Class 10th Science Long Subjective Question

Class 10th Science Long Subjective Question 2024 | class 10thmanav netra tatha rang biranga sansar dirgh uttariy prashn

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Class 10th Science Long Subjective Question 2024 :- दोस्तों यहां पर बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2024 ( Bihar Board Matric Exam 2024 ) के लिए विज्ञान का सब्जेक्ट प्रश्न उत्तर दिया गया है यदि आप लोग मैट्रिक परीक्षा 2024 की तैयारी कर रहे हैं तो कक्षा 10 मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ( class 10th manav netra tatha rang biranga sansar dirgh uttariy prashn ) यहां पर दिया गया है जो कि आने वाले परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है साथ ही इस वेबसाइट पर सभी सब्जेक्ट का ऑब्जेक्टिव एंड सब्जेक्टिव प्रश्न( Bihar Board Class 10th All Subjective Ka Objective And Subjective Question 2024 ) दिया गया है जिससे आप 2024 में बेहतर तैयारी कर सकते हैं

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Class 10th Science Long Subjective Question 2024

प्रश्न 1. निकट दृष्टि दोष किसे कहते हैं? इसके क्या कारण हैं? इसके संशोधन की विधि को सचित्र समझायें।

अथवा, दृष्टि दोष क्या है ? ये कितने प्रकार के होते हैं ? किसी एक दृष्टि दोष के निवारण का सचित्र वर्णन करें ।

अथवा, मानव आँख के दोषों को रेखांकित चित्रों की सहायता से दूर करने के उपाय समझाएँ ।

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उत्तर- आँख के दोष — एक सामान्य स्वस्थ आँख अपनी फोकस दूरी को इस प्रकार संयोजित करती है कि पास तथा दूर की सभी वस्तुओं का प्रतिबिंब दृष्टिपटल पर बन जाए। इससे दूर दृष्टि तथा निकट दृष्टि के दोष हो जाते हैं । इनके अतिरिक्त प्रेस्बायोपिया, रंगांधता और एस्टग्माटिज्म रोग भी बहुत सामान्य है I

1. दूर – दृष्टि दोष— इस दोष के व्यक्ति को दूर की वस्तुएँ तो स्पष्ट दिखाई देती हैं परन्तु समीप की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई नहीं देती हैं। इसका कारण यह है कि समीप की वस्तुओं का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है

      चित्र: दूर-दृष्टि दोष

दूर- दृष्टि दोष के कारण—

(i) नेत्र गोलक का छोटा होना ।

(ii) आँख के क्रिस्टलीय लेंस का पतन होना या इनकी फोकस दूरी का अधिक हो जाना। बच्चों में यह प्रायः नेत्र गोलक के छोटा होने के कारण होता है । है

दूर दृष्टि दोष को दूर करना—  इस दोष को दूर करने के लिए उत्तल लेंस (convex lens) का प्रयोग किया जाता है। इस लेंस के प्रयोग से निकट बिंदु से आने वाली प्रकाश किरणें किसी दूर के बिंदु से आती हुई प्रतीत होती हैं तथा समीप पड़ी वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई देने लगती हैं।

     चित्र: दूर-दृष्टि दोष दूर करना

II. निकट दृष्टि दोष— इस दोष वाली आँख के पास की वस्तुएँ तो स्पष्ट दिखाई देती हैं परन्तु दूर की वस्तुएँ ठीक दिखाई नहीं देतीं या धुंधली दिखाई देती हैं। इसका अभिप्राय यह है कि दूर बिंदु अनंत की तुलना में कम दूरी पर आ जाता है।

    चित्र: निकट दृष्टि दोष

निकट दृष्टि दोष के कारण— इस दोष के उत्पन्न होने के कारण-

(i) क्रिस्टलीय लेंस का मोटा हो जाना या इसकी फोकस दूरी का कम हो जाना ।

(ii) आँख के गोले का लंबा हो जाना अर्थात् रेटिना तथा लेंस के बीच की दूरी का अधिक हो जाना होता है। अनंत से आने वाली समानांतर किरणें रेटिना के सामने मिलती हैं तथा प्रतिबिंब रेटिना पर नहीं बनता जैसा कि ऊपर चित्र में दिखाया गया है।

निकट दृष्टि दोष को दूर करना इस दोष को दूर करने के लिए अवतल लेंस का प्रयोग करना पड़ता है जिसकी फोकस दूरी आँख के दूर बिंदु जितनी होती है

  चित्र: निकट दृष्टि दोष दूर करना

III. रंगांधता — यह एक ऐसा रोग है जो जैविक कारणों से होता है। यह वंशानुगत होता है इस रोग में रोगी विशेष रंगों को पहचान नहीं कर पाता क्योंकि उसकी आँखों में रेटिना पर शंकु जैसी ‘संरचनाएँ अपर्याप्त होती हैं। आँखों में लाल, नीले और हरे रंग को पहचानने वाली कोशिकाएँ होती हैं। रंगांध व्यक्ति की आँख में कम शंक्वाकार रचनाओं के कारण वह विशेष रंगों को नहीं पहचान पाता। इस रोग का कोई उपचार नहीं है। ऐसा व्यक्ति हर वस्तु ठीक प्रकार से देख सकता है पर कुछ रंगों की पहचान नहीं कर पाता । परमाणु सिद्धांतों का जनक डाल्टन भी इस रोग से ग्रस्त था

IV. प्रेस्वायोपिया – यह रोग आयु से संबंधित है। लगभग सभी व्यक्तियों को यह रोग 40 वर्ष की आयु के बाद हो जाता है। आँख के लेंस की लचक आयु के साथ कम हो जाती है। सिलियरी मांसपेशियाँ आँख के लेंस की फोकस दूरी को परिवर्तित नहीं कर पातीं जिस कारण निकट की वस्तु स्पष्ट दिखाई नहीं देती। निकट दृष्टि और दूर दृष्टि के मिले-जुले इस रूप को दूर करने के लिए उत्तल और अवतल लेंस से युक्त दो चश्मों का बाइफोकस चश्मे में दोनों लेंसों के साथ प्रयोग से इसे सुधारा जा सकता है।

V. एस्टेग्माटिज्म — एस्टेग्माटिज्म से ग्रस्त व्यक्ति एक साथ अपनी दोनों आँखों का फोकस नहीं कर पाता। कॉर्निया के पूर्ण रूप से गोलाकार न होने के कारण यह रोग होता है। विभिन्न दिशाओं में वक्रता भिन्न होती है। व्यक्ति लंबाकार दिशा में ठीक प्रकार से दृष्टि फोकस नहीं कर पाता। इस रोग को सिलेंड्रीकल चश्मे से सुधारा जा सकता है।


प्रश्न 2. सूर्योदय के समय सूर्य रक्ताभ क्यों प्रतीत होता है ?

उत्तर – क्षितिज के समीप स्थित सूर्य से आने वाला प्रकाश हमारे नेत्रों तक पहुँचने से पहले पृथ्वी के वायुमंडल में वायु की मोटी परतों से होकर गुजरता है। तथापि, जब सूर्य सिर से ठीक ऊपर (ऊर्ध्वस्थ) हो तो सूर्य से आने वाला प्रकाश, अपेक्षाकृत कम दूरी चलेगा। दोपहर के समय सूर्य श्वेत प्रतीत होता है, क्योंकि नीले तथा बैंगनी वर्ण का बहुत भाग ही प्रकीर्ण हो पाता है। क्षितिज के समीप, नीले तथा कम तरंगदैर्ध्य के प्रकाश का अधिकांश भाग कणों द्वारा प्रकीर्ण हो जाता है। इसीलिए, हमारे नेत्रों तक पहुँचने वाला प्रकाश अधिक तरंगदैर्ध्य का होता है। इससे सूर्योदय या सूर्यास्त के समय सूर्य रक्ताभ प्रतीत होता है।

   चित्र – सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सूर्य का रक्ताभ प्रतीत होना


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प्रश्न 3. (a) मानव नेत्र का स्वच्छ नामांकित आरेख खीचें।

(b) किस प्रकार निकट रखी वस्तुओं और दूर रखी वस्तुओं को देखने के लिए पक्ष्माभी पेशियाँ अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी को सम्मयोजित करती हैं?

उत्तर- (a)

चित्र- मानव नेत्र

(b) सिलियरी पेशियों द्वारा नेत्र लेंस अपने स्थान पर स्थित व नियंत्रित होता है जब हम निकट की वस्तु को देखते हैं तो सिलियरी पेशियाँ नेत्र-लेंस को दबाती हैं जिससे यह मध्य भाग में फूल जाता है अतः, नेत्र-लेंस की फोकस दूरी घट जाती है इसलिए प्रतिबिंब नेत्र के रेटिना पर बनता है और वस्तु साफ-साफ दिखाई पड़ती है जब हम दूर की वस्तु को देखते हैं तो सिलियरी पेशियों ढीली हो जाती हैं, जिससे नेत्र- लेंस पतला हो जाता है और नेत्र लेंस की फोकस दूरी बढ़ जाती है। अतः, प्रतिबिंब रेटिना पर बनता है, इसलिए वस्तु साफ-साफ दिखाई पड़ती है अपनी फोकस दूरी स्वत: समायोजित करने का नेत्र-लेंस का यह गुण (या क्षमता) समंजन – क्षमता या समायोजन क्षमता कहलाता है।


प्रश्न 4. (a) प्रकाश के प्रकीर्ण से आप क्या समझते हैं?

(b) प्रकाश वर्ण पट क्या है?

(c) काँच के प्रिज्म से गुजरते हुए श्वेत प्रकाश के वर्ण-विक्षेपन की व्याख्या करें।

उत्तर- (a) जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, तो वायुमंडल में उपस्थित विभिन्न गैसों के अणु एवं परमाणु अवशोषित कर लेता है। गैसों के ये अणु एवं परमाणु सभी दिशाओं में प्रकाश को पुनः उत्सर्जित करता है। यही प्रक्रिया प्रकाश का प्रकीर्ण कहलाती है।

(b) प्रकाश के वर्ण विक्षेपण के फलस्वरूप पर्दा पर सात रंगों की एक रंगीन पट्टी होती है, जिसे वर्णपट्ट कहते हैं। वर्णपट्ट पर प्राप्त रंगों का क्रम इस प्रकार है – बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी एवं लाल ।

(c) जब काँच की प्रिज्म से प्रकाश का पुंज गुजारा जाए तो यह सात रंगों में बँट जाता है जिसे प्रकाश का वर्ण विक्षेपण कहते हैं। इन सात रंगों को बैंगनी (Violet), हल्के नीला (Indigo), नीला (Blue), हरा (Green), , पीला (Yellow), संतरी (Orange) और लाल (Red) वर्ण क्रम में व्यवस्था प्राप्त होती है। वर्ण क्रम को VIBGYOR भी कहते हैं।


प्रश्न 5. तारे क्यों टिमटिमाते हैं ?

उत्तर – तारों के प्रकाश के वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण ही तारे टिमटिमाते प्रतीत होते हैं। पृथ्वी के वायुमण्डल में प्रवेश करने के पश्चात् पृथ्वी के पृष्ठ पर पहुँचने तक तारे का प्रकाश निरन्तर अपवर्तित होता रहता है। वायुमंडलीय अपवर्तन उसी माध्यम में होता है जिसका क्रमिक परिवर्ती अपवर्तनांक हो क्योंकि वायुमण्डल तारे के प्रकाश को अभिलम्ब की ओर झुका देता है, अतः तारे की आभासी स्थिति उसकी वास्तविक स्थिति से कुछ भित्र प्रतीत होती है। क्षितिज के निकट देखने पर कोई तारा अपनी वास्तविक स्थिति से कुछ ऊँचाई पर प्रतीत होता है। तारे की यह आभासी स्थिति भी स्थायी न होकर धीरे-धीरे थोड़ी बदलती भी रहती है क्योंकि पृथ्वी के वायुमण्डल की भौतिक अवस्थाएँ स्थायी नहीं हैं। चूँकि तारे बहुत दूर हैं, अतः वे प्रकाश के बिन्दु-स्रोत के सन्निकट हैं, क्योंकि तारों से आने वाली प्रकाश किरणों का पथ है । अतः तारे की आभासी स्थिति विचलित होती रहती है तथा आँखों में प्रवेश करने वाले तारों के प्रकाश की मात्रा झिलमिलाती रहती है- जिसके कारण कोई तारा कभी चमकीला प्रतीत होता है तो कभी धुंधला, जो कि टिमटिमाहट का प्रभाव है।

   चित्र: वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण तारे की आभासी स्थिति


Bihar Board Class 10th Science Long Subjective Question 2024

प्रश्न 6. चित्र बनाकर दर्शाइए कि दीर्घ-दृष्टि दोष कैसे संशोधित किया जाता है। एक दीर्घ दृष्टि दोषयुक्त नेत्र का निकट बिंदु 1 m है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लेंस की क्षमता क्या होगी ? यह मान लीजिए कि सामान्य नेत्र का निकट बिंदु 25 cm है।

उत्तर – दीर्घ- दृष्टि रोग के संशोधन के लिए उचित क्षमता का उत्तल लेंस प्रयुक्त किया जाए।


प्रश्न 7. मनुष्य की आँख का चित्र बनाकर उसकी रचना व कार्यविधि का वर्णन कीजिए।

उत्तर— नेत्र के निम्नलिखित भाग होते हैं-

(i) दृढ़ पटल — मनुष्य का नेत्र लगभग एक खोखले गोले के समान होता है जो बाहर से एक दृढ़ और अपारदर्शी श्वेत पर्त से ढँका रहता है जिसे दृढ़ पटल कहते हैं। इसके द्वारा नेत्र की रक्षा होती है।

    चित्र- मानव नेत्र

(ii) कॉर्निया — दृढ़ पटल के सामने का भाग उभरा हुआ और पारदर्शी होता है। इसे कॉर्निया कहते हैं। नेत्र में प्रकाश इसी से होकर प्रवेश करता है ।

(iii) आइरिस — कॉर्निया के पीछे एक रंगहीन तथा अपारदर्शी झिल्ली का पर्दा होता है जिसे आइरिस कहते हैं।

(iv) पुतली या नेत्र तारा — परें के बीच में एक छिद्र होता है जिसको पुतली कहते हैं। यह गोल तथा काला दिखाई देता है कॉर्निया से आया प्रकाश पुतली से । होकर ही लेंस पर पड़ता है। पुतली की यह विशेषता होती है कि अंधकार में यह अपने आप बड़ी व अधिक प्रकाश में अपने आप छोटी हो जाती है।

(v) नेत्र लेंस— पुतली के ठीक पीछे नेत्र लेंस होता है जो कि पारदर्शी जीवित पदार्थ का बना होता है। नेत्र लेंस के पिछले भाग की वक्रता त्रिज्या बड़ी होती है।

(vi) जलीय द्रव तथा काचाभ द्रव — कॉर्निया एवं लेंस के बीच एक नमकीन तथा पारदर्शी द्रव भरा रहता है जिसका अपवर्तनांक 1.336 होता है। इसे जलीय द्रव कहते हैं लेंस के पीछे एक और पारदर्शी द्रव भरा रहता है जिसका अपवर्तनांक भी 1.336 होता है। इसे काचाभ द्रव कहते हैं ।

(vii) कोरोइड— दृढ़ पटल के ठीक नीचे एक काले रंग की झिल्ली होती है जो प्रकाश को शोषित करके, प्रकाश के आन्तरिक परावर्तन को रोकती है। इसे कोराइड कहते हैं।

(viii) रेटिना— कोरोइड झिल्ली के नीचे तथा नेत्र के सबसे अन्दर की ओर एक पारदर्शी झिल्ली होती है, जिसे रेटिना कहते हैं। वस्तु का प्रतिबिम्ब रेटिना पर बनता है। रेटिना बहुत-सी प्रकाश शिराओं की एक फिल्म होती है।

 

कार्य— आँखें देखने का कार्य करती हैं। बाहर से प्रकाश कार्निया से अपरिवर्तित होकर पुतली में होता हुआ लेंस पर पड़ता है। लेंस से अपवर्तन होने के पश्चात् किरणें रेटिना के पीत बिन्दु पर केन्द्रित हो जाती हैं, जिससे रेटिना की संवेदनशील कोशिकाएँ सक्रिय हो जाती हैं व विद्युत संकेत उत्पन्न होते हैं जो दुक तन्त्रिकाओं द्वारा हमारे मस्तिष्क में पहुँचते हैं। यहाँ ये संकेत प्रकाश के रूप में प्रतिपादित होते हैं। आँख के लेंस से जुड़ी मांसपेशियों के तनाव में परिवर्तन होने से उसकी फोकस दूरी परिवर्तित हो जाती है। तनाव के कम होने से लेंस पतला हो जाता है तथा दूर स्थित वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई देती हैं। तनाव अधिक होने से लेंस मोटा हो जाता है, व निकट की वस्तुएँ साफ दिखाई पड़ती हैं। जब ये शक्ति लेंस में क्षीण हो जाती है तो हमारी आँखों में दोष उत्पन्न हो जाते हैं।


Physics Important Question   
Chapter Name Objective Que Subjective Que Long Subjective
1. प्रकाश के परावर्तन तथा अपवर्तनClick HereClick HereClick Here
2. मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसारClick HereClick HereClick Here
3. विधुत धाराClick HereClick HereClick Here
4. विधुत धारा के चुंबकीय प्रभावClick HereClick HereClick Here
5. ऊर्जा के स्रोतClick HereClick HereClick Here
Physics ( भौतिक विज्ञान ) Objective & Subjective Question
Chemistry ( रसायन विज्ञान ) Objective & Subjective Question
Biology ( जीव विज्ञान ) Objective & Subjective Question

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