Matric Hindi Important Long Subjective Question

Matric Hindi Most Important Long Subjective Question | Class 10th Hindi Long Subjective Question Answer In Hindi

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Matric Hindi Important Long Subjective Question Answer :- Bihar Board के लिए Bihar Board Class 10th Hindi Ka Dirgh Uttariya Question Answer दिया गया है। जो की BSEB Class 10th Hindi Long Subjective Question है। जो की  Bihar Board Matric Hindi Exam के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। कक्षा 10वीं हिन्दी के लॉन्ग सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर | बिहार बोर्ड मैट्रिक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर Class 10th Hindi Long Subjective Question Answer In Hindi

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Matric Hindi Important Long Subjective Question Answer

प्रश्न 1. कवि प्रेममार्ग को ‘अति सूधो’ क्यों कहता है ? इस मार्ग की विशेषता क्या है ?

उत्तर ⇒ कवि प्रेम की भावना को अमृत के समान पवित्र एवं मधुर बताते हैं। ये कहते हैं कि प्रेममार्ग पर चलना सरल है। इसपर चलने के लिए बहुत अधिक छल-कपट की आवश्यकता नहीं है । प्रेमपथ पर अग्रसर होने के लिए अत्यधिक सोच-विचार नहीं करना पड़ता और न ही किसी बुद्धि-ब – बल की आवश्यकता होती है। इसमें भक्ति की भावना प्रधान होती है। प्रेम की भावना आसानी से ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है। प्रेम में सर्वस्व देने की बात होती है लेने की अपेक्षा लेशमात्र भी नहीं होता। यह मार्ग टेढ़ापन से मुक्त है। प्रेम में प्रेमी बेझिझक निःसंकोच भाव से, सरलता से, सहजता से प्रेम करने वाले से एकाकार कर है।


प्रश्न 2. ‘अति सूधो सनेह को मारग है, ‘मो अँसुवानिहि लै बरसी कविता का सारांश लिखें ।

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उत्तर ⇒ पाठयपुस्तक में उन्मुक्त प्रेम के स्वच्छंद मार्ग पर चलने वाले महान प्रेमी घनानंद (घन आनंद) के दो सवैये पाठयपुस्तक में संकलित हैं। प्रथमा सवैया में प्रेम के सीधे, सरल और निश्छल मार्ग की बात कही गई है और दूसरे सवैया में मेघ की अन्योक्ति के द्वारा विरह वेदना भरे हृदय की तड़प को अत्यंत कलात्मक ढंग से अभिव्यक्त किया गया है।

घनानंद कहते हैं कि प्रेम का मार्ग तो अत्यंत सीधा, सरल और निश्छल होता है | यहाँ चतुराई के लिए कोई स्थान नहीं होता हृदय से सीधे लोग ही प्रेम कर सकते हैं, सांसारिक और चतुर लोग नहीं । यहाँ तनिक भी चतुराई का टेढ़ापन नहीं चलता । यहाँ सच्चे हृदय का चलता है। जो अपने अहंकार का त्याग कर देता है, वही प्रेम कर सकता है। कपटी लोग प्रेम नहीं कर सकते। प्रेम शंकामुक्ति की अवस्था शंकालु हृदय प्रेम नहीं कर सकता। घनानंद कहते हैं कि प्रेम में ऐकांतिकता होती है। ‘सुजान’ को उपालंभ देता हुआ कवि कहता है कि आपने कौन-सी विद्या पढ़ी है. कि आसानी से चित्त का हरण कर लेते हैं, पर दर्शन देने में कोताही करते हैं। लेने के लिए तो बहुत कुछ (मन, एक माप) ले लेते हैं, पर देने नाम पर कुछ भी नहीं (छटाँक, एक माप ) !

दूसरे सवैया में मेघ की अन्योक्ति के माध्यम से घनानंद ने अपनी विरह-वेदना की अभिव्यक्ति की है। कवि कहता है- हे मेघ, तुमने दूसरों के लिए ही देह धारण की है, अपना यथार्थ स्वरूप दिखलाओ। अपनी सज्जनता का परिचय देते हुए मेरे हृदय की वेदना को कभी तो उस ‘विश्वासी’ (व्यंग्य और उपालंभ से पूर्ण शब्द, सुजान के लिए प्रयुक्त शब्द) के आँगन में मेरे आँसुओं को (मुझसे लेकर) बरसाओ कि उन्हें मेरी याद आए और वे मेरी सुध ले सकें।
सप्रसंग व्याख्या


Class 10th Hindi Long Subjective Question Answer In Hindi

प्रश्न 3. सप्रसंग व्याख्या कीजिए :

अति सनेह को ………….बाँक नहीं, 

तहाँ साँचे चलें ………….निसाँक नहीं ।

उत्तर ⇒ प्रस्तुत सवैया में रीतिकालीन काव्यधारा के प्रमुख कवि घनानंद – रचित ‘अति सूधो सनेह को मारग है’, से उद्धत है इसमें कवि प्रेम की पीड़ा एवं प्रेम की

भावना के सरल और स्वाभाविक मार्ग का विवेचन करते हैं । कवि कहते हैं कि प्रेममार्ग अमृत के समान अति पवित्र है । इस प्रेमरूपी मार्ग में चतुराई और टेढ़ापन अर्थात् कपटशीलता का कोई स्थान नहीं हैं। इस प्रेमरूपी मार्ग में जो प्रेमी होते हैं वे अनायास ही सत्य के रास्ते पर चलते हैं तथा उनके अंदर के अहंकार समाप्त हो जाते हैं । यह प्रेमरूपी मार्ग इतना पवित्र है कि इसपर चलने वाले प्रेमी के हृदय में लेसमात्र भी झिझक, कपट और शंका नहीं रहती है। वह कपटी जो निःशंक नहीं है, इस मार्ग पर नहीं चल सकता ।


बिहार बोर्ड मैट्रिक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर

प्रश्न 4. ‘यहाँ एक तैं दूसरी आँक नहीं’ की व्याख्या करें । 

उत्तर ⇒ प्रस्तुत पंक्ति हिन्दी साहित्य की पाठ्य पुस्तक के कवि घनानंद द्वारा रचित ‘अति सूधो सनेह को मारग है’ पाठ से उद्धृत है । इसके माध्यम से कवि प्रेमी और प्रेयषी का एकाकार करते हुए कहते हैं कि प्रेम में दो की पहचान अलग-अलग नहीं रहती, बल्कि दोनों मिलकर एक रूप में स्थित हो जाते हैं। प्रेमी निश्छल भाव से सर्वस्व समर्पण की भावना रखता है और तुलनात्मक अपेक्षा नहीं करता है । मात्र देता है, बदले में कुछ लेने की आशा नहीं करता है ।

प्रस्तुत पंक्ति में कवि घनानंद अपनी प्रेमिका सुजान को संबोधित करते हैं कि हे सुजान, सुनो ! यहाँ अर्थात् मेरे प्रेम में तुम्हारे सिवा कोई दूसरा चिह्न नहीं है मेरे हृदय में मात्र तुम्हारा ही चित्र अंकित है ।


BSEB Class 10th Hindi Long Subjective Question

 Class 10th Hndi गोधूलि भाग 2 ( गद्यखंड ) Objective 2023
Chapter Name Objective QueSubjective QueLong Subjective
1. श्रम विभाजन और जाति प्रथाClick HereClick HereClick Here
2. विष के दाँतClick HereClick HereClick Here
3. भारत से हम क्या सीखेंClick HereClick HereClick Here
4. नाखून क्यों बढ़ते हैंClick HereClick HereClick Here
5. नागरी लिपिClick HereClick HereClick Here
6. बहादुरClick HereClick HereClick Here
7. परंपरा का मूल्यांकनClick HereClick HereClick Here
8. जित-जित मैं निरखत हूँClick HereClick HereClick Here
9. आवियों Click HereClick Here Click Here
10. मछली Click Here Click Here Click Here
11. नौबतखाने में इबादत` Click Here Click Here Click Here
12. शिक्षा और संस्कृति Click Here Click Here Click Here
 Class 10th Hndi गोधूलि भाग 2 ( काव्यखंड ) Objective 2023
13. राम बिनु बिरथे जगि जनमा Click Here Click Here Click Here
14. प्रेम-अयनि श्री राधिका Click Here Click Here Click Here
15. अति सूधो सनेह को मारग है Click Here Click Here Click Here
16. स्वदेशी Click Here Click Here Click Here
17. भारतमाता Click Here Click Here Click Here
18. जनतंत्र का जन्म Click Here Click Here Click Here
19. हिरोशिमा Click Here Click Here Click Here
20. एक वृक्ष की हत्याClick HereClick HereClick Here
21. हमारी नींदClick HereClick HereClick Here
22. अक्षर-ज्ञानClick HereClick HereClick Here
23. लौटकर आऊंगा फिरClick HereClick HereClick Here
24. मेरे बिना तुम प्रभुClick HereClick HereClick Here
S.NMatric Exam 2023 Objective Question
1.Hindi  – गोधूलि भाग 2
2.Hindi – हिंदी व्याकरण
3.SCIENCE – विज्ञान
4.SOCIAL SCIENCE – सामाजिक विज्ञान
5.SANSKRIT – संस्कृत
6.MTHEMATICS – गणित
7.ENGLISH – इंग्लिश

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