Matric Hindi Ka Long Subjective Question Answer

Matric Hindi Ka Long Subjective Question Answer | ‘जित – जित मैं निरखत हूँ’ | Bihar Board Class 10th Hindi jit jit main nirkhat hun Ka Dirgh Uttariya Question Answer

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Matric Hindi Ka Long Subjective Question Answer :- Bihar Board के लिए Bihar Board Class 10th Hindi jit jit main nirkhat hun Ka Dirgh Uttariya Question Answer दिया गया है। जो की विष के दाँत BSEB Class 10th Hindi Long Subjective Question है। जो की  Bihar Board Matric Hindi Exam के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। जित जित मैं निरखत हूँ के लॉन्ग सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर | बिहार बोर्ड मैट्रिक जित जित मैं निरखत हूँ दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर Class 10th Hindi jit jit main nirkhat hun Long Subjective Question Answer In HIndi

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Matric Hindi Ka Long Subjective Question Answer

1. बिरजू महाराज के गुरु कौन थे? संक्षिप्त परिचय दें। 

उत्तर – बिरजू महाराज के गुरु उनके पिताजी थे। उन्होंने स्वयं अपने पिता का शिष्य होने की बात स्वीकार की है वे कहते हैं— शार्गिद तो बाबूजी का हूँ।’ ऐसा इसलिए कहा क्योंकि उनके बाबूजी जहाँ भी जाते उन्हें साथ ले जाते। जहाँ आयोजनों में उन्हें नृत्य करना होता वहाँ पहले बेटे बिरजू महाराज को नृत्य करने का अवसर प्रदान करते तथा खुद तबला वादन करते बिरजू महाराज के पिता एक प्रख्यात नर्त्तक थे। उन्होंने 22 वर्षों तक रामपुर की नवाब के यहाँ अपनी कला का प्रदर्शन किया। 54 वर्ष की अवस्था में लू लगने से उनकी मृत्यु हो गई।


2. मैं तो बेचारा उसका असिस्टेंट हूँ उस नाचने वाले का सप्रसंग व्याख्या करें।

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उत्तर – प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक ‘गोधूलि’ भाग-2 में संकलित नर्तक श्री बिरजू महाराज के साक्षात्कार ‘जित-जित मैं निरखत हूँ’ शीर्षक पाठ से उद्धत है। बिरजू महाराज कहते हैं कि असली नर्तक तो ईश्वर है, उसका नृत्य ही सृष्टि है। मैं तो उसका सहायक हूँ, नृत्य सिखाने में उसका मददगार हूँ। बिरजू महाराज की इस स्वीकारोक्ति में ईश्वर के प्रति उनका समर्पण भाव और कृतज्ञता एवं विनम्रता प्रकट होती है।


Bihar Board Class 10th Hindi jit jit main nirkhat hun Ka Dirgh Uttariya Question Answer

3. रश्मि वायपेयी द्वारा प्रदत्त वर्णन के आधार पर बिरजू महाराज का रेखाचित्र प्रस्तुत कीजिए ।

अथवा, बिरजू महाराज की कला के बारे में आप क्या जानते हैं, समझाकर लिखें।

उत्तर – बिरजू महाराज लखनऊ घराने की सातवीं पीढ़ी के कथक नर्तक हैं। जन्म – वसंत पंचमी, 4 फरवरी, 1938 ई०। दोहरा बदन, मँझोला कद, मुँह पर चेचक के हल्के दाग और बड़ी बड़ी आँखें होठों पर मनमोहिनी मुस्कुराहट ! सौम्य और मिलनसार ऐसे कि पूछिए मत। सबसे बढ़कर चेहरे पर निष्कपट बच्चे-सा भोलापन ।

बातें करते-करते अचानक कहीं खो जाना, उँगलियों पर निरन्तर गिनती में उलझे रहना और चेहरे पर नितांत शून्य भाव बेचैन कर देता है।

यही बिरजू महाराज जब तैयार होकर मंच पर आते हैं तो गजब ढाते हैं- लोच, फुर्ती और हल्कापन देखने लायक होती है। धीरे-धीरे कथक नृत्य का सौंदर्य मूर्तिमान हो उठता है।

कथक के व्याकरण और कौशल को बिरजू महाराज अपने नृत्य द्वारा सौंदर्य-बोध देते और उसे काव्यमय करते हैं। अथक साधना, एकांत-निष्ठा एवं कल्पनाशील सृजन, जीवंत उदाहरण हैं।

सच्चे गुरु को देखना हो, तो कोई बिरजू महाराज को देखे सब कुछ सबके लिए। न कही दुराव, न छुपाव। बेटा-बेटी और शिष्य में कोई भेद नहीं।

वस्तुतः कथक और बिरजू महाराज एक-दूसरे के पर्याय है- बिरजू महाराज ही कथक हैं और कथक बिरजू महाराज हैं।


4. बिरजू महाराज के जीवन में सबसे दुखद समय कब आया ? इससे संबंधित प्रसंग का वर्णन कीजिए।

उत्तर – बिरजू महाराज के जीवन का सबसे दुखद प्रसंग था उनके पिता की मृत्यु। तब बिरजू महाराज साढ़े नौ साल के थे। घर की हालत खास्ता थी। इतने भी पैसे नही थे कि उनका दसवाँ हो सके। इसके लिए बिरजू महाराज ने दो कार्यक्रम करके 500 रु० इकट्ठे किए तब तेरहवीं हुई। पिता की मृत्यु और वैसी हालत में नाचना बिरजू महाराज के लिए बड़ा दुखद था।


बिहार बोर्ड मैट्रिक जित जित मैं निरखत हूँ दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर

5. पुराने और आज के नर्तकों के बीच बिरजू महाराज क्या फर्क पाते हैं?

उत्तर – पुराने जमाने में नर्तक को नाचने के लिए इतना बढ़िया मंच नहीं मिलता था। लोगों को पीछे खिसका कर जगह बनाई जाती थी…….. नीचे गलीचा……. गलीचे पर चाँदनी और चाँदनी गलीचे के नीचे जमीन पर कहीं गड्ढे, कही खाँच ………. हाथ के पंखे थे। कहीं कुछ। आज की तरह एयर कंडीशन न था, तो चिकना मंच, एयर कंडीशन आदि सब कुछ है। पहले के नर्तक अच्छे नाचने वाले की तारीफ करते थे। आज तो दूसरे की सराहना नहीं करते, बस निंदा करते हैं कि यह नहीं आता, वह नहीं….. बस नाचता है केवल ।


BSEB Class 10th Hindi Long Subjective Question

Chapter Name Objective QueSubjective QueLong Subjective
1. श्रम विभाजन और जाति प्रथाClick HereClick HereClick Here
2. विष के दाँतClick HereClick HereClick Here
3. भारत से हम क्या सीखेंClick HereClick HereClick Here
4. नाखून क्यों बढ़ते हैंClick HereClick HereClick Here
5. नागरी लिपिClick HereClick HereClick Here
6. बहादुरClick HereClick HereClick Here
7. परंपरा का मूल्यांकनClick HereClick HereClick Here
8. जित-जित मैं निरखत हूँClick HereClick HereClick Here
9. आवियों Click HereClick Here Click Here
10. मछली Click Here Click Here Click Here
11. नौबतखाने में इबादत` Click Here Click Here Click Here
12. शिक्षा और संस्कृति Click Here Click Here Click Here

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