Bihar Board 10th Physics Ka Dirgh Uttariya Question

Bihar Board 10th Physics Ka Dirgh Uttariya Question Answer 2024 | class 10th urja ke srot dirgh uttariy prashn

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Bihar Board 10th Physics Ka Dirgh Uttariya Question Answer 2024 :- दोस्तों यहां पर बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2024 ( Bihar Board Matric Exam 2024 ) के लिए विज्ञान का सब्जेक्ट प्रश्न उत्तर दिया गया है यदि आप लोग मैट्रिक परीक्षा 2024 की तैयारी कर रहे हैं तो कक्षा 10 ऊर्जा के स्रोत का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ( class 10th urja ke srot dirgh uttariy prashn ) यहां पर दिया गया है जो कि आने वाले परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है साथ ही इस वेबसाइट पर सभी सब्जेक्ट का ऑब्जेक्टिव एंड सब्जेक्टिव प्रश्न( Bihar Board Class 10th All Subjective Ka Objective And Subjective Question 2024 ) दिया गया है जिससे आप 2024 में बेहतर तैयारी कर सकते हैं

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Bihar Board 10th Physics Ka Dirgh Uttariya Question Answer 2024

प्रश्न 1. (a) उत्तम ईंधन से आप क्या समझते हैं?

(b) जैव गैस संयंत्र का व्यवस्था आरेख खीचें ।

(c) जैव गैस संयंत्र की कार्यविधि समझाएँ।

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उत्तर- (a) अच्छा ईंधन वह है—

(i) जिसका ऊष्मीय मान उच्च हो ।

(ii) जो सस्ता तथा आसानी से उपलब्ध हो ।

(iii) जिससे प्रज्ज्वलन ताप की प्राप्ति हो ।

(iv) जलने में अल्प धुआँ और अधिक ऊष्मा उत्पन्न करता हो ।

(b)

(c) जैव गैस संयंत्र में ईंटों से बनी गुंबद जैसी संरचना होती है। गैस बनाने के लिए मिश्रण टंकी में गोबर तथा जल का गाढ़ा घोल डाला जाता है, जिसे कर्दम कहते हैं। कर्दम संपाचित्र में एकत्र होता है, जो चारो ओर से बंद रहता है। इसमें ऑक्सीजन नहीं होता। अवायवीय सूक्ष्म जीव, जिन्हें जीने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती, गोबर की स्लरी के जटिल यौगिकों का अपघटन कर देते हैं। अपघटन – प्रक्रम पूरा होने तथा इसके फलस्वरूप मेथेन, कार्बन डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन तथा हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी गैसें उत्पन्न होने में कुछ दिन लगता है। जैव गैस को संपाचित्र के ऊपर बनी टंकी में संचित किया जाता है और निकालकर उसका उपयोग किया जाता है।


प्रश्न 2. ऊर्जा संकट क्या है? इसके समाधान का उल्लेख करें।

उत्तर- ऊर्जा के प्रमुख स्रोत जीवाश्म ईंधन अर्थात कोयला एवं पेट्रोलियम हैं। पृथ्वी के अंदर इनकी मात्रा भी सीमित है। उद्योगीकरण एवं जनसंख्या वृद्धि के कारण इनकी माँग भी कई गुना तेजी से बढ़ी है। हम अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु उनका निर्ममतापूर्वक दोहन कर रहे हैं। ऊर्जा के इन स्रोतों का उपयोग हम अपनी दैनिक ऊर्जा आवश्यकता की पूर्ति तथा जीवनोपयोगी पदार्थों के उत्पादन हेतु कर रहे हैं। चूँकि इनके भंडार सीमित है, अतः इनके एक बार समाप्त हो जाने पर निकट भविष्य में इनकी पूर्ति संभव नहीं होगी। इसका कारण है कि इनके निर्माण में लाखों वर्षों का समय लगता है। इस प्रकार देश में ऊर्जा की कमी हो जाएगी जिससे वि अवरुद्ध हो जाएगा। अतः, देश को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ेगा।
ऊर्जा के महत्त्व को ध्यान में रखकर ऊर्जा के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग विवेकपूर्ण ढंग से करने की आवश्यकता है ताकि आनेवाले अधिक-से-अधिक समय तक हम इनका उपयोग कर सके। ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों की उपलब्धता सीमित होने के कारण इसके वैकल्पिक स्रोतों की खोज करने की आवश्यकता भी महसूस की जाती है। ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत हैं- सौर ऊर्जा (solar energy), पवन ऊर्जा (wind energy) तथा जैव स्रोतों से प्राप्त ऊर्जा अर्थात बायोगैस आदि । ऊर्जा के इन स्रोतों के विकास से अनेक कार्यों के लिए ऊर्जा की आवश्यकता की पूर्ति की जा सकती है। आजकल परमाणु ऊर्जा की चर्चा जोरों पर है। इसके उत्पादन की क्षमता विकसित करके भी हम देश को ऊर्जा संकट से काफी हद तक उबार सकते हैं।


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प्रश्न 3. उत्तम ईंधन किसे कहते हैं ?

उत्तर- उत्तम ईंधन वह ईंधन है जिसमें निम्न विशेषताएँ होती हैं—

(i) ईंधन का ऊष्मीय मान (या कैलोरी मान) उच्च होना चाहिए ताकि वह प्रति इकाई भार के हिसाब से अधिक ऊष्मा दे सके ।

(ii) ईंधन का प्रज्वलन ताप उचित होना चाहिए ताकि उसे आसानी से जलाया जा सके। ईंधन का प्रज्वलन ताप न तो बहुत कम और न ही बहुत अधिक होना चाहिए ।

(iii) ईंधन में अज्वलनशील पदार्थों की मात्रा कम होनी चाहिए ताकि वह जलने पर अधिक राख पीछे न छोड़े

(iv) ईंधन के जलने से कोई हानिकारक तथा विषैली गैसें उत्पन्न नहीं होनी चाहिये जो वायु को प्रदूषित कर सकें।

(v) चुना गया ईंधन अन्य प्रयोजनों के लिए अधिक उपयोग नहीं होना चाहिए

(vi) ईंधन सस्ता होना चाहिए और आसानी से उपलब्ध होना चाहिए ।

(vii) ईंधन मध्यम दर से तथा शांतमय ढंग से जलना चाहिए ।

(viii) ईंधन को इस्तेमाल करना आसान होना चाहिए, ईंधन को लाना-ले-जाना (परिवहन) सुरक्षित तथा आसान होना चाहिए तथा उसका भंडारण सुविधायुक्त होना चाहिए ।


प्रश्न 4. महासागरों से प्राप्त हो सकने वाली ऊर्जाओं की क्या सीमाएँ हैं ?

उत्तर— महासागरों से अपार ऊर्जा की प्राप्ति हो सकती है लेकिन सदा ऐसा संभव नहीं हो सकता क्योंकि महासागरों से ऊर्जा रूपांतरण की तीन विधियाँ- ज्वारीय ऊर्जा, तरंग ऊर्जा और सागरीय तापीय ऊर्जा की अपनी-अपनी सीमाएँ हैं ।

(i) ज्वारीय ऊर्जा — ज्वारीय ऊर्जा का दोहन सागर के किसी संकीर्ण क्षेत्र पर बाँध बनाकर किया जाता है। बाँध के द्वार पर स्थापित टरबाइन ज्वारीय ऊर्जा को विद्युत में रूपांतरित कर देता है। सागर के संकीर्ण क्षेत्र पर बाँध निर्मित करने योग्य उचित स्थितियाँ सरलता से उपलब्ध नहीं होतीं

(ii) तरंग ऊर्जा— तरंग ऊर्जा का व्यावहारिक उपयोग केवल वहीं हो सकता है जहाँ तरंगें अति प्रबल हों। विश्वभर में ऐसे स्थान बहुत कम हैं जहाँ सागर के तटों पर तरंगें इतनी प्रबलता से टकराती हों कि उनकी ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित किया जा सकें।

(iii) सागरीय तापीय ऊर्जा — सागरीय तापीय ऊर्जा की प्राप्ति के लिए संयंत्र  (OTEC ) तभी कार्य कर सकता है जब महासागर के पृष्ठ पर जल का ताप तथा 2 किमी. तक की गहराई पर जल के ताप में 20°C का अंतर हो। इस प्रकार विद्युत ऊर्जा प्राप्त हो सकती है पर यह प्रणाली बहुत महँगी है।


Bihar Board 10th Physics Ka Dirgh Uttariya Question Answer 2024

प्रश्न 5. नाभिकीय रिएक्टरों से विद्युत ऊर्जा कैसे प्राप्त की जाती है ?

उत्तर- नाभिकीय रिएक्टर में यूरेनियम को ईंधन के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। पहले U-235 की विखंडन योग्य प्रतिशत मात्रा बढ़ाने के लिए इसे संवर्धित किया जाता है। जब एक मंद गति वाला न्यूट्रॉन U-235 के नाभिक से टकराता है तो तीन नये न्यूट्रॉन मुक्त होते हैं जो एक श्रृंखला बनाते हैं। इन मुक्त न्यूट्रॉनों को नियंत्रण में रखने के लिए कैडमियम तथा बोरॉन धातु की छड़ें प्रयोग में लाते हैं। वे छड़ें न्यूट्रॉनों को अवशोषित करके उन्हें प्रभावित बना देती है। जब ये छड़ें पूर्णतः ईंधन में प्रविष्ट कर दी जाती हैं तो वे समस्त न्यूट्रॉनों का अवशोषण कर लेती हैं तथा श्रृंखला अभिक्रिया रूक जाती है।

इन छड़ों को बाद में ईंधन में से धीरे-धीरे उतना ही बाहर निकाला जाता है जितना कि वह केवल उतनी ऊर्जा का अवशोषण करे जिससे मुक्त न्यूट्रॉनों द्वारा नाभिकीय विखंडन अभिक्रिया को नियंत्रित रूप में संचालित करके निश्चित परिणाम में ऊर्जा प्राप्त होती रहे। इस प्रकार प्राप्त ऊष्मीय ऊर्जा से पानी को भाप में बदलकर बड़े-बड़े टरबाइन घुमाए जाते हैं। भाप की ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है । हर टरबाइनों के घूमने से विद्युत जनित्र द्वारा विद्युत उत्पन्न होती है जब भाप संघनित हो जाती है तो इसे फिर दूसरे चक्र में काम में लाया जाता है ।


प्रश्न 6. पवन चक्की के कार्य करने के सिद्धांत को स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर— गतिशील हवा को पवन कहते हैं। इसके पास पर्याप्त मात्रा में गतिज ऊर्जा होती है, क्योंकि यह गतिशील है, अतः इसमें कार्य करने की क्षमता होती । जब हवा तेजी से चलती है तो अपनी गति से वह राह में आने वाली वस्तुओं की दिशा बदल सकती है, उन्हें स्थिर • अवस्था में गतिशील बना सकती है; घूमने वाली वस्तुओं को तेजी से घुमा सकती है। तूफानों में बड़े-बड़े पेड़ इसी के कारण उखड़ जाते हैं, खम्भे गिर जाते हैं और हल्की वस्तुएँ उड़कर दूर जा गिरती हैं।

पवन चक्की एक मशीन है जो तेज हवा चलने से उत्पन्न ऊर्जा पर आधारित है। इसमें बड़े-बड़े पंख होते हैं जो पवन की गतिज ऊर्जा से घूमने लगते हैं और वे अपने साथ जुड़े अन्य उपकरणों को घुमाकर उपयोगी कार्य कराते हैं । पवन चक्की को गति देने और उससे उपयोगी कार्य कराने के लिए पवन का वेग कम-से-कम 15 किमी / घंटा होना चाहिए ।


Physics Important Question   
Chapter Name Objective Que Subjective Que Long Subjective
1. प्रकाश के परावर्तन तथा अपवर्तनClick HereClick HereClick Here
2. मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसारClick HereClick HereClick Here
3. विधुत धाराClick HereClick HereClick Here
4. विधुत धारा के चुंबकीय प्रभावClick HereClick HereClick Here
5. ऊर्जा के स्रोतClick HereClick HereClick Here
Physics ( भौतिक विज्ञान ) Objective & Subjective Question
Chemistry ( रसायन विज्ञान ) Objective & Subjective Question
Biology ( जीव विज्ञान ) Objective & Subjective Question

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