करते, चुपचाप कट जाते हैं। किन्तु हैं निर्लज्ज, फिर उग आते हैं, ठीक उस निर्लज्ज अपराधी की भाँति जो दंड पाकर सजा भुगतते हैं किन्तु छूटते ही अपराध शुरू कर देते हैं।

वस्तुतः द्विवेदी यह बताना चाहते हैं कि मनुष्य अपने बढ़ते नाखूनों को काट कर अपनी बर्बर प्रवृत्ति को दूर करना चाहता है किन्तु अभी तक उसकी बर्बर वृत्ति समाप्त नहीं हुई, वह अहर्निश मारक अस्त्र-शस्त्रों के निर्माण में लगा है। लेखक इस पाशविक प्रवृत्ति को खत्म करना चाहता है। नाखून में अपराधी की उद्भावना नयी है।


BSEB Class 10th Hindi Long Subjective Question

Chapter Name Objective QueSubjective QueLong Subjective
1. श्रम विभाजन और जाति प्रथाClick HereClick HereClick Here
2. विष के दाँतClick HereClick HereClick Here
3. भारत से हम क्या सीखेंClick HereClick HereClick Here
4. नाखून क्यों बढ़ते हैंClick HereClick HereClick Here
5. नागरी लिपिClick HereClick HereClick Here
6. बहादुरClick HereClick HereClick Here
7. परंपरा का मूल्यांकनClick HereClick HereClick Here
8. जित-जित मैं निरखत हूँClick HereClick HereClick Here
9. आवियों Click HereClick Here Click Here
10. मछली Click Here Click Here Click Here
11. नौबतखाने में इबादत` Click Here Click Here Click Here
12. शिक्षा और संस्कृति Click Here Click Here Click Here

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