Class 10th Chemistry VVI Long Subjective Question

Class 10th Chemistry VVI Long Subjective Question | class 10th dhatu aur adhatu dirgh uttariy prashn

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Class 10th Chemistry VVI Long Subjective Question :- दोस्तों यहां पर बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2024 ( Bihar Board Matric Exam 2024 ) के लिए विज्ञान का सब्जेक्टिव प्रश्न उत्तर दिया गया है यदि आप लोग मैट्रिक परीक्षा 2024 की तैयारी कर रहे हैं तो कक्षा 10 अम्ल क्षार एवं लवण का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ( class 10th dhatu aur adhatu dirgh uttariy prashn ) यहां पर दिया गया है जो कि आने वाले परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है साथ ही इस वेबसाइट पर सभी सब्जेक्ट का ऑब्जेक्टिव एंड सब्जेक्टिव प्रश्न( Bihar Board Class 10th All Subjective Ka Objective And Subjective Question 2024 ) दिया गया है जिससे आप 2024 में बेहतर तैयारी कर सकते हैं

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Class 10th Chemistry VVI Long Subjective Question

प्रश्न 1. मिश्र धातु किसे कहते हैं? इसके दो उदाहरण दें। मिश्र धातु के तीन उपयोगों का वर्णन करें।

अथवा, मिश्रधातु क्या होती है? इन्हें कैसे तैयार किया जाता है? काँसा तथा अमलगम मिश्रधातु में उपस्थित धातुओं के नाम बताएँ। इन मिश्र धातुओं के एक-एक उपयोग लिखें।

उत्तर – मिश्रधातु – यह दो या दो से अधिक धातुओं अथवा तथा अधातु का संभागी मिश्रण है। जैसे- पीतल, ताँबा तथा जिंक की मिश्रधातु है, कांसा, ताँबा तथा टिन की मिश्रधातु है ।

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उदाहरण—

(i) सोडियम अमलगम (Na + Hg )

(ii) टीन अमलगम (Sn + Hg )

मिश्रधातुओं के उपयोग—

(i) कठोरता बढ़ाने के लिए—  लोहे में कार्बन की मात्रा मिलाकर स्टेनलैस स्टील बनाया जाता है जो लोहे से अधिक कठोर होता है। सोने में तांबा तथा चांदी में सीसा मिलाने से उनकी कठोरता अधिक हो जाती है। ड्यूरेलियम ऐलुमिनियम से बना मिश्रधातु है जो अत्यधिक कठोर होता है ।

(ii) शक्ति बढ़ाने के लिए— इस्पात, ड्यूरेलियम आदि मिश्रधातु कठोर होने के कारण शक्तिशाली भी होते हैं

(iii) संक्षारण रोकने के लिए— जैसे स्टैनलेस स्टील, लोहे तथा जिंक से बनी मिश्रधातु आदि पर जंग नहीं लगता ।


प्रश्न 2. निम्न पदों की परिभाषा दें-

(i) खनिज    (ii) अयस्क    (iii) गैंग

(iv) निस्तापन    (v) भर्जना

उत्तर- (i) खनिज— ऐसे प्राकृतिक पदार्थ जिनमें धातुएँ अपने यौगिकों के रूप में होती हैं, खनिज कहलाते हैं ये अधिकांश रूप में धूपर्पटी में पाये जाते हैं। कुछ खनिज समुद्री तल में भी पाये जाते हैं जैसे- NaCl (सोडियम क्लोराइड), फैल्सपार, अभ्रक आदि।

(ii) अयस्क — उन खनिजों को जिनसे लाभप्रद ढंग से धातुओं का निष्कर्षण किया जाता है, अयस्क कहलाते हैं। जैसे- हेमेटाइट (Fe2O3) लोहे का अवस्क है। एल्युमिनियम का अयस्क बॉक्साइट (Al2O3. 2H2O) है।

(iii) गैंग— खनन क्रिया द्वारा पृथ्वों से निकाले गये अयस्क में उपस्थित अवांछित पदार्थों को गैंग कहते हैं।

(iv) निस्तापन— सांद्रित अयस्क को वायु की उपस्थिति या अनुपस्थिति में बिना द्रवित किए बहुत अधिक गर्म करने की क्रिया, जिससे वाष्पशील अशुद्धियाँ बाहर निकलती हैं तथा कार्बोनेट अयस्क विघटित होकर धातु के ऑक्साइड में परिणत होते हैं, निस्तापन कहलाती है।

(v) भर्जन— मुख्यत: सांद्रित अयस्क को अकेले या किसी अन्य पदार्थ के साथ वायु की नियंत्रित मात्रा की उपस्थिति में बिना द्रवित किए गर्म करने की क्रिया, जिससे वाष्पशील अशुद्धियाँ बाहर निकल जाती हैं तथा अयस्क ऑक्साइड में उपचयित हो जाता है, भर्जन या जारण कहलाती है। इसका ताप निस्तापन के ताप से कुछ अधिक होता है।


प्रश्न 3. अयस्कों से धातु के निष्कर्षण में प्रयुक्त चरणों को लिखिए।

उत्तर- अयस्क का सांद्रण (Coricentration of Orés) अपस्क से अशुद्धियाँ को दूर कर धातु की प्रतिशत मात्रा बढ़ाने की प्रक्रिया अयस्क का सांद्रण कहलाती है। अयस्क के सांद्रण की अनेक विधियाँ हैं।

सांद्रित अयस्क का ऑक्साइड में परिवर्तन — सांद्रित अयस्क के ऑक्साइड में परिवर्तन की निम्नांकित दो विधियों हैं-

(a) निस्तापन (Calcination)- सांद्रित अयस्क को वायु की उपस्थिति या अनुपस्थिति में बिना द्रवित किए बहुत अधिक गर्म करने की क्रिया, जिससे वाष्पशील अशुद्धियाँ बाहर निकलती हैं तथा कार्बोनेट अयस्क विघटित होकर धातु के ऑक्साइड में परिणत होते हैं, निस्तापन कहलाती है।

(b) जारण (Roasting) – मुख्यतः सांद्रित अवस्क को अकेले या किसी अन्य पदार्थ के साथ वायु की नियंत्रित मात्रा की उपस्थिति में बिना द्रवित किए गर्म करने की क्रिया, जिससे वाष्पशील अशुद्धियाँ बाहर निकल जाती हैं तथा अयस्क ऑक्साइड में उपचयित हो जाता है, जारण कहलाती है। इसका ताप निस्तापन के ताप से कुछ अधिक होता है।

धातु ऑक्साइड का धातु में अपचयन — धातु के ऑक्साइड विभिन्न अपचयन की क्रियाओं द्वारा धातु में परिणत होते हैं।

धातु का शोधन (Purification of Metal)- अवस्क से प्राप्त धातु में अशुद्धियाँ (अन्य धातु, धातु के ऑक्साइड, SiO, C, P आदि) मिश्रित होती हैं जिनकी प्रकृति के अनुरूप शोधन की अलग-अलग क्रियाएँ की जाती हैं।


प्रश्न 4. जारण और निस्तापन से आप क्या समझते हैं ? एक उदाहरण देकर समझायें । अभिक्रिया श्रेणी (Reactivity Series) के मध्य के तत्वों का निष्कर्षण उनके Oxides से किस प्रकार करते हैं ?

उत्तर- जारण या भर्जन (Roasting)— भर्जन में सान्द्रित अयस्क को वायु की अधिकता में खूब गर्म किया जाता है जिससे वाष्पशील अशुद्धियाँ बाहर निकल जाती हैं तथा अयस्क का ऑक्सीकरण हो जाता है। यह मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्कों के लिए परावर्तनी भट्ठी में किया जाता है जैसे जिंक ब्लैण्ड (ZnS) का जारण 2ZnS + 3O2 2ZnO + 2SO2

निस्तापन (Calcination)— सान्द्रित अयस्क को वायु की अनुपस्थिति में उसके गलनांक से नीचे गर्म करने पर उसमें से वाष्पशील अशुद्धियां अलग हो जाती हैं तथा अयस्क सरन्ध्र (Porous) हो जाता है। यह मुख्य रूप से कार्बोनेट, हाइड्रेटेड अपस्कों में किया जाता है।

अभिक्रिया श्रेणी के मध्य के तत्वों का निष्कर्षण उनके ऑक्साइड को कार्बन द्वारा अपचयन से करते हैं।

ZnO + C → Zn + CO

Fe2O3 + 3C → 2Fe + 3CO


प्रश्न 5. (a) रासायनिक गुणधमों के आधार पर धातुओं एवं अधातुओं में विभेद कीजिए ।

(b) दिये गये धातुओं की क्रियाशीलता को अवरोही क्रम से व्यवस्थित करें:

(i) Zn     (ii) Fe         (iii) Ca       (iv) Mg        (v) K           (vi) Na

उत्तर- (a)

धातुएँअधातुएँ
(1) धातुएँ क्षारीय ऑक्साइड बनाती हैं जिसमें से कुछ क्षार बनाती हैं।

(2) धातुएँ अम्लों से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस पुनः स्थापित करती हैं तथा अनुरूप लवण बनाती हैं। हैं।

(3) धातुएँ धनात्मक आवेश की प्रकृति की होती हैं

(4) धातुएँ क्लोरीन से संयोग करके क्लोराइड बनाती हैं जो वैद्युत् संयोजक होते हैं।

(5) कुछ धातुएँ हाइड्रोजन से संयोग करके हाइड्रोक्साइड बनाती हैं जो विद्युत् संयोजक होते हैं।

(6) धातुएँ अपचायक हैं।

(7) धातुएँ जल विलयन में धनायन बनाती हैं।

 (1) अधातुएँ अम्लीय तथा उदासीन ऑक्साइड बनाती हैं।

(2) अधातुएँ अम्लों में से हाइड्रोजन गैस को पुनः स्थापित नहीं करती हैं।

(3) अधातुएँ ऋणात्मक आवेश की प्रकृति की होती हैं।

(4) अधातुएँ क्लोरीन से संयोग कर क्लोराइड बनाती हैं, परन्तु वे सहसंयोजक होते हैं।

(5) अधातुएँ हाइड्रोजन के साथ अनेक स्थाई हाइड्राइड बनाती हैं  जो सहसंयोजक होते हैं ।

(6) अधातुएँ ऑक्सीकारक हैं।

(7) अधातुरं जलीय विलयन में ऋणायन बनाती हैं।

(b) K > Na > Ca > Mg > Zn > Fe


matric science vvi long Subjective Question 2024

प्रश्न 6. धातुओं एवं अधातुओं के बीच कैसे विभेद करेंगे ?

उत्तर- धातुओं और अधातुओं के गुणों में विर्भद-

भौतिक गुणों में विभेद

धातुए अधातुए
(1) धातुएँ सामान्य ताप पर ठोस होती हैं परन्तु केवल पारा सामान्य ताप पर तरल अवस्था में होता है।

(2) धातुएँ तन्य तथा आघातवर्ध्य तथा लगिष्णु होती हैं।

(3) धातुएँ प्राय: चमकदार होती हैं अर्थात् उनमें धात्विक चमक होती हैं ।

(4) धातुएँ ऊष्मा तथा विद्युत की सुचालक होती हैं परंतु विस्मथ इसका अपवाद है।

(5) धातुओं के गलनांक तथा क्वथनांक बहुत अधिक होते हैं।

(6) धातुएँ अधिकांशतः कठोर होती हैं परंतु सोडियम तथा पोटैशियम चाकू से काटी जा सकती है।

(7) धातुओं का आपेक्षित घनत्व अधिक होता है परंतु Na, K इसके अपवाद हैं।

(8) धातुएँ अपारदर्शक होती हैं ।।

(1) अधातुएँ सामान्य ताप पर तीनों अवस्थाओं में पाई जाती हैं फॉस्फोरस और सल्फर ठोस रूप में, H2, O2, N2 गैसीय रूप में तथा ब्रोमीन तरल रूप में होती हैं।

(2) वे प्रायः भंगुर होती हैं।

(3) अधातुओं में धात्विक चमक नहीं होती परंतु हीरा, ग्रेफाइट तथा आयोडीन इसके अपवाद हैं।

(4) प्रेफाइट और गैस कार्बन को छोड़कर सभी अधातुएँ कुचालक हैं।

(5) अधातुओं के गलनांक तथा क्वथनांक कम होते हैं।

(6) इनकी कठोरता भिन्न-भिन्न होती है हीरा सब पदार्थों से कठोरतम है।

(7) अधातुओं का आपेक्षित ताप प्रायः कम होता है।

(8) गैसीय अधातुएँ पारदर्शक हैं।


प्रश्न 7. धातु और अधातु के सामान्य गुणधर्मो के प्रमुख चार अपवाद लिखिए ।

उत्तर-

धातुअधातु
(1) धातुएँ सामान्य ताप पर ठोस होती हैं परन्तु केवल पारा सामान्य ताप पर तरल अवस्था में होता है।

(2) धातुएँ ऊष्मा तथा विद्युत की सुचालक होती हैं परंतु विस्मथ इसका अपवाद है।

(3) धातुएँ अधिकांशत: कठोर होती हैं परंतु सोडियम तथा पोटैशियम चाकू से काटी जा सकती है।

(4) धातु ऑक्सीजन से प्रतिक्रिया करके अम्लीय एवं क्षारीय गुण प्रदर्शित करते हैं।

(1) अधातुएँ सामान्य ताप पर तीनों अवस्थाओं में पाई जाती हैं। फॉस्फोरस और सल्फर ठोस रूप में, H2, O2, N2 गैसीय रूप में तथा ब्रोमीन तरल रूप में होती हैं।

(2) ग्रेफाइट और गैस कार्बन को छोड़कर सभी अधातुएँ कुचालक हैं।

(3) इनकी कठोरता भिन्न-भिन्न होती है हीरा सब पदार्थों से कठोरतम है।  

(4) अधातु ऑक्सीजन से प्रतिक्रिया करके अम्लीय गुण प्रदर्शित करते हैं।


प्रश्न 8. अयस्क क्या है? अयस्क सांद्रणं की सामान्य विधियों का परिचय दीजिए।

उत्तर- अयस्क— वैसे खनिज जिनसे कम खर्च में धातु का निष्कर्षण किया जाय उसे अयस्क कहते हैं।

अयस्क सांद्रण की सामान्य विधियाँ — अयस्क या खनिज पृथ्वी से निकाले जाते हैं जिनके साथ अनेक प्रकार के व्यर्थ पदार्थ होते हैं जिन्हें गैंग कहते हैं। निष्कर्षण की प्रक्रिया से पहले उन्हें हटाना आवश्यक होता है। इस प्रकार गैंग का साथ हटाने से अयस्क में धातु की मात्रा अधिक हो जाती है जिसे सांद्रण कहते हैं।

                           चित्र: अयस्क के सांद्रण की चुंबकीय विधि

अतः, किसी अयस्क को अगले प्रक्रमों के लिए तैयार करने के लिए अयस्क का सांद्रण करना होता है। अयस्क से गैंग हटाने की विधि अयस्क के तथा गैंग के भीतर या रासायनिक गुणों के अंतर पर आधारित होती है।

सांद्रण की भौतिक विधियाँ—

(i) चुंबकीय विधि — यह विधि आयरन, कोबाल्ट, निकिल; जैसे-चुंबकीय पदार्थों की अशुद्धियों को अलग करने के लिए स्वीकार की जाती है जो खनिज 1 चुंबकीय प्रकृति के होते हैं वे चुंबकीय क्षेत्र की ओर आकर्षित होते हैं जबकि गैंग आदि आकर्षित नहीं होते। क्रोमाइट तथा पाइरोल्युसाइट के अयस्क इसी विधि द्वारा सांद्रित किए जाते हैं। इस विधि में पीसे हुए अयस्क को एक कन्वेयर बैल्ट के ऊपर रखते हैं। कन्वेयर बैल्ट दो रोलरों के ऊपर से गुजरती है जिनमें से एक चुंबकीय होता है जब अयस्क चुंबकीय किनारे पर से नीचे आता है, तो चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थ दो अलग-अलग ढेरों में एकत्रित हो जाते हैं। लोहे के अयस्क मैग्नेटाइट का सांद्रण इसी विधि द्वारा किया जाता है।

(ii) द्रवचालित धोना — इस विधि में बारीक पिसे हुए अयस्क को पानी की तेज धार में धोया जाता है। इस तेज धार में हल्के गैंग कण बह जाते हैं जबकि भारी खनिज कण तली में बैठ जाते हैं। टिन और लैड के अयस्क इसी विधि द्वारा सांद्रित किए जाते हैं।

(iii) फेन – प्लावन विधि — इस विधि में बारीक पिसे हुए अयस्क को जल एवं किसी उपयुक्त तेल के साथ एक बड़े टैंक में मिलाया जाता है। खनिज कण पहले ही तेल से भींग जाते हैं जबकि गैंग के कण पानी से भींग जाते हैं। अब इस मिश्रण में से बुलबुलों के रूप में वायु प्रवाहित की जाती है जिससे खनिज कण युक्त तेल के झाग या फेन बन जाते हैं जो जल की सतह पर तैरने लगती है जिन्हें बड़ी सरलता से जल के ऊपर से निकाला जा सकता है। ताँबा, सीसा तथा जिंक के सल्फाइड का सांद्रण करने के लिए इस विधि का प्रयोग किया जाता है।

(iv) रासायनिक विधियाँ— रासायनिक पृथक्करण में खनिज तथा गैंग के मध्य रासायनिक गुणों के अंतर का उपयोग किया जाता है। इसकी एक मुख्य विधि है— बेयर की विधि, जिसके द्वारा बॉक्साइट से एल्युमिनियम ऑक्साइड प्राप्त किया जाता है।

बेयर विधि द्वारा एल्युमिनियम अयस्क का सांद्रण— इस विधि में बॉक्साइट को गर्म सोडियम हाइड्रोक्साइड के साथ अपचयित किया जाता है जिसे NaAIO2 जो जल में घुलनशील हैं, गैंग को छानकर अलग कर दिया जाता है। NaAIO2 की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया करवाई जाती है जिससे एल्युमिनियम हाइड्रोक्साइड प्राप्त होता है। जिसके बाद एल्युमिनियम हाइड्रोक्साइड को गर्म करके शुद्ध एल्युमिनियम ऑक्साइड प्राप्त होता है।

विभिन्न अभिक्रियाएँ निम्नलिखित प्रकार से हैं—


प्रश्न 9. जस्ता के दो मुख्य अयस्कों के नाम उनके आणविक सूत्र के साथ लिखें जस्ता का अयस्क से निष्कर्षण का वर्णन करें।

उत्तर – जस्ता के मुख्य अयस्क — जिंक ब्लेंड (ZnS), कैलामाइन (ZnCO3)

जस्ता का निष्कर्षण — सल्फाइड या कार्बोनेट की तुलना में धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करना अधिक आसान है इसलिए सॉद्रित सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में उच्च ताप (900°C) पर गर्म करने पर वह जिंक ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है। इस क्रिया को जारण कहते हैं।

सांद्रित कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में उच्च ताप पर गर्म करने पर वह ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है इस प्रक्रिया को निस्तापन कहते हैं।

जिंक ऑक्साइड तथा कोक के मिश्रण (2 : 1) को उदय बकयंत्र में लेकर उच्च ताप ( 1400°C) पर गर्म करने पर ऑक्साइड जिंक धातु में अपचयित हो जाता है।

जस्ते का वाष्प संघनक में संघनित हो जाता है तथा CO गैस असंघनित अवस्था में ही बाहर निकल जाती है। यह जस्ता अशुद्ध होता है तथा जिंक स्पेल्टर कहलाता है।


प्रश्न 10. (a) लोहा के एक प्रमुख अयस्क का नाम एवं इसका सूत्र लिखें।

(b) इस अयस्क का सांद्रण कैसे होता है ?

उत्तर – (a) हेमेटाइट — Fe2O3xH2O;   मैग्नेटाइट Fe3O4

(b) लोहा के अयस्क का सान्द्रण : लोहा के अयस्क का सान्द्रण चुम्बकीय पृथक्करण विधि द्वारा किया जाता है।

इस विधि में दो पूलियों के ऊपर का अचुम्बकीय बेल्ट चढ़ा होता है। एक पूली अचुम्बकीय होती है तथा दूसरी पूली एक विद्युत चुम्बक की बनी होती है। अचुम्बकीय पूली पर चूर्णित अयस्क गिराया जाता है जो बेल्ट के सहारे चुम्बकीय पूली तक जाता है और वहाँ चुम्बकीय अवस्क अचुम्बकीय अशुद्धियों से पृथक हो जाता है।


Bihar Board Class 10th Chemistry VVI Long Subjective Question 2024

प्रश्न 11. मिश्रधातु किसे कहते हैं? इनके बनाने के उद्देश्यों का वर्णन करें।

उत्तर – मिश्रधातु किसी धातु का किसी अन्य धातु या अधातु के साथ मिलाकर बनाया गया संगामी मिश्रण मिश्रधातु कहलाता है। जैसे- टांके में कलई तथा सीसा समान मात्रा में मिलाया जाता है। उदाहरण के लिए, स्टेनलेस स्टील, टांका, पीतल, कांसा बैलमैटल आदि सभी मिश्रधातुएँ हैं ।

मिश्रधातुओं के उपयोग—

(i) कठोरता बढ़ाने के लिए— लोहे में कार्बन की मात्रा मिलाकर स्टेनलैस स्टील बनाया जाता है जो लोहे से अधिक कठोर होता है। सोने में तांबा तथा चांदी में सीसा मिलाने से उनकी कठोरता अधिक हो जाती है। ड्यूरेलियम एल्युमिनियम से बना मिश्र धातु है जो अत्यधिक कठोर होता है ।

(ii) शक्ति बढ़ाने के लिए— इस्पात, ड्यूरेलियम आदि मिश्र धातु कठोर होने के कारण शक्तिशाली भी होते हैं ।

(iii) संक्षारण रोकने के लिए— जैसे स्टैनलेस स्टील, लोहे तथा जिंक से बनी मिश्रधातु आदि पर जंग नहीं लगता ।

(iv) ध्वनि उत्पन्न करने के लिए— ताँबे तथा कलई से बनाई गई मिश्र धातु बैल मैटल होती है जिससे अधिक ध्वनि उत्पन्न हो जाती है ।

(v) गलनांक कम करने के लिए— जैसे रोज – मैटल मिश्र धातु है इसका गलनांक कम होता है । यह बिस्मथ कलई और सीसे बनती है । ।

(vi) उचित साँचे में ढालने के लिए— काँसा तथा टाइप मैटल ।

(vii) रंग परिवर्तन के लिए— ताँबे तथा एल्युमिनियम से बनी एल्युमिनियम ब्रांज मिश्र धातु का सुनहरी रंग होता है ।

(viii) घरेलू उपयोग — घरों, कारखानों, दफ्तरों में सभी जगह मिश्र धातुओं का उपयोग होता है जैसे घर के बर्तन, आलमारी, पंखे, फ्रिज, आभूषणों आदि में मिश्र धातुओं का उपयोग होता है।


प्रश्न 12. बॉक्साइट का रासायनिक सूत्र लिखें। एल्युमीनियम का शोध न कैसे किया जाता है ?

उत्तर- बॉक्साइट का रासायनिक सूत्र: Al2O3.2H2O

एल्युमीनियम का शोधन वैद्युत अपघटन विधि द्वारा होता है। इसमें अशुद्ध एल्युमीनियम को ऐनोड एवं शुद्ध एल्युमिनियम की प्लेट को कैथोड के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। एल्युमीनियम के एक लवण का विलयन वैद्युत अपघट्य का कार्य करता है। विद्युत धारा प्रवाहित करने पर एनोड शुद्ध धातु निकलकर विलयन में जाती है और विलयन में से उतनी ही शुद्ध धातु कैथोड पर एकत्रित हो जाती है। विलेय अपद्रव्य विलयन में चले जाते हैं, जबकि अविलेय ऐनोड के नीचे पेंदी में एकत्र हो जाते हैं जो ‘ऐनोड मड’ कहलाते हैं।


प्रश्न 13. लोहे के एक प्रमुख अयस्क का नाम और अणुसूत्र लिखें। लोहे के निष्कर्षण में वात्या भट्ठी में होने वाली अभिक्रियाओं को समीकरण द्वारा व्यक्त करें।

उत्तर— लोहे का प्रमुख अयस्क हेमेटाइट, Fe2O3

लोहे के निष्कर्षण में वात्य भट्ठी में होने वाली अभिक्रियायें—

वात्या भट्ठी में चार्ज के रूप में निस्तापित अयस्क (8 भाग), कोक (4 भाग) तथा चूने का पत्थर (1 भाग) का मिश्रण डाला जाता है। भट्ठी में चार्ज अधिक ताप की ओर आता जाता है और उसमें क्रमिक रूप से रासायनिक परिवर्तन होते जाते हैं ।

बिल्कुल ऊपर शीर्ष का क्षेत्र तप्तीकरण क्षेत्र कहलाता है, इसमें चार्ज की नमी, आदि दूर हो जाती है।

इसके बाद का क्षेत्र अपचयन का ऊपरी क्षेत्र (Upper zone of reduction) कहलाता है जिसका ताप लगभग 900°C होता है। यहाँ निम्न अभिक्रियाएँ सम्पन्न होती हैं और CO के द्वारा फेरिक ऑक्साइड का आयरन में अपचयन हो जाता है।


प्रश्न 14. प्रमुख मिश्र धातुओं के नाम, उनके घटक तथा उपयोग लिखिए।

उत्तर

 


प्रश्न 15. किसी धातु M के विद्युत अपघटनी परिष्करण में आप ऐनोड, कैथोड एवं विद्युत अपघट्य किसे बनाएँगे ?

उत्तर- इस प्रक्रिया में अशुद्ध धातु को ऐनोड बनाया जाता है तथा शुद्ध ध तु की एक पतली पट्टी को कैथोड बनाया जाता है। धात्विक लवण का उपयोग विद्युत अपघट्य के रूप में किया जाता है। उपकरणों को दिए गए चित्र के अनुसार व्यवस्थित किया जाता है। ताँबे का विद्युत अपघटनी परिष्करण। अम्लीकृत कॉपर सल्फेट विलयन का विलयन विद्युत अपघट्य है ।

अशुद्ध ताँबा ऐनोड है जबकि शुद्ध ताँबे की पट्टी कैथोड का कार्य करती है। विद्युत धारा प्रवाहित करने पर शुद्ध ताँबा कैथोड पर निक्षेपित हो जाता है। विद्युत अपघट्य से विद्युत प्रवाहित करने पर ऐनोड पर स्थित शुद्ध धातु विद्युत अपघट्य में घुल जाता है। शुद्ध धातु की इतनी ही मात्रा कैथोड पर जमा हो ज है। विलयशील अशुद्धियाँ विलयन में पहुँच जाती हैं जबकि अविलयशील अशुद्धियाँ ऐनोड के नीचे जम जाती हैं, जिन्हें ऐनोड पंक कहा जाता है।


Chemistry Important Question   
Chapter Name Objective Que Subjective Que Long Subjective
1. रासायनिक अभिक्रियाएं एवं समीकरणClick HereClick HereClick Here
2. अम्ल क्षार एवं लवणClick HereClick HereClick Here
3. धातु एवं अधातुClick HereClick HereClick Here
4. कार्बन और उसके यौगिकClick HereClick HereClick Here
5. तत्वों का वर्गीकरणClick HereClick HereClick Here
Physics ( भौतिक विज्ञान ) Objective & Subjective Question
Chemistry ( रसायन विज्ञान ) Objective & Subjective Question
Biology ( जीव विज्ञान ) Objective & Subjective Question

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