10th Political Science Long Subjective Question In Hindi PDF

10th Political Science Long Subjective Question In Hindi PDF | Bihar Board Class 10th Social Science Subjective Question 2024

Social Science

10th Political Science Long Subjective Question In Hindi PDF :- दोस्तों यहां पर बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2024 ( Bihar Board Matric Exam 2024 ) के लिए सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) का सब्जेक्टिव प्रश्न उत्तर दिया गया है यदि आप लोग मैट्रिक परीक्षा 2024 की तैयारी कर रहे हैं तो कक्षा 10 सत्ता में साझेदारी की कार्यप्रणाली का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न( class 10th satta mein sajhedari ki karyapranali dirgh uttariy prashn ) यहां पर दीया गया है जो कि आने वाले परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है साथ ही इस वेबसाइट पर सभी सब्जेक्ट का ऑब्जेक्टिव एंड सब्जेक्टिव प्रश्न( Bihar Board Class 10th All Subjective Ka Objective And Subjective Question 2024 ) दिया गया है जिससे आप 2024 में बेहतर तैयारी कर सकते हैं

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10th Political Science Long Subjective Question In Hindi PDF

प्रश्न 1. नगर-निगम के प्रमुख कार्यों का वर्णन करें ।

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उत्तर ⇒ नगर-निगम नागरिकों की स्थानीय आवश्यकता एवं सुख-सुविधा का ध्यान रखते हुए अनेक कार्य करता है ।

नगर-निगम के प्रमुख कार्य निम्न हैं—

(i) नगर क्षेत्र की नालियों, पेशाब खाना, शौचालय आदि निर्माण करना एवं उसकी देखभाल करना ।

(ii) नगरीय क्षेत्र में कूड़ा तथा गंदगी की सफाई करना ।

(iii) स्वच्छ पेय जल का प्रबंध करना ।

(iv) गलियों, पूलों तथा उद्यानों की सफाई एवं निर्माण करना ।

(v) मनुष्यों तथा पशुओं के लिए चिकित्सा केन्द्र की स्थापना करना एवं छुआ-छूत जैसी बीमारी पर रोक लगाने का प्रयास करना ।

(vi) प्रारंभिक स्तरीय सरकारी विद्यालयों, पुस्तकालयों, अजायब घर की स्थापना तथा व्यवस्था करना

(vii) विभिन्न कल्याण केन्द्रों जैसे मातृ केन्द्र, शिशु केन्द्र, वृद्धा श्रम की स्थापना एवं देखभाल करना इत्यादि नगर निगम के प्रमुख कार्यों में आते हैं।


प्रश्न 2. ग्राम पंचायत के कार्यों एवं शक्तियों का वर्णन करें।

अथवा, बिहार में ग्राम पंचायत के कार्य एवं शक्तियों का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ ग्राम पंचायत के सामान्य कार्य—

(i) पंचायत क्षेत्र के विकास के लिए वार्षिक योजना तथा वार्षिक बजट तैयार करना।

.(ii) प्राकृतिक विपदा में सहायता करने का कार्य ।

(iii) सार्वजनिक सम्पत्ति से अतिक्रमण हटाना ।

(iv) स्वैच्छिक श्रमिकों को संगठित करना और सामुदायिक कार्यों में स्वैच्छिक सहयोग करना।

ग्राम पंचायत की शक्तियाँ—

(i) संपत्ति अर्जित करने, धारण करने और उसके निपटने की तथा उसकी संविदा करने की शक्ति ।

(ii) करारोपण (वार्षिक कर) जैसे जलकर, स्वच्छता कर, मेलों-हाटों मेंप्रबंध कर वाहनों के निबंधन पर फीस तथा क्षेत्राधिकार में चलते व्यवसायों, नियोजनों पर कर ।

(iii) राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा पर संचित निधि से सहायक अनुदान प्राप्त करने का अधिकार ।


प्रश्न 3. राजनैतिक दल किस तरह से सत्ता में साझेदारी करते हैं ?

उत्तर ⇒ राजनीतिक दल सत्ता में साझेदारी का सबसे जीवंत स्वरूप है। राजनीतिक दल सत्ता के बँटवारे के वाहक से मोल तोल करने वाले सशक्त माध्यम होते हैं। राजनीतिक दल लोगों के ऐसे संगठित समूह हैं जो चुनाव लड़ने और राजनैतिक सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से काम करता है। अतः, विभिन्न राजनीतिक दल सत्ता प्राप्त करने के लिए प्रतिस्पद्ध के रूप में काम करते हैं। उनकी आपसी प्रतिद्वंद्वितां यह निश्चित करती है कि सत्ता हमेशा किसी एक व्यक्ति या संगठित व्यक्ति समूह के हाथ में न रहे। राजनैतिक दलों के इतिहास पर गौर से अध्ययन करने पर पता चलता है कि सत्ता बारी-बारी से अलग-अलग विचारधाराओं और समूहों वाले राजनीतिक दलों के हाथ में आती-जाती रहती है अतः लोकतंत्र में विभिन्न राजनैतिक दल आपस में प्रतिद्वन्द्विता करके सत्ता में साझेदारी करते हैं। जनता भी अपने हितों की पूर्ति के लिए इन राजनीतिक दलों को चुनाव में जीताकर उनको सत्ता में भागीदार बनाते रहते हैं


प्रश्न 4. भारत में संघीय शासन व्यवस्था की विशेषताओं का उल्लेख करें।

उत्तर ⇒ संघीय व्यवस्था की सबसे पहली शर्त के रूप में भारतीय संविधान में दो तरह की सरकारों की व्यवस्था की गई है—एक संपूर्ण राष्ट्र के लिए जिसे संघीय सरकार या केन्द्रीय सरकार कहते हैं और दूसरी प्रत्येक प्रांतीय इकाई या राज्य के लिए सरकार जिसे हम प्रांतीय यह राज्य सरकार कहते हैं।

संविधान में स्पष्ट रूप से केन्द्र और राज्य सरकार के कार्य क्षेत्र और अधिकार को बाँटा गया है। विधायी अधिकारों को तीन सूचियों में यथा केन्द्र सूची या संघ सूची, राज्य सूची तथा समवर्ती सूची में उल्लेखित किया गया है।

संघीय व्यवस्था में साझी इकाइयों को बराबर अधिकार नहीं मिलते हैं। भारतीय संघ में भी कुछ राज्यों को विशेषाधिकार प्राप्त है। जैसा कि भारत में जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा प्राप्त है उसका अपना संविधान है, बिना उसकी सहमति क भारतीय संविधान के कई प्रावधानों को वहाँ लागू नहीं किया जा सकता है। उसके स्थानीय निवासियों के अतिरिक्त कोई भारतीय नागरिक वहाँ जमीन या मकान नहीं खरीद सकता है आदि ।

भारतीय संघवाद की एक विशेषता यह भी है कि भारतीय संविधान को कठो बनाया गया है, ताकि केन्द्र और राज्य के बीच अधिकारों के बँटवारे में आसानी से एवं राज्यों की सहमति के बिना फेर-बदल नहीं किया जा सके।

स्वतंत्र एवं सर्वोच्च न्यायपालिका की व्यवस्था की गई है जिसे संविधान की व्याख्या, केन्द्र और राज्य के झगड़े निपटाने के साथ केन्द्र और राज्य सरकार क , द्वारा बनाए गए कानूनों की जाँच करने, उन्हें संविधान के विरुद्ध या गैरकानूनी घोषि करने की भी शक्ति प्रदान होती है।


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प्रश्न 5. भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए ।.

उत्तर ⇒ भारतीय संविधान की विशेषताएँ—

(i)भारतीय संविधान संसार के सभी संविधानों से विशाल है। इसमें संसार के सभी संविधानों के अंश हैं।

(ii) यह अंशत: लचीला तथा अंशतः कठोर है।

(iii) यह संविधान कई संविधानों का सम्मिश्रण है।

(iv) इसमें अन्य देशों की अच्छाइयों को अपनाया गया है।

(v) यह एक संघीय संविधान है।

(vi) इसमें एकात्मक तथा संघात्मक दोनों संविधानों के गुणों को अपनाया गया है।

(vii) यह लोक कल्याणकारी राज्यों का उद्देश्य अपनाया गया है।

(viii) भारतीय संविधान राज्यों के नीति-निर्देशक तत्वों की व्यवस्था करता है।

(ix) यह धर्म निरपेक्ष राज्य की स्थापना करता है।


प्रश्न 6. राजनीतिक दलों के गठबंधन से आप क्या समझते हैं? क्या गठबंधन समय की मांग है ?

उत्तर ⇒ राजनीतिक दलों के गठबन्धन का तात्पर्य कई राजनीतिक दलों द्वारा सरकार बनाने अथवा चुनाव लड़ने के लिये मिलजुल कर गठबंधन बनाना। दलों के गठबन्धन बनाना । दलों के गठबंधन दो प्रकार के होते हैं। प्रथम चुनाव पूर्व राजनीतिक दलों के गठबन्धन दूसरे, चुनाव बाद सरकार बनाने के लिये गठबंधन। चुनाव पूर्व बनने वाले गठबन्धन अधिक स्थायी होते हैं। गठबंधनों की प्रवृत्ति तब अधिक होती है जब कोई भी दल अकेले बहुमत प्राप्त करने की स्थिति में नहीं होता। भारत में वर्तमान युग गठबन्धनों का युग है क्योंकि क्षेत्रीय दलों के बढ़ते 1 प्रभाव के कारण कोई भी राष्ट्रीय दल अकेले ही बहुमत प्राप्त कर सरकान बनाने हेतु सक्षम नहीं है। अतः सरकार बनाने हेतु आवश्यक बहुमत जुटाने के लिये दलों में गठबन्धन की सरकार है। भारत में 1989 के बाद से राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की सरकारों का युग चल रहा है। गठबंधन की सरकारों की मुख्य कमी यह है कि इसमें सरकार की नीतियों व कार्यक्रमों के निर्धारण में एकरूपता नहीं होती तथा निर्णय-निर्माण में अधिक समय लगता है।


प्रश्न 7. त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था से आप क्या समझते हैं? बिहार में इसका क्या स्वरूप है ?

उत्तर ⇒ त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का तात्पर्य है कि इसमें पंचायतों का गठन तीन स्तरों पर किया जाता है। प्रथम ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत, द्वितीय सबसे ऊपर जिला स्तर पर जिला पंचायत तथा तीसरा इन दोनों के मध्य, बीच के स्तर पर क्षेत्र पंचायत या ब्लॉक पंचायत ।

वैसे तो भारत में पंचायतों का अस्तित्व लम्बे समय से रहा है लेकिन त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का आरम्भ 1959 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा 2 अक्टूबर 1959 को किया गया था। 73वें संविधान संशोधन द्वारा 1992 में पंचायतों का पुनर्गठन करके उन्हें संवैधानिक मान्यता प्रदान की गई। बिहार में भी वर्तमान में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू है। ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत का चुनाव ग्राम सभा के सदस्यों द्वारा पाँच वर्ष के लिये किया जाता है ब्लाक या खण्ड स्तर पर क्षेत्र पंचायत सदस्यों का चुनाव उस ब्लॉक में सम्मिलित ग्राम सभाओं द्वारा किया जाता है। चुने हुये सदस्य अपने में से अध्यक्ष का चुनाव करते हैं। बिहार में क्षेत्र पंचायत को पंचायत समिति कहते हैं। जिला स्तर पर जिला परिषद् के सदस्यों का चुनाव भी जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से किया जाता है। इसका भी कार्यकाल 5 वर्ष है ।


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प्रश्न 8. गठबंधन की सरकारों में सत्ता में साझेदारी कौन-कौन होते हैं ?

उत्तर ⇒ जब दो या दो से अधिक पार्टियाँ मिलकर चुनाव लड़ती हैं और सरकार का गठन करती हैं, तब ऐसी सरकार को गठबंधन सरकार कहते हैं। सत्ता की साझेदारी का सबसे अद्यतन रूप गठबंधन की राजनीति या गठबंधन की सरकारों में दिखता है। गठबंधन की सरकार में संत्ता की साझेदारी विभिन्न विचारधाराओं, विभिन्न समाजिक समूहों और विभिन्न क्षेत्रीय और स्थानीय हितों वाले राजनीतिक दल एक साथ एक समय में सरकार के एक स्तर पर सत्ता में साझेदारी करते हैं। भारत में 1990 ई० के बाद गठबंधन की राजनीति काफी बढ़ गयी है। केन्द्र में UPA (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) की पिछली सरकार गठबंधन सरकार का ही उदाहरण थी।


प्रश्न 9. दबाव समूह किस तरह से सरकार को प्रभावित कर सत्ता में साझेदार बनते हैं?

उत्तर ⇒ दबाव समूह का निर्माण तब होता है जब समान पेशे हित, आकांक्षा ” अथवा मत के लोग एक समान उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए एकजुट होते हैं। एक संगठन के रूप में दबाव समूह सरकार की नीतियों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन राजनीतिक पार्टियों के समान दवाव समूह का लक्ष्य सत्ता पर प्रत्यक्ष नियंत्रण करने अथवा उसमें हिस्सेदारी करने का नहीं होता है। दबाव समूह राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। लोकतंत्र में हम व्यापारी, उद्योगपति, किसान, शिक्षक, औद्योगिक मजदूर जैसे संगठित हित समूह सरकार की विभिन्न समितियों में प्रतिनिधि बनकर सत्ता में भागीदारी करते हैं या अपने हितों के लिए सरकार पर अप्रत्यक्ष रूप से दबाव डालकर उनके फैसलों को प्रभावित कर सत्ता में अप्रत्यक्ष रूप से हिस्सेदारी करते हैं। यदि कोई एक समूह सरकार के ऊपर अपने हित के लिए नीति बनाने के लिए दबाव डालता है तो दूसरा समूह उसके प्रतिकार में दबाव डालता है कि नीतियाँ इस तरह से न बनाई जाए। ऐसे में सरकार को भी यह पता चलता है कि समाज के विभिन्न वर्ग क्या चाहते हैं तथा उन्हें सत्ता में कैसे और कितनी मात्रा में हिस्सेदार बनाया जाए।


प्रश्न 10. ग्राम पंचायतों की आय के स्रोत क्या हैं ?

उत्तर ⇒ ग्राम पंचायत की आय के स्रोत निम्नलिखित हैं—

(i) कर स्रोत होल्डिंग, व्यवसाय, व्यापार, पेशा और नियोजन ।

(ii) फीस और रेंट वाहनों का निबंधन, तीर्थ स्थानों, हाटों और मेलों, जलापूर्ति, गलियों और अन्य स्थानों पर प्रकाश, शौचालय और मूत्रालय ।

(iii) वित्तीय अनुदान राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा के आधार पर राज्य सरकार द्वारा पंचायतों को संचित निधि से अनुदान भी दिया जाता है।


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प्रश्न 11. जिला परिषद का गठन एवं उसके कार्यकाल का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ जिला परिषद् पंचायती राज व्यवस्था का तीसरा स्तर है। 50,000 की आबादी पर जिला परिषद का एक सदस्य चुना जाता है। ग्राम पंचायत और पंचायत समिति के चुनाव की तरह इसमें भी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ी जाति और महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान है। जिला परिषद के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत जिला की सभी पंचायत समितियाँ आती हैं।

जिला परिषद का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है। जिले के सभी पंचायत समितियों के प्रमुख इसके सदस्य होते हैं। प्रत्येक जिला परिषद का एक अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष होता है। उनका निर्वाचन जिला परिषद के सदस्य अपने सदस्यों के बीच से पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ और शक्तिशाली बनाने के लिए करते हैं। प्रत्येक पाँच वर्ष के अवसान पर पंचायतों की वित्तीय स्थिति का पुनरावलोकन करने हेतु ‘राज्य वित्त आयोग’ का गठन किया जाता है।


प्रश्न 12. पंचायत समिति का गठन कैसे होता है ?

उत्तर ⇒ पंचायत समिति पंचायती राज व्यवस्था का दूसरा या मध्य स्तर है। | वास्तव में यह ग्राम पंचायत और जिला परिषद के बीच की कड़ी है। बिहार में 5000 की आबादी पर पंचायत समिति के एक सदस्य को चुने जाने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त पंचायत समिति के क्षेत्र के अन्दर आनेवाले समिति के प्रमुख का चुनाव अप्रत्यक्ष रीति से किया जाता है। प्रमुख/उपप्रमुख के उम्मीदवार प्रत्यक्ष निर्वाचित सदस्यों में से होते हैं तथा उन्हीं के मतों से बनाए जाते हैं। प्रमुख पंचायत समिति का प्रधान अधिकारी होता है वह समिति की बैठक बुलाता है और उसकी अध्यक्षता करता है। वह पंचायत समिति के कार्यों की जाँच पड़ताल करता है और । प्रखंड विकास पदाधिकारी पर नियंत्रण रखता है। प्रखंड विकास पदाधिकारी पंचायत समिति का पदेन सचिव होता है। वह प्रमुख के आदेश पर पंचायत समिति की बैठक बुलाता है। वह पंचायत समिति के निर्णयों को क्रियान्वित करता है तथा उसके कोष के धन को खर्च करता है। वह पंचायतों का निरीक्षण करता है और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों का संपादन करता है।


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Chapter Name Objective Que Subjective Que Long Subjective
1. लोकतंत्र में सत्ता की साझेदारीClick HereClick HereClick Here
2. सत्ता में साझेदारी की कार्यप्रणालीClick HereClick HereClick Here
3. लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा एवं संघर्षClick HereClick HereClick Here
4. लोकतंत्र की उपलब्धियांClick HereClick HereClick Here
5. लोकतंत्र की चुनौतियां Click HereClick HereClick Here

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