Bihar Board Matric Hindi Long Type Question Answer

Bihar Board Matric Hindi Long Type Question Answer | ‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ | Shram Vibhajan Aur Jati Pratha Long Subjective Question Answer In HIndi

Hindi

Bihar Board Matric Hindi Long Type Question Answer :- Bihar Board के लिए Bihar Board Matric Hindi Ka Dirgh Uttariya Question Answer दिया गया है। जो की ‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ BSEB Class 10th Hindi Long Subjective Question है। जो की  Bihar Board Matric Hindi Exam के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। श्रम विभाजन और जाति प्रथा के लॉन्ग सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर | श्रम विभाजन और जाति प्रथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर Shram Vibhajan Aur Jati Pratha Long Subjective Question Answer In HIndi

Join For Latest News And Tips

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Matric Exam 2024 Whatsapp Group


Bihar Board Matric Hindi Long Type Question Answer

1. सच्चे लोकतंत्र की स्थापना के लिए भीमराव अम्बेदकर ने किन विशेषताओं को आवश्यक माना है?

उत्तर- सच्चे लोकतंत्र की स्थापना के लिए भीमराव अम्बेदकर ने स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व पर आधारित समाज को आवश्यक माना है। ऐसे समाज में बहुविध हितों में सबकी सहभागिता होगी और सभी एक दूसरे इसकी रक्षा को तत्पर रहेंगे। उनका ख्याल था कि दूध-पानी के मेल की भाँति भाईचारा ही सच्चा लोकतंत्र है। दरअसल, लोकतंत्र एक शासन पद्धति नहीं, सामूहिक दिनचर्या और समाज के सम्मिलित अनुभवों के आदान-प्रदान का नाम है।


2. जाति प्रथा का यदि श्रम विभाजन मान लिया जाए तो यह स्वाभाविक विभाजन नहीं है, क्योंकि यह मनुष्य की रुचि पर आधारित है। कुशल व्यक्ति या सक्षम श्रमिक समाज का निर्माण करने के लिए आवश्यक है कि हम व्यक्तियों की क्षमता इस सीमा तक विकसित करें, जिससे वह अपने पेशा या कार्य का चुनाव स्वयं कर सके इस गद्यांश का भावार्थ अपने शब्दों में लिखें।

Join For Latest News And Tips

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

उत्तर- प्रस्तुत गद्यांश श्रम विभाजन और जाति प्रथा पाठ से लिया गया है। इस पाठ के लेखक भीमराव अम्बेदकर हैं।

जाति के आधार पर श्रम विभाजन बुरा है। श्रम विभाजन जातिवाद का सीमांकन नहीं है। सिर्फ श्रमिकों का बँटवारा जाति के आधार पर कर देना गलत बात है। ऐसा किसी समाज में नहीं होता ।


Bihar Board Matric Hindi Ka Dirgh Uttariya Question Answer

3. यह निर्विकार रूप से सिद्ध हो जाता है कि आर्थिक पहलू से भी जाति प्रथा हानिकारक प्रथा है; क्योंकि यह मनुष्य की स्वाभाविक प्ररेणारुचि व आत्म-शक्ति को दबाकर उन्हें अस्वाभाविक नियमों में जकड़ कर निष्क्रिय बना देती है— इस गद्यांश का भाव अपने शब्दों में लिखें।

उत्तर- प्रस्तुत गद्यांश श्रम विभाजन और जाति प्रथा पाठ से लिया गया है। इस पाठ के लेखक भीमराव अम्बेदकर हैं।

जाति प्रथा के कारण लोग किसी भी कार्य को अरुचि के साथ रोटी की विवशतावश करते हैं। इसलिए काम करने वाले का दिल और दिमाग उस काम में न लगे तो कुशलता भी नहीं बढ़ सकती और जाति प्रथा के कारण आर्थिक पहलू में भी हानिकारक है जो आत्मशक्ति और प्रेरणारुचि को समाप्त कर देती है।


4. लोकतंत्र केवल शासन की एक पद्धति ही नहीं है, लोकतंत्र मूलतः सामूहिक जीवनचर्या की एक रीति तथा समाज के सम्मिलित अनुभवों के आदान-प्रदान का नाम है— इस गद्यांश का सप्रसंग व्याख्या करें।

उत्तर- प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक ‘गोधूलि – 2’ के ‘ श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ शीर्षक पाठ से उद्धृत हैं। प्रस्तुत पंक्ति में लेखक भीमराव अम्बेदकर ने लोकतंत्र के सच्चे स्वरूप का उल्लेख किया है।

लेखक कहता है कि लोकतंत्र मात्र शासन पद्धति नहीं है जिससे देश संचालित हो। वस्तुतः यह एक ऐसी जीवन शैली है जिसमें समाज के सभी वर्गों के लोग एक-दूसरे की भावनाओं का आदर करते और अपने अधिकारों की ही रक्षा नहीं करते अपितु दूसरे के अधिकारों की भी चिन्ता करते हैं और अपने-अपने कर्त्तव्यों का पालन करते हैं, वे कभी दूसरे की आजादी नहीं छीनते ।


BSEB Class 10th Hindi Long Subjective Question

5. जातिवाद के विरुद्ध अम्बेदकर की प्रमुख आपत्तियाँ क्या है? 

या जाति के आधार पर श्रम विभाजन अस्वाभाविक है। कैसे?

या जाति भारतीय समाज में श्रम विभाजन का स्वाभाविक रूप क्यों नहीं कही जा सकती ?

उत्तर- जातिवाद के पक्ष में श्रम विभाजन के आवरण में जो तर्क दिए जाते हैं उसके संबंध में भीमराव अम्बेदकर की आपत्ति यह है कि जातिवाद के अंतर्गत श्रम विभाजन स्वाभाविक नहीं है क्योंकि यह मनुष्य की रुचि पर आधारित नहीं है। जाति प्रथा में मनुष्य के प्रशिक्षण या क्षमता पर विचार किए बिना, गर्भधारण के साथ या बच्चे के जन्म लेते ही, माता-पिता के पेशा के अनुसार उसका पेशा निर्धारित कर दिया जाता है इससे मनुष्य एक पेशे से आजीवन बंध जाता है, भले ही उससे उसकी रोजी-रोटी चले, न चले।


6. जाति प्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण बनी हुई है। कैसे?

या जाति प्रथा के दूषित सिद्धांत क्या हैं?

उत्तर- भारत में जाति प्रथा के अन्तर्गत मनुष्य का पेशा या जीवनधार जन्म से ही निश्चित हो जाता है माता-पिता का जो पेशा है, उसी पेशा को उसे अख्तियार करना है, रुचि अरुचि का प्रश्न ही नहीं उठता। भले ही पेशा के अनुपयुक्त होने के चलते उसे भूखों मरना पड़े। आज के युग में, उद्योग-धंधों की प्रक्रिया और तकनीकी में निरंतर बदलाव आता है। ऐसी हालत में मनुष्य को अपना पेशा बदलने की जरूरत पड़ सकती है अन्यथा भूखों मरना पड़ सकता है। हिन्दू धर्म की जाति प्रथा पेशा चुनने या बदलने की अनुमति नहीं देती, भले ही वह दूसरे में पारंगत हो। इस तरह, पेशा परिवर्तन की अनुमति न होने से जाति प्रथा देश में बेरोजगारी का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण बनी हुई है।


श्रम विभाजन और जाति प्रथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर

7. भीमराव अम्बेदकर ने किन प्रमुख पहलुओं से जाति प्रथा को एक हानिकारक प्रथा के रूप में दिखाया है?

या, भीमराव अम्बेदकर ने आधुनिक श्रम विभाजन और जाति प्रथा के अन्तर को किस प्रकार स्पष्ट किया है?

या, ‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ पाठ का सारांश लिखें।

उत्तर- आज के युग में भी जाति प्रथा की वकालत सबसे बड़ी विडंबना है। ये लोग तर्क देते हैं कि जाति प्रथा श्रम विभाजन का ही एक रूप है। ऐसे लोग भूल जाते हैं कि श्रम विभाजन श्रमिक-विभाजन नहीं है। श्रम विभाजन निस्संदेह आधुनिक युग की आवश्यकता है, श्रमिक-विभाजन नहीं जाति प्रथा श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन और इनमें ऊँच-नीच का भेद करती है।

वस्तुतः जाति प्रथा को श्रम विभाजन नहीं माना जा सकता क्योंकि श्रम विभाजन मनुष्य की रुचि पर होता है, जबकि जाति प्रथा मनुष्य पर जन्मना पेशा थोप देती है। मनुष्य की रुचि अरुचि इसमें कोई मायने नहीं रखती। ऐसी हालत में व्यक्ति अपना काम टालू ढंग से करता है, न कुशलता आती है न श्रेष्ठ उत्पादन होता है। चूँकि व्यवसाय में, ऊँच-नीच होता रहता है, अतः जरूरी है पेशा बदलने का विकल्प। चूँकि जाति प्रथा में पेशा बदलने की गुंजाइश नहीं है, इसलिए यह प्रथा गरीबी और उत्पीड़न तथा बेरोजगारी को जन्म देती है। भारत की गरीबी और बेरोजगारी के मूल में जाति प्रथा

अतः स्पष्ट है कि हमारा समाज आदर्श समाज नहीं है। आदर्श समाज में बहुविध हितों में सबका भाग होता है। इसमें अवाध संपर्क के अनेक साधन एवं अवसर उपलब्ध होते हैं लोग दूध पानी की तरह हिले मिले रहते हैं। इसी का नाम लोकतंत्र है। लोकतंत्र मूल रूप से सामूहिक जीवन-चर्या और सम्मिलित अनुभवों के आदान-प्रदान का नाम है।


BSEB Class 10th Long Questiopn Answer

Chapter Name Objective QueSubjective QueLong Subjective
1. श्रम विभाजन और जाति प्रथाClick HereClick HereClick Here
2. विष के दाँतClick HereClick HereClick Here
3. भारत से हम क्या सीखेंClick HereClick HereClick Here
4. नाखून क्यों बढ़ते हैंClick HereClick HereClick Here
5. नागरी लिपिClick HereClick HereClick Here
6. बहादुरClick HereClick HereClick Here
7. परंपरा का मूल्यांकनClick HereClick HereClick Here
8. जित-जित मैं निरखत हूँClick HereClick HereClick Here
9. आवियों Click HereClick Here Click Here
10. मछली Click Here Click Here Click Here
11. नौबतखाने में इबादत` Click Here Click Here Click Here
12. शिक्षा और संस्कृति Click Here Click Here Click Here

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *