Bihar Board Class 10th Hindi Subjective Question Answer

Bihar Board Class 10th Hindi Subjective Question Answer 2024 | Class 10th Avinyo Subjective Question Answer In HIndi

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Bihar Board Class 10th Hindi Subjective Question Answer 2024 :- Bihar Board के लिए Bihar Board Matric Exam Hindi Ka Subjective Question Answer दिया गया है। जो की परंपरा का मूल्यांकन BSEB Class 10th Hindi Subjective Question है। जो की  Bihar Board Matric Hindi Exam के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आविन्यों के सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर | आविन्यों सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर परीक्षा के लिए Class 10th Avinyo Subjective Question Answer In HIndi

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Bihar Board Class 10th Hindi Subjective Question Answer 2024

प्रश्न 1. आविन्यों क्या है और वह कहाँ अवस्थित है?

उत्तर – आविन्यों दक्षिणी फ्रांस का एक पुराना शहर और कलाकेन्द्र है। यह रोन नदी के किनारे बसा है, जहाँ कभी कुछ समय के लिए पोप की राजधानी थी। अभी हर वर्ष गर्मियों में फ्रांस और यूरोप का अत्यन्त प्रसिद्ध और लोकप्रिय रंग – समारोह हुआ करता है ।


प्रश्न 2. हर बरस आविन्यों में कब और कैसा समारोह हुआ करता है?

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उत्तर – आविन्यों में गर्मियों में हर वर्ष फ्रांस और यूरोप का अत्यन्त प्रसिद्ध और लोकप्रिय रंग- समारोह हुआ करता है। इस समारोह में देश-विदेश के अनेक बड़े-बड़े कवि, लेखक एवं नाटककार हिस्सा लेते हैं ।


प्रश्न 3. लेखक आविन्यों किस सिलसिले में गए थे? वहाँ उन्होंने क्या देखा-सुना?

उत्तर – लेखक आविन्यों में आयोजित होने वाले रंग-समारोह में निमन्त्रित होने पर सम्मिलित होने गए थे।

आविन्यों में लेखक ने कला केन्द्र का दिग्दर्शन किया। आविन्यों रोन नदी के किनारे एक पुराना नगर है। यहाँ कुछ समय पहले पोप की राजधानी थी। वहाँ लेखक ने आविन्यों से कुछ दूर पत्थरों की एक खदान में रंग-समारोह की भव्य प्रस्तुति देखी। इस समारोह के दौरान वहाँ अनेक चर्च और पुराने स्थान रंगस्थलियों में बदल जाते थे। लेखक ने वहाँ समारोह की भव्य प्रस्तुति भी देखी महाकाव्यात्मक । कुमार गन्धर्व का गीत भी सुना था – द्रुमद्रुम लता – लता । यह सब देखकर लेखक रोमांचित हो गया ।


Class 10th Avinyo Subjective Question Answer In HIndi

प्रश्न 4. ला शत्रूज क्या है और वह कहाँ अवस्थित है? आजकल उसका क्या उपयोग होता है?

उत्तर – ला शत्रूज कार्थसियन सम्प्रदाय का एक ईसाई मठ है यह रोन नदी के दूसरी ओर आविन्यों का एक और हिस्सा है इसका नाम बीलन्व्य आविन्यों है। फ्रांस की क्रान्ति के बाद क्रान्तिकारियों ने इस पर कब्जा कर इसका जीर्णोद्धार किया और इसे एक स्मारक बना दिया। आजकल इसका प्रयोग एक कला केन्द्र के रूप में किया जा रहा है। यह केन्द्र आजकल लेखन और रंगमंच से जुड़ा हुआ है। यहाँ नाटककार, गीत संगीतकार, अभिनेता, रंगकर्मी आदि आते हैं और प्राचीन ईसाई संतों के चैम्बर्स में रहकर रचनात्मक लेखक कार्य करते हैं।


प्रश्न 5. ला शत्रुज का अन्तरंग विवरण अपने शब्दों में प्रस्तुत करते हुए यह स्पष्ट कीजिए कि लेखक ने उसके स्थापत्य को ‘मौन का स्थापत्य’ क्यों कहा है?

उत्तर – ‘ला शत्रूज’ में दो-दो कमरों के सुसज्जित चैम्बर्स हैं। यहाँ आधुनिक रसोईघर और स्नानघर भी हैं। अत्याधुनिक संगीत व्यवस्था उपलब्ध है। ला शत्रुज के प्रत्येक चैम्बर्स का मुख्य द्वार कब्रगाह के चारों ओर बने गलियारों में खुलते हैं। पीछे भी दरवाजा तथा आँगन है। चूँकि कार्यूसियन सम्प्रदाय मौन में विश्वास करता है। यहाँ बिल्कुल मौन रहता है। इसलिए लेखक ने इसके स्थापत्य को ‘मौन का स्थापत्य’ कहा है।


प्रश्न 6. लेखक आविन्यों क्या साथ लेकर गए थे और वहाँ कितने दिनो तक रहे? लेखक की उपलब्धि क्या रही ?

उत्तर – लेखक आविन्यों के यात्रा में अपने साथ टाइपराइटर मशीन, तीन-चार पुस्तकें और संगीत के कुछ टेप्स ले गए थे जहाँ लेखक उन्नीस दिन तक रहे। इस अवधि में लेखक ने पैतीस कविताएँ और सत्ताईस गद्य रचनाएँ लिखीं।


प्रश्न 7. ‘प्रतीक्षा करते हैं पत्थर’ शीर्षक कविता में कवि क्यों और कैसे पत्थर का मानवीकरण करता है?

उत्तर – मनुष्य मुक्ति, सुख, प्रिया या प्रिय को पाने की प्रतीक्षा में जीता है ऋतुएँ आती-जाती रहती हैं, मानव शरीर धीरे-धीरे क्षीण होता है, दिन-रात बीतने लगते हैं, प्रतीक्षा समाप्त नहीं होती। जब कवि पत्थरों को देखता है तो उसे लगता है कि ये पत्थर भी प्रतीक्षा कर रहे हैं-चुपचाप, रात-दिन। ये पत्थर भी मनुष्य की तरह छीजते हैं। लेकिन फिर भी डटे रहते हैं अतः कवि को दोनों में साम्य प्रतीत होता है और यहाँ कवि पत्थर का मानवीकरण करता है।


BSEB Class 10th Hindi Subjective Question 2024

प्रश्न 8. आविन्यों के प्रति लेखक कैसे अपना सम्मान प्रदर्शित करता है?

उत्तर – लेखक ने आविन्यों में 19 दिन रहकर प्रेम, शान्ति और पवित्रता का अनुभव किया है। यहाँ उसने बहुत कुछ पाया है इसीलिए वह आविन्यों के सम्मान में उसकी प्राचीनता, संवेदनशीलता तथा ऐतिहासिकता को आधार बनाकर अनेक कविताएँ रचता है, गद्य लिखता है और अपनी कृतियों में उसे हमेशा के लिए अमर रखना चाहता है।


प्रश्न 9. मनुष्य जीवन से पत्थर की क्या समानता और विषमता है?

उत्तर – मनुष्य जीवन भी बहुत कुछ पत्थर की तरह होता है। पत्थर भी मनुष्य की तरह धूप अंधड़, वर्षा आदि झेलते हैं जैसे मनुष्य छीजता है, वैसे वे भी छीजते हैं। कटने छटने पर जैसा कष्ट मनुष्य को होता है वैसी ही अनुभूति उन्हें भी होती है।

दोनों में विषमता यह है कि मनुष्य अपना सुख-दुख कहकर या रो-गाकर व्यक्त करता है लेकिन पत्थर वैसा नहीं करते। पत्थर के पास अपनी वाणी नहीं है। पत्थर साधन है, मनुष्य साध्य ।


प्रश्न 10. ‘प्रतीक्षा करते हैं पत्थर’ कविता से आप क्या सीखते हैं?

उत्तर – यह कविता हमें मौन और धैर्य की सीख देती है। मौन रहकर अपने स्तब्ध अंगों से सबकुछ कह देना, प्रत्येक स्थिति में स्थिरता कायम रखना, अपनी प्राचीनता निरंतर बनाए रखना, कामनाएँ, कल्पनाएँ एवं नवीन स्वप्न को साकार करने की बाट जोहना, व्यापक तथा आशावान रहना आदि बाते यह कविता हमें सिखाती है।


प्रश्न 11. नदी और कविता में लेखक क्या समानता पाता है?

उत्तर – नदी के समान कविता भी हमारे साथ रही है। कविता में जहाँ-तहाँ से बिम्बमालाएँ, शब्द-भंगिमाएँ, जीवन-छवियाँ और प्रतीतियाँ मिलते रहते है और एकरूप होते रहते हैं। जैसे नदी जल से खाली नहीं होती उसी प्रकार कविता भी शब्दों से खाली नहीं होती।


प्रश्न 12. किसके पास तटस्थ रह पाना संभव नहीं हो पाता और क्यों?

उत्तर – नदी और कविता में से किसी के पास तटस्थ रह पाना संभव नहीं हो पाता ! अगर हम खुलेपन से जाएँ तो उनकी अभिभूति से नहीं बच सकते। इनके साथ शामिल होना हमारी मजबूरी है, क्योंकि जैसे हमारे चेहरे पर नदी की आभा आती है वैसे ही हमारे चेहरे पर कविता की चमक होती है। दोनों की निरन्तरता हमारी नश्वरता का अनन्त से सिंचन करती है।


आविन्यों के सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर 2024

प्रश्न 13. इस कविता से आप क्या सीखते हैं?

उत्तर – इस कविता के माध्यम से हमें शिक्षा मिलती है कि पत्थर की तरह हमें सदा अपने पथ पर दृढ़ रहना चाहिए। क्योंकि जीवन का नाम ही समस्या है, जो समस्या से ऊब कर मार्गच्युत हो जाता है, उसके जीवन का मूल्य खत्म हो जाता है। जिस प्रकार पत्थर बिना किसी हलचल के सर्दी-गर्मी, ओला, बरसात आदि को सहते हुए दृढ़ रहता है, उसी प्रकार हमें धीर बने रहना चाहिए तथा उपयुक्त अवसर की प्रतीक्षा करनी चाहिए ।


प्रश्न 14. नदी के तट पर बैठे हुए लेखक को क्या अनुभव होता है?

उत्तर – नदी के तट पर बैठे हुए लेखक को लगता है कि जल स्थिर है और तट ही बह रहा है। इस संबंध में लेखक का कहना है कि जब कोई अपलक जलप्रवाह को देखता रह जाता है तो उस बहते प्रवाह के साथ वह तादात्म्य स्थापित कर लेता है अर्थात् विचारमग्न हो जाता है जिस कारण तट ही बहता प्रतीत होता है। इसीलिए लेखक कहता है कि नदी तट पर बैठना भी नदी के साथ बहना है। नदी के पास होना नदी होना है। अतः लेखक के कहने का भाव है कि व्यक्ति जिस परिवेश में होता है वह उस परिवेश के साथ इस प्रकार घुल मिल जाता है कि उसका बाह्य जगत से संबंध टूट जाता है और वह अपनी भावना के प्रवाह में बहने लगता है।


प्रश्न 15. नदी के तट पर लेखक को किसकी याद आती है और क्यों?

उत्तर – नदी के तट पर लेखक को विनोद कुमार शुक्ल की याद आती क्यों? है, क्योंकि उन्होंने अपनी कविता में ‘नदी चेहरा लोगों से मिलने की बात कही है। लेखक का कहना है कि नदी किनारे रहने वाले ही नदी – चेहरा नहीं जाते बल्कि वे भी नदी चेहरा हो जाते, जो नदी के किनारे बैठते हैं। तात्पर्य यह कि यदि कोई नदी के किनारे बैठकर नदी को, कल-कल छल-छल करती धारा की मधुर ध्वनि का आनंद लेता है, वह भावुकतावश कल्पना लोक में विचरण करने लगता है और रस सिक्त हृदय की भाँति किसी को अनदेखी नहीं करता, अपितु सबको समान रूप में काव्य-रस से अभिसिंचित करता है।


Bihar Board Matric Exam Hindi Ka Subjective Question Answer

Chapter Name Objective QueSubjective QueLong Subjective
1. श्रम विभाजन और जाति प्रथाClick HereClick HereClick Here
2. विष के दाँतClick HereClick HereClick Here
3. भारत से हम क्या सीखेंClick HereClick HereClick Here
4. नाखून क्यों बढ़ते हैंClick HereClick HereClick Here
5. नागरी लिपिClick HereClick HereClick Here
6. बहादुरClick HereClick HereClick Here
7. परंपरा का मूल्यांकनClick HereClick HereClick Here
8. जित-जित मैं निरखत हूँClick HereClick HereClick Here
9. आवियों Click HereClick Here Click Here
10. मछली Click Here Click Here Click Here
11. नौबतखाने में इबादत` Click Here Click Here Click Here
12. शिक्षा और संस्कृति Click Here Click Here Click Here

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