Bihar Board Matric Hindi Subjective Question PDF

Bihar Board Matric Hindi Subjective Question PDF | Bihar Board Class 10th Hindi Ka Dirgh Uttariya Question Answer

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Bihar Board Matric Hindi Subjective Question PDF :- Bihar Board के लिए Bihar Board Class 10th Hindi Ka Dirgh Uttariya Question Answer दिया गया है। जो की  BSEB Class 10th Hindi Long Subjective Question है। जो की  Bihar Board Matric Hindi Exam के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हिंदी के लॉन्ग सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर | बिहार बोर्ड कक्षा 10वीं हिंदी का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर Class 10th Hindi Subjective Question Answer In HIndi

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Bihar Board Matric Hindi Subjective Question PDF

प्रश्न 1. वाणी कब विष के समान हो जाती है ?

उत्तर— वाणी तब विष के समान हो जाती है जब व्यक्ति राम नाम की चर्चा या भजन न करके सांसारिकता की चर्चा करता है। तात्पर्य यह कि जब व्यक्ति ईश्वर के नाम की महिमा का गुणगान न करके मति भ्रमता के कारण – पूजा-पाठ, कर्मकाण्ड या बाह्याडंबर में विश्वास करने लगता है।


प्रश्न 2 नाम कीर्तन के आगे कवि किन कर्मों की व्यर्थता सिद्ध करता है?

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उत्तर— कवि गुरु नानक का कहना है कि नाम कीर्तन ही व्यक्ति को इस दुःखमय संसार में शांति प्रदान कर सकता है पूजा-पाठ, संध्या-तर्पण, वेशभूषा से आन्तरिक शुद्धि नहीं होती, क्योंकि इसमें ब्राह्माडंबर के कारण अहंकार भावना जन्म लेती है, जबकि नाम कीर्तन से हृदय में प्रेम रस का – संचार होने के कारण जीवन में सहजता आ जाती है। अतः नाम-कीर्तन अथवा भगवद् भजन के अतिरिक्त सारे बाह्याडंबर व्यर्थ है।


प्रश्न 3. प्रथम पद के आधार पर बताएँ कि कवि ने अपने युग में धर्म-साधना के कैसे-कैसे रूप देखे थे?

उत्तर— प्रथम पद में कवि ने धर्म-साधना के विभिन्न रूपों के विषय में कहा है कि उस समय अपनी मुक्ति के लिए साधुजन वैराग्य के चिह्न के रूप में डड- कमंडल धारण किए हुए थे, लंबी-लंबी शिखा रखते थे, जनेऊ पहनते थे, तीर्थ यात्रा करते थे, जटा का मुकुट बनाकर शरीर में राख रमाए – नंगा रहते थे। अतः नानक देव का कहना है कि उस समय बाह्याडंबर की चमक-दमक थी। लोग इसी को धर्मसाधना का मुख्य साधन मानते थे। वर्णाश्रम व्यवस्था के कारण ऊँच-नीच की भावना समाज में प्रबल रूप में – व्याप्त थी। कवि अपने युग में ऐसी ही धर्म-साधना से दो-चार हुआ था।


Bihar Board Class 10th Hindi Ka Dirgh Uttariya Question Answer

प्रश्न 4. कवि की दृष्टि में ब्रह्म का निवास कहाँ है ?

उत्तर— कवि की दृष्टि में ब्रह्म का निवास अंत:करण में है कवि का मानना है कि जब व्यक्ति सच्चे दिल से उस परमपिता परमेश्वर को याद करता है तब उसका अंत:करण प्रेम-रस से आलोड़ित हो जाता है। उसका चित्त शांत हो जाता है। इसीलिए कवि कहता है कि ईश्वर का निवास न तो किसी मंदिर, मस्जिद में है और न ही पूजा-पाठ, कर्मकाण्ड अथवा विशेष प्रकार की वेशभूषा में है, बल्कि ईश्वर का निवास सच्चे प्रेम में है जो अंतःकरण से उद्धृत होता है ।


प्रश्न 5. “जो नर दुख में दुख नहिं माने” कविता का भावार्थं लिखें।

उत्तर— गुरु नानक कहते हैं कि मनुष्य वही है जो सुख-दुःख को एक समान मानता है जिसके मन में किसी का भय नहीं है, जो सोना को मिट्टी समझता है, जिसे न स्तुति की इच्छा है, न निन्दा की चिन्ता, जो मोह लोभ, हर्ष शोक, मान-अपमान, आशा-निराशा, काम-क्रोध से परे है, उसी के हृदय में ब्रह्म का वास है। जिस पर गुरु की कृपा होती है, वही यह तथ्य जानता है। नानक इसी ईश्वर में लीन है, जैसे पानी पानी में समा जाता है। ,


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प्रश्न 6. कवि गुरुनानक किसके बिना जगत् में यह जन्म व्यर्थ मानते हैं? वाणी कब विष के समान हो जाती है ?

उत्तर— कवि राम नाम के बिना जगत में जन्म को व्यर्थ मानते है। राम नाम के बिना वाणी विष हो जाती है।


प्रश्न 7. हरिरस से कवि का अभिप्राय क्या है? [19] (A) II)

उत्तर— भगवान के नाम कीर्तन से भक्ति की प्राप्ति होती है और इसी से भक्तिरस मिलता है। यही भक्तिरस, कवि के अनुसार हरिरस है।


प्रश्न 8. गुरु की कृपा से किस युक्ति की पहचान हो पाती है?

उत्तर— गुरु की कृपा से ब्रह्म को प्राप्त करने की युक्ति की पहचान हो जाती है कि जो व्यक्ति दुख-सुख, मान अभिमान, निन्दा-स्तुति, मान-अपमान, आशा मनसा, काम-क्रोध, हर्ष-शोक आदि से दूर है और सोने – को भी मिट्टी ही समझता है, उसी के साथ ब्रह्म का निवास है।


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प्रश्न 9. आधुनिक जीवन में उपासना के प्रचलित रूपों को देखते हुए नानक के पदों की क्या प्रासंगिकता है? अपने शब्दों में विचार करें।

उत्तर— नानक के पद भक्ति मार्ग से सम्बद्ध है। यह लोगों के सुखी जीवन का रास्ता है। चाहे लोग कितना ही दुनियादारी निभाएँ, उन्हें सुख तो चाहिए ही और व्यक्ति के जीवन में सुख के लिए इससे बढ़कर दूसरा कोई मार्ग नहीं। इसलिए, सब कुछ के बावजूद उपासना के रूप में नानक के इन पदों की प्रासंगिकता बनी हुई है। राम का नाम लेते हुए सब कर्म करना उपासना की श्रेष्ठ पद्धति है।


प्रश्न 10. ‘राम नाम बिनु बिरथे जगि जनमा’ पद का मुख्य भाव क्या है ?

उत्तर— इस पद के माध्यम से गुरूनानक कहते है कि राम-नाम के जाप के बिना जगत में जन्म व्यर्थ है । कवि ने बाहरी वेश-भूषा, पूजा-पाठ और कर्मकाण्ड के स्थान पर सरल हृदय से राम-नाम के कीर्त्तन पर बल दिया है ।


प्रश्न 11. मुक्ति के लिए किसे अनिवार्य माना गया है ?

उत्तर— मुक्ति के लिए कवि ने ईश्वर के भजन में लीन होने को अनिवार्य माना है । कवि कहता है कि व्यक्ति जब माया से मुक्ति पाने के लिए संसार की नश्वरता को मानता हुआ अपने-आपको ईश्वर भजन में लीन कर देता है, तब वह ईश्वर से समाहित हो जाता है और उसे मुक्ति मिल जाती है ।


BSEB Class 10th Hindi Long Subjective Question

 Class 10th Hndi गोधूलि भाग 2 ( काव्यखंड ) Objective 2024
13. राम बिनु बिरथे जगि जनमा Click Here Click Here Click Here
14. प्रेम-अयनि श्री राधिका Click Here Click Here Click Here
15. अति सूधो सनेह को मारग है Click Here Click Here Click Here
16. स्वदेशी Click Here Click Here Click Here
17. भारतमाता Click Here Click Here Click Here
18. जनतंत्र का जन्म Click Here Click Here Click Here
19. हिरोशिमा Click Here Click Here Click Here
20. एक वृक्ष की हत्याClick HereClick HereClick Here
21. हमारी नींदClick HereClick HereClick Here
22. अक्षर-ज्ञानClick HereClick HereClick Here
23. लौटकर आऊंगा फिरClick HereClick HereClick Here
24. मेरे बिना तुम प्रभुClick HereClick HereClick Here

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