Bihar Board 10th Physics long subjective Question Answer

Bihar Board 10th Physics long subjective Question Answer | class 10th Vidyut Dhara Ke Chumbkiya Prabhav dirgh uttariy prashn

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Bihar Board 10th Physics long subjective Question Answer :- दोस्तों यहां पर बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2024 ( Bihar Board Matric Exam 2024 ) के लिए विज्ञान का सब्जेक्ट प्रश्न उत्तर दिया गया है यदि आप लोग मैट्रिक परीक्षा 2024 की तैयारी कर रहे हैं तो कक्षा 10 विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ( class 10th Vidyut Dhara Ke Chumbkiya Prabhav dirgh uttariy prashn ) यहां पर दिया गया है जो कि आने वाले परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है साथ ही इस वेबसाइट पर सभी सब्जेक्ट का ऑब्जेक्टिव एंड सब्जेक्टिव प्रश्न( Bihar Board Class 10th All Subjective Ka Objective And Subjective Question 2024 ) दिया गया है जिससे आप 2024 में बेहतर तैयारी कर सकते हैं

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Bihar Board 10th Physics long subjective Question Answer

प्रश्न 1. विद्युत चुम्बक क्या है? स्थायी एवं अस्थायी चुंबक क्या होता है ? विद्युत चुम्बक के उपयोग में आने वाले पदार्थ का नाम लिखें। विद्युत चुंबक की शक्ति को कैसे बढ़ाया जा सकता है?

उत्तर- विद्युत धारा के प्रभाव से जिस लोहे में चुम्बकत्व उत्पन्न होता है, उसे – विद्युत चुम्बक कहते हैं।

ऐसी चुम्बक जिसमें चुम्बक हमेशा के लिए बनी रहती है, उसे स्थाई चुम्बक कहा जाता है। स्थाई चुम्बक बनाने के लिए स्टील, कार्बन स्टील तथा कोबॉल्ट जैसी धातुओं का इस्तेमाल किया जाता है। यह चुम्बक अलग-अलग आकार में बनाई जाती है, जिनका इस्तेमाल अलग-अलग वस्तुओं और जगह पर किया जाता है।

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जिसकी चुम्बकता तब तक रहती है, जब तक उस पर चुम्बकीय बल लगा रहता है, जैसे ही चुम्बकीय बल हटा लिया जाए तो उसकी चुम्बकता खत्म हो जाती है। इस प्रकार की चुम्बक अस्थाई चुम्बक या इलेक्ट्रो-मैग्नेट कहलाती है।

विद्युत चुम्बक के उपयोग में आने वाले पदार्थ — (i) एक बड़ा वाला टॉर्च सेल, (ii) लोहे की छड़, (iii) ताँबा की तार ( जिसपर कपड़ा चढ़ा हो), (iv) स्टेपर पिन और (v) आलपिन इत्यादि ।

विद्युत चुम्बक की शक्ति लोहे की छड़ पर लपेटे हुए तारों के फेरों की संख्या बढ़ाकर की जाती है। अतः शक्तिशाली विद्युत चुम्बक बनाने के लिए कम लम्बाई का चुम्बकीय पथ तथा अधिक क्षेत्रफल वाला तत्त्व चाहिए । इसका कारण यह है कि अधिकांश लौह चुम्बकीय पदार्थ एक या दो टेस्ला के बीच संतृप्त हो जाते हैं।


प्रश्न 2. विद्युत मोटर क्या है ? इसका सिद्धान्त लिखें तथा इसकी कार्य-विधि का सचित्र वर्णन करें ।

अथवा, विद्युत मोटर का सिद्धान्त सहित वर्णन कीजिए।

अथवा, विद्युत मोटर का नामांकित आरेख खींचिए। इसका सिद्धांत तथा कार्यविधि स्पष्ट कीजिए। विद्युत मोटर में विभक्त वलय का क्या महत्त्व है ?

उत्तर- विद्युत मोटर एक ऐसी घूर्णन शक्ति है जिसमें विद्युत ऊर्जा का यांत्रिक ऊर्जा में रूपांतरण होता है।

सिद्धान्त-— जब किसी कुण्डली को चुंबकीय क्षेत्र में रखकर उसमें धारा प्रवाहित की जाती है तो कुण्डली पर एक बल युग्म कार्य करने लगता है, जो कुण्डली को उसी अक्ष पर घुमाने का प्रयास करता है। यदि कुण्डली अपनी अक्ष पर घूमने के लिए स्वतन्त्र हो तो वह घूमने लगती है।

संरचना— विद्युत मोटर में विद्युतरोधी तार की एक आयता- कार कुण्डली ABCD होती है। यह कुण्डली किसी चुंबकीय क्षेत्र के दो ध्रुवों के बीच इस प्रकार रखी होती है कि इसकी भुजाएँ विभक्त वलय AB तथा CD चुंबकीय क्षेत्र की (P तथा Q) दिशा के लम्बवत् रहे। कुण्डली के दो सिरे विभक्त वलय के दो अर्द्धभागों P तथा Q से संयोजित होते हैं।

इन अर्द्धभागों की भीतरी सतह विद्युतरोधी होती है तथा धुरी से जुड़ी होती है। R तथा Q के बाहरी चालक सिरे क्रमशः दो स्थिर चालक ब्रुशों X और Y से स्पर्श करते हैं ।

कार्य-प्रणाली— बैटरी से चलकर ब्रुश X से होते हुए Z से विद्युत धारा कुण्डली ABCD में प्रवेश करती है तथा चालक बुश Y से होते हुए बैटरी के दूसरे टर्मिनल पर वापस भी आ जाती है। कुण्डली में विद्युत धारा इसकी भुजा AB में A से B की ओर तथा भुजा CD में C से D की ओर प्रवाहित होती है अतः AB तथा CD में विद्युत धारा की दिशाएँ परस्पर विपरीत होती है। चुंबकीय क्षेत्र में रखे विद्युत धारावाही चालक पर आरोपित बल की दिशा ज्ञात करने के लिए फ्लेमिंग का वामहस्त नियम अनुप्रयुक्त करने पर पाते हैं कि भुजा AB पर आरोपित बल इसे अधोमुखी धकेलता है, जबकि भुजा CD पर आरोपित तल इसे उपरिमुखी धकेलता है। इस प्रकार किसी अक्ष पर घूमने के लिए स्वतंत्र कुण्डली तथा धुरी वामावर्त्त घूर्णन करते हैं। आधे घूर्णन में Q का सम्पर्क ब्रुश X से होता है तथा P का सम्पर्क खुश Y से होता है अतः कुण्डली में विद्युत धारा उत्क्रमित होकर – पथ DCBA के अनुदिश प्रवाहित होती है।

वलय की भूमिका— विद्युत मोटर में विभक्त वलय दिक परिवर्तक का कार्य करता है, अर्थात् परिपथ में विद्युत धारा के प्रवाह को उत्क्रमित करता है।


class 10th Vidyut Dhara Ke Chumbkiya Prabhav dirgh uttariy prashn

प्रश्न 3. (a) विद्युत शक्ति क्या है?

(b) निगमन करें H=I2Rt

जहाँ H, किसी प्रतिरोधक (R) में विद्युत धारा (I) द्वारा समय में उत्पन्न ऊष्मा की मात्रा है।

(c) 6V बैटरी से गुजरने वाले हर एक कूलॉम आवेश को कितनी ऊर्जा दी जाती है?

उत्तर- (a) किसी विद्युत परिपथ में उपभुक्त अथवा क्षयित विद्युत ऊर्जा की दर को विद्युत शक्ति कहते हैं। विद्युत शक्ति का SI मात्रक वाट (W) है।

(b) मान लिया कि R प्रतिरोध के प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर V है जिसके कारण उसमें धारा प्रवाहित होती है।

अत:, V=IR


प्रश्न 4. विद्युत जेनरेटर से आप क्या समझते हैं? यह किस सिद्धांत पर कार्य करता है ? इसकी बनावट एवं क्रिया विधि का वर्णन करें।

अथवा, स्वच्छ चित्र की सहायता से विद्युत् जनित्र का सिद्धान्त एवं क्रिया प्रणाली की व्याख्या कीजिए ।

अथवा, विद्युत जनित्र क्या है ? नामांकित आरेख खींचकर किसी विद्युत जनित्र का मूल सिद्धांत तथा कार्यविधि स्पष्ट कीजिए। इसमें बुशों का क्या कार्य है ?

उत्तर- प्रत्यावर्ती धारा प्राप्त करने के विद्युतीय उपकरण को विद्युत जनित्र कहते है।

सिद्धांत— जनित्र इस सिद्धांत पर आधारित है कि किसी चालक में प्रेरित धारा तब उत्पन्न होती है जब इससे संबंधित चुंबकीय रेखाओं में परिवर्तन होता है। उत्पन्न विद्युत धारा की दिशा फ्लेमिंग के दायें हाथ के नियम के अनुसार होती है ।

फ्लेमिंग का दायें हाथ का नियम— अपने दायें हाथ के अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा अंगुली को इस प्रकार फैलाएँ कि प्रत्येक एक-दूसरे के साथ समकोण बनाए तो तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की ओर संकेत करती है, अंगूठा चालक की गति की दिशा को प्रदर्शित करता है और मध्यमा अंगुली कुंडली में उत्पन्न विद्युत धारा की दिशा – को देखती है।

किसी साधारण प्रत्यावर्ती जनित्र में निम्नलिखित प्रमुख भाग होते हैं—

(i) आर्मेचर— इसमें मृद लोहे की क्रोड पर तांबे की तार की अवरोधी बड़ी संख्या में कुंडली ABCD होती है। इसे आर्मेचर कहते हैं। इसे एक धुरी पर लगाया जाता है जो गिरते पानी, हवा या भाप की सहायता से घूम सकती है।

(ii) क्षेत्र चुंबक— कुंडली को शक्तिशाली चुंबकों के बीच स्थापित किया जाता है। छोटे जनित्रों में स्थायी चुंबक लगाए जाते हैं पर बड़े जनित्रों में विद्युत चुंबकों का प्रयोग किया जाता है। ये चुंबकीय क्षेत्र को उत्पन्न करते हैं।

(iii) स्लिप रिंग— धातु के दो खोखले रिंग R, और R को कुंडली की धुरी पर लगाया जाता है। कुंडली के AB और CD को इनसे जोड़ दिया जाता है । आर्मेचर के घूमने के साथ R और R भी साथ-साथ घूमते हैं। R₂

(iv) दो कार्बनिक ब्रशों— B1 और B2 से विद्युत धारा को लोड तक ले जाया 1 जाता है। चित्र में इसे गैल्वनोमीटर से जोड़ा गया है जो विद्युत धारा को मापता है।

कार्य विधि— जब कुंडली को चुंबक के ध्रुवों N और S के बीच घड़ी की सूई को विपरीत दिशा घुमाया जाता है तब AB नीचे और CD ऊपर की दिशा में जाता है। उत्तरी ध्रुव के निकट AB चुंबकीय रेखाओं को काटती है और CD ऊपर दक्षिणी ध्रुव के निकट रेखाओं को काटती है। इससे AB और DC में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है। फ्लेमिंग के दायें हाथ के नियमानुसार विद्युत धारा B से A और D से C की ओर बहती है। प्रभावी विद्युत धारा DCBA की दिशा में चलता है। आये चक्कर के बाद कुंडली के AB और DC अपनी स्थिति को बदल लेते हैं। AB दायीं तरफ और DC बायीं तरफ हो जाएगा इससे AB ऊपर तथा DC नीचे की ओर हो जाएंगे। इस परिवर्तन के कारण कुंडली में धारा की दिशा आधे घुमाव के बाद उलट जाएगी। दो सिरों की धन और ऋण ध्रुवण भी परिवर्तित हो जाएगी। हमारे देश में 50 Hz प्रत्यावर्तन धारा का प्रयोग किया जाता है। इसलिए कुंडली को एक सैकेंड में 50 बार घुमाया जाता है। एक चक्कर में धारा अपनी दिशा को 2 बार बदलती है।

इस व्यवस्था में एक ब्रश उस भुजा के साथ संपर्क में रहता है जो चुंबकीय क्षेत्र में ऊपर की ओर गति करती है। इसका बुश सदा नीचे की ओर गति करने वाली भुजा के संपर्क में रहता है।


प्रश्न 5. चालक, अचालक, अर्द्धचालक एवं अति चालक से आप क्या समझते हैं ? सोदाहरण व्याख्या करें ।

उत्तर- चालक— ऐसा पदार्थ जिससे होकर विद्युत आवेश एक जगह से दूसरी जगह आसानी से चले जाते हैं, चालक कहलाता है। दूसरे शब्दों में जिन पदार्थों की विशिष्ट चालकता काफी अधिक होती है, चालक कहलाता है। चालक पदार्थों में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या काफी अधिक होती है। जैसे- सोना, चाँदी, ताँबा, लोहा, ऐल्युमिनियम, नमकीन घोल इत्यादि ।

अचालक— ऐसे पदार्थ जिनसे होकर विद्युत आवेश प्रवाहित नहीं हो सकते हैं, अचालक कहलाते हैं। दूसरे शब्दों में ऐसा पदार्थ जिनकी विशिष्ट चालकता बहुत ही कम होती है, अचालक कहलाता है। अचालक पदार्थ में मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं होते हैं। जैसे – सल्फर, काँच, रबड़, प्लास्टिक, सूखी लकड़ी आदि ।

अर्द्धचालक— ऐसे पदार्थ जिनकी विशिष्ट चालकता अचालक तथा चालक पदार्थों की विशिष्ट चालकता के बीच होती है, इन पदार्थों में मुक्त इलेक्ट्रानों की संख्या अल्प होती हैं अर्द्धचालक कहते हैं। उदाहरण: जर्मेनियम एवं सिलिकान । अर्द्धचालक का उपयोग ट्रांजिस्टर, डायोड तथा कम्प्यूटर के लिए स्मरण युक्तियों के निर्माण में किया जाता है।

अतिचालक— ऐसे पदार्थ जिनमें अतिनिम्न ताप पर ( निरपेक्ष शून्य के निकट) पर बिना किसी प्रतिरोध के विद्युत का गमन होता है अति चालक कहलाते हैं तथा यह घटना अतिचालकता कहलाती है। जैसे- शीशा, जिंक, ऐल्युमिनियम, पारा आदि।


Bihar Board 10th Physics long subjective Question Answer 2024

प्रश्न 6. डायनेमो क्या है? इसके सिद्धान्त और क्रिया का सचित्र वर्णन करें।

उत्तर- डायनेमो— विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करनेवाला एक ऐसा संसाधन जिसमें यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है, डायनेमो कहलाता है।

बनावट : इसमें एक नाल चुम्बक होता है। नाल चुम्बक के बाएँ किनारे पर एक आर्मेचर लगा रहता है और दाएँ किनारे पर लोहे की वृत्ताकार चकती लगी रहती है। लोहे की छड़ के ऊपर कुंडलीकार धारावाही तार लिपटा रहता है जो विद्युतीय संसाधन से जुड़ा रहता है।

किसी यांत्रिक संसाधन के सहारे लोहे की वृत्ताकार चकत्ती को तेजी से घुमाते हैं। नाल चुंबक के अंदर आर्मेचर तेजी से घूमता है। चुम्बक के अंदर विद्युत चुम्बकीय प्रेरण उत्पन्न होता है और धारावाही तार से होकर विद्युतधारा का प्रवाह होता है। विद्युतीय संसाधन स्वचालित होते हैं ज्यों ही आर्मेचर क्षैतिज क्रम में आता है त्यों ही आर्मेचर और नाल चुम्बक के बीच दूरी बढ़ जाती है। विद्युत चुम्बकीय प्रेरण उत्पन्न होना बंद हो जाता है धारा का प्रवाह रूक जाता है और धारावाही तार ऋण ध्रुव की भाँति व्यवहार करता है।


प्रश्न 7. निम्नलिखित की दिशा को निर्धारित करने वाला नियम लिखिए-

(i) किसी विद्युत धारावाही सीधे चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र,

(ii) किसी चुंबकीय क्षेत्र में, क्षेत्र के लंबवत् स्थित, विद्युत धारावाही सीधे चालक पर आरोपित बल, तथा

(iii) किसी चुंबकीय क्षेत्र में किसी कुंडली के घूर्णन करने पर उस कुंडली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत धारा।

उत्तर— (i) दक्षिण- हस्त अंगुष्ठ नियम— यदि आप अपने दाहिने हाथ में विद्युत धारा वाही चालक को इस प्रकार पकड़े हुए हैं कि आप का अंगूठा विद्युत धारा की दिशा की क्षेत्र ओर संकेत करता है तो आप की अंगुलियाँ चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाओं की दिशा में लिपटी होंगी। इसे दक्षिण हस्त अंगुष्ठ नियम कहते हैं।

(ii) फ्लेमिंग का वाम — हस्त नियम- अपने वाम हस्त के अंगूठे, तर्जनी के मध्यमा अंगुली को इस प्रकार फैलाएँ कि वे परस्पर समकोण बनाएँ । तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र को निर्दिष्ट करेगी। मध्य अंगुली धारा के प्रवाह की दिशा को बताएगी और अंगूठा चालक की दिशा को प्रवाहित करेगा।

(iii) फ्लेमिंग का दक्षिण — हस्त नियम अपने दाहिने हाथ की तर्जनी, मध्यमा अंगुली तथा अंगूठे को इस प्रकार फैलाइए कि ये तीनों एक-दूसरे के परस्पर लंबवत् हों यदि तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा की ओर संकेत करती है तथा अंगूठा चालक की गति को दिशा की ओर संकेत करता है तो मध्यम चालक में प्रेरित विद्युत धारा की दिशा दर्शाती है।


Bihar Board 10th Physics long subjective Question Answer 2024

प्रश्न 8. (a) प्रत्यावर्ती धारा तथा दिष्ट धारा में एक प्रमुख अन्तर लिखें ।

(b) दिष्ट धारा के दो स्रोतों के नाम लिखें ।

(c) विद्युत चुम्बकीय प्रेरण को सचित्र समझाएँ ।

उत्तर— (a) दिष्टधारा सदैव एक ही दिशा में प्रवाहित होती है तथा प्रत्यदर्शी धारा एक निश्चित समयान्तराल के पश्चात अपनी दिशा बदलती रहती है

(b) (1) बैट्री (2) डी० सी० जनित्र ।

(c) जब कुंडली तथा चुम्बक के बीच आपेक्षिक गति होती है तो परिपथ से धारा प्रवाहित होती है। इस प्रकार धारा की उत्पत्ति की घटना को विद्युत चुम्बकीय प्रेरण कहते हैं तथा इस प्रकार उत्पन्न धारा को प्रेरित धारा कहते हैं

प्रयोग — लकड़ी या प्लास्टिक की खोखली नली के ऊपर अनेक फेरों वाले विद्युत चालक तार को लपेट देते हैं। तार के सिरों को एक गैल्वेनोमीटर से जोड़ते हैं। एक शक्तिशाली स्थायी छड़ चुम्बक को तेजी से खोखली नली के भीतर ले जाते हैं। इस प्रकार करने गैल्वेनोमीटर की सुई में विक्षेप उत्पन्न होता है । चुम्बक की गति की दिशा के बदलने पर गैल्वेनोमीटर में बहती धारा की दिशा भी बदल जाती है । चुम्बक को स्थिर रखने पर गैल्वेनोमीटर की सुई में कोई विक्षेप नहीं होता है। इस प्रकार चालक तार की कुंडली में धारा की उत्पत्ति की इस घटना को विद्युत चुम्बकीय प्रेरण कहते हैं ।


Physics Important Question   
Chapter Name Objective Que Subjective Que Long Subjective
1. प्रकाश के परावर्तन तथा अपवर्तनClick HereClick HereClick Here
2. मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसारClick HereClick HereClick Here
3. विधुत धाराClick HereClick HereClick Here
4. विधुत धारा के चुंबकीय प्रभावClick HereClick HereClick Here
5. ऊर्जा के स्रोतClick HereClick HereClick Here
Physics ( भौतिक विज्ञान ) Objective & Subjective Question
Chemistry ( रसायन विज्ञान ) Objective & Subjective Question
Biology ( जीव विज्ञान ) Objective & Subjective Question

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