Class 10th Subjective Question Answer In HIndi PDF

Class 10th Subjective Question Answer In HIndi PDF | Nakhun Kyon Badhate Hain Subjective Question Answer In HIndi

Hindi

Class 10th Subjective Question Answer In HIndi PDF :- Bihar Board के लिए Bihar Board Matric Exam Hindi Ka Subjective Question Answer दिया गया है। जो की विष के दाँत BSEB Class 10th Hindi Subjective Question है। जो की  Bihar Board Matric Hindi Exam के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। नाखून क्यों बढ़ते हैं के सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर | नाखून क्यों बढ़ते हैं का लेखक कौन है Nakhun Kyon Badhate Hain Subjective Question Answer In HIndi

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Class 10th Subjective Question Answer In HIndi PDF

प्रश्न 1. नाखून क्यों बढ़ते हैं? यह प्रश्न लेखक के आगे कैसे उपस्थित हुआ?

उत्तर- नाखून क्यों बढ़ते है, यह प्रश्न लेखक के सामने उनकी छोटी पुत्री द्वारा एक दिन उपस्थित किया गया। इस प्रकार, इस प्रश्न ने लेखक को इसका विचार करने के लिए आन्दोलित किया।


प्रश्न 2. बढ़ते नाखूनों द्वारा प्रकृति मनुष्य को क्या याद दिलाती है?

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उत्तर — बढ़ते नाखूनों द्वारा प्रकृति मनुष्य को यह याद दिलाती है कि – तुम भीतर वाले स्वाभाविक अस्त्र से अब भी वचित नहीं किए गए हो। तुम्हारे नाखून भुलाए नहीं जा सकते। तुम वही प्राचीनतम नख एवं दंत वाले पशु हो। तुम नाखूनों को चाहे जितना काटो वे बढ़ते ही रहेंगे। अतः प्रकृति मनुष्य को आदिमानव रूप की याद दिलाती है।


प्रश्न 3. लेखक द्वारा नाखूनों को अस्त्र के रूप में देखना कहाँ तक संगत है ?

उत्तर— नाखूनों को लेखक द्वारा अस्त्र के रूप में देखना पूर्णतः तर्क संगत है हम आज भी आदिमानव के जीवन के बारे में जब पढ़ते हैं तब पाते हैं कि आदिमानव जंगलों में रहता था और कंदमूल खाकर तथा शिकार कर जीवन बिताता था जबकि उसके पास कोई वस्त्र और अस्त्र भी नहीं थे। तब वह जरूर नाखूनों का उपयोग अस्त्र के रूप में करता होगा।


प्रश्न 4. मनुष्य बार-बार नाखूनों को क्यों काटता है?

उत्तर – अब चूँकि मनुष्य सभ्य बन गया है। उसे बाहरी अस्त्र-शस्त्र भी बहुत मिल गए हैं, इसलिए नाखूनों को काट डालता है, क्योंकि अब इसकी कोई आवश्यकता नहीं रह गयी है। मनुष्य इसे बार-बार काटकर अपनी पशुत्ता को मिटाना चाहता है।


Nakhun Kyon Badhate Hain Subjective Question Answer In HIndi

प्रश्न 5. सुकुमार विनोदों के लिए नाखून को उपयोग में लाना मनुष्य ने कैसे शुरू किया ? लेखक ने इस सम्बन्ध में क्या बताया है ?

उत्तर – लेखक का कहना है कि कुछ हजार वर्ष पूर्व मनुष्य ने नाखून को सुकुमार विनोदों के लिए उपयोग में लाना शुरू किया था। भारतवासी नाखूनों को खूब संवारते थे। उनके काटने की कला काफी मनोरंजक थीं। विलासी नागरिकों के नाखून त्रिकोण, वर्तुलाकार, चन्द्राकार, दंतुल आदि विविध आकृतियों के रखे जाते थे लोग मोम एवं आलता से इन्हें लाल एवं चिकना बनाते थे । ये सारी बातें वात्स्यायन के कामसूत्र से पता चलती है।


प्रश्न 6. नख बढ़ाना और उन्हें काटना कैसे मनुष्य की सहजात वृत्तियाँ हैं ? इनका क्या अभिप्राय है ?

उत्तर— नख बढ़ाना और उन्हें काटना मनुष्य की अभ्यासजन्य सहज वृत्तियाँ हैं। शरीर ने अपने भीतर एक ऐसा सहज गुण पैदा कर लिया है जो अनायास ही काम करता है। असल में सहजात वृत्तियाँ अनजान स्मृतियों को कहते हैं। मनुष्य के भीतर नख बढ़ने की जो सहजात वृत्ति है, वह उसके पशुत्व का प्रमाण है और उन्हें काटने की जो प्रवृत्ति है, वह उसकी मनुष्यता की निशानी है। यद्यपि पशुत्व के चिह्न उसके भीतर रह गये हैं। लेकिन वह पशुत्व को छोड़ चुका है क्योंकि पशु बनकर वह आगे नहीं बढ़ सकता । अतः लेखक के कहने का अभिप्राय यह है कि जब तक मनुष्य अस्त्र बढ़ाने की ओर उन्मुख है उसमें पशुता की निशानी शेष है क्योंकि अस्त्र-शस्त्र बढ़ाने की प्रवृत्ति मनुष्यता की विरोधिनी है।


प्रश्न 7. लेखक क्यों पूछता है कि मनुष्य किस ओर बढ़ रहा है, पशुता की ओर या मनुष्यता की ओर ? स्पष्ट करें।

उत्तर— लेखक का मानना है कि नाखून बढ़ना मनुष्य की पशुता की निशानी है और नाखून काटना मनुष्यता की। किन्तु उसे आश्चर्य है कि जब मनुष्य की रक्षा के लिए मनुष्य नाखून काटता है तब इतना मारक अस्त्र का निर्माण वह क्यों करता है ? अस्त्र-शस्त्र भी तो नाखून की तरह पशुता की ही निशानी हैं। इसलिए, लेखक का प्रश्न उचित है। इसलिए, लेखक मारणास्त्रों के बढ़ते प्रयोग को देखकर यह प्रश्न पूछता है।


प्रश्न 8. देश की आजादी के लिए प्रयुक्त किन शब्दों की अर्थमीमांसा लेखक ने की और लेखक के निष्कर्ष क्या हैं ?

उत्तर – देश की आजादी के लिए प्रयुक्त इंडिपेंडेंस, स्वाधीनता तथा सेल्फ इंडिपेंडेंस शब्दों की अर्थमीमांसा लेखक करता है। लेखक का निष्कर्ष है कि इंडिपेंडेंस शब्द का हिन्दी अर्थ होना चाहिए अधीनता किन्तु हमारे पूर्वजों ने अपने स्व की अधीनता को सबसे बढ़कर माना है, इसलिए इंडिपेंडेंस के बदले अनधीनता न मानकर स्वतंत्रता, स्वराज्य, स्वाधीनता आदि रखा ।


प्रश्न 9. लेखक ने किस प्रसंग में कहा है कि बंदरिया मनुष्य का

आदर्श नहीं बन सकती ? लेखक का अभिप्राय स्पष्ट करें ।

उत्तर – लेखक ने प्रश्न में कही गयी बात अपनी प्राचीन संस्कृति और परंपरा के प्रति मोह के सम्बन्ध में कही है। उनका कहना है कि पुराने के मोह में फँसा रहना या नए के आकर्षण में बँध जाना दोनों हमारी संस्कृति और मनुष्यता के परे है। बल्कि, सही निरीक्षण कर जो सही हो, हितकर हो वहीं ग्रहण करना चाहिए। मोहवश बंदरिया की भाँति अनुपयोगी वस्तुओं से नहीं चिपकना चाहिए।


नाखून क्यों बढ़ते हैं के सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर

प्रश्न 10. ‘स्वाधीनता’ शब्द की सार्थकता लेखक क्या बताता है ?

उत्तर – स्वाधीनता शब्द की सार्थकता लेखक हमारे दीर्घकालीन संस्कारों का फल बताता है। भारतीय चित्त कभी स्वयं को अधीनता के रूप में न सोचकर स्वाधीनता के रूप में ही सोचता है। इसकी सार्थकता अपने ‘स्व’ के बन्धन को आसानी से नहीं छोड़ने में है। अपने आप पर अपने-आप के द्वारा लगाया हुआ बन्धन हमारी संस्कृति की बड़ी विशेषता है।


प्रश्न 11. निबंध में लेखक ने किस बूढ़े का जिक्र किया है ? लेखक की दृष्टि में बूढ़े के कथनों की सार्थकता क्या है ?

उत्तर – निबन्ध में किसी महात्मा बूढ़े की बात कही गयी है। संभवत: महात्मा गाँधी के बारे में कहा गया है। लेखक के अनुसार बूढ़े की बात में वास्तविक चरितार्थता है, गहरा अनुभव है। ‘स्व’ का बंधन मनुष्य का स्वभाव है । लेखक की दृष्टि में बूढ़े के कथनों की सार्थकता यह है कि उन्होंने जीवन की गहराई में पैठकर मनुष्यता जैसे भीतरी गुण को जगाने या अपनाने पर बल दिया है क्योंकि यहीं गुण मनुष्य को मनुष्य बनाता है।


प्रश्न 12. मनुष्य की पूँछ की तरह उसके नाखून भी एक दिन झड़ जाएँगे । – प्राणि – शास्त्रियों के इस अनुमान से लेखक के मन में कैसी आशा जगती है?

उत्तर – प्राणिशास्त्रियों के इस अनुमान से लेखक को काफी आशा जगती है कि मनुष्य की पशुता का अस्त्र एक दिन समाप्त हो जाएगा और इसके साथ ही मनुष्य की पशुता भी सदा के लिए विलीन हो जाएगी ।


Class 10th Subjective Question Answer In HIndi PDF

प्रश्न 13. ‘सफलता’ और चरितार्थता’ शब्दों में लेखक अर्थ की भिन्नता किस प्रकार प्रतिपादित करता है ?

उत्तर – सफलता को लेखक बल और बलप्रदर्शन की बात मानता है, जबकि चरितार्थता को मनुष्य का सद्गुण मानता है। एक का संबंध बाहरी तथा देख – दिखावा की बात है, तो दूसरी आन्तरिक और सामाजिक गुण है ।


प्रश्न 14. लेखक की दृष्टि में हमारी संस्कृति की बड़ी भारी विशेषता क्या है ? स्पष्ट कीजिए

उत्तर — अपने आप पर अपने-आप द्वारा लगाया हुआ बंधन हमारी संस्कृति की बड़ी भारी विशेषता है। यानी यह भारतीय संस्कृति और संस्कार का फल है कि हम अधीनता के रूप में न सोचकर स्वाधीनता के रूप में सोचते हैं। लेखक का मानना है कि हमारी परम्परा महिमामयी, अगाध विरासत तथा उज्ज्वल संस्कार है। देशवासी ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में नए नहीं हैं। हमारी संस्कृति की विशेषता हमें एक खास दिशा में सोचने की प्रेरणा देती है।


BSEB Class 10th Hindi Subjective Question

Chapter Name Objective QueSubjective QueLong Subjective
1. श्रम विभाजन और जाति प्रथाClick HereClick HereClick Here
2. विष के दाँतClick HereClick HereClick Here
3. भारत से हम क्या सीखेंClick HereClick HereClick Here
4. नाखून क्यों बढ़ते हैंClick HereClick HereClick Here
5. नागरी लिपिClick HereClick HereClick Here
6. बहादुरClick HereClick HereClick Here
7. परंपरा का मूल्यांकनClick HereClick HereClick Here
8. जित-जित मैं निरखत हूँClick HereClick HereClick Here
9. आवियों Click HereClick Here Click Here
10. मछली Click Here Click Here Click Here
11. नौबतखाने में इबादत` Click Here Click Here Click Here
12. शिक्षा और संस्कृति Click Here Click Here Click Here

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