Class 10th Economics Long Subjective Question

Class 10th Economics Long Subjective Question 2024 : Economics Chapter 1 Subjective Question 2024

Social Science

Class 10th Economics Long Subjective Question 2024:- दोस्तों यहां पर बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2024 ( Bihar Board Matric Exam 2024 ) के लिए सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) का सब्जेक्टिव प्रश्न उत्तर दिया गया है यदि आप लोग मैट्रिक परीक्षा 2024 की तैयारी कर रहे हैं तो यहां पर कक्षा 10वीं के अर्थशास्त्र के सब्जेक्टिव प्रश्न उत्तर 2024 (class 10th economics subjective question answer 2024 ) यहां पर दीया गया है जो कि आने वाले परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है साथ ही इस वेबसाइट पर सभी सब्जेक्ट का ऑब्जेक्टिव एंड सब्जेक्टिव प्रश्न( Bihar Board Class 10th All Subjective Ka Objective And Subjective Question 2024 ) दिया गया है जिससे आप 2024 में बेहतर तैयारी कर सकते हैं

Join For Latest News And Tips

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Note…. साथ ही अगर आप लोग प्रतिदिन ऑनलाइन क्विज (Online Quiz) मारना चाहते हैं तो हमारे टेलीग्राम चैनल को जरूर ज्वाइन करें 

Matric Exam 2024 Whatsapp Group


Chapter 1 अर्थव्यवस्था एवं इसके विकास का इतिहास

प्रश्न 1. बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के क्या कारण हैं? बिहार के पिछड़ेपन दूर करने के लिए कुछ मुख्य उपाय बतायें।

Join For Latest News And Tips

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

उत्तर – बिहार का इतिहास काफी गौरवशाली रहा है लेकिन आज वही बिहार कई तरह की समस्याओं का शिकार है। गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार तथा अशांति का माहौल है। साधनों के मामले में धनी होते हुए भी बिहार की स्थिति दयनीय है।

बिहार के पिछड़ेपन के कारण— आर्थिक दृष्टि से बिहार के पिछड़ेपन के कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं-

(i) तेजी से बढ़ती जनसंख्या— बिहार में जनसंख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। इसके चलते विकास के लिए साधन कम हो रहे हैं। अधिकांश साधन जनसंख्या के भरण-पोषण में चला जाता है।

(ii) आधारिक संरचना का अभाव— किसी भी देश या राज्य के लिए आधारिक संरचनाओं का होना जरूरी होता है। लेकिन बिहार इस मामले में काफी पीछे है। राज्य में सड़क, बिजली एवं सिंचाई का अभाव है साथ ही शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएँ भी कम हैं।

(iii) कृषि पर निर्भरता— बिहार की अर्थव्यवस्था पूरी तरह कृषि पर आधारित है। यहाँ की अधिकांश जनता कृषि पर ही निर्भर है। लेकिन हमारी कृषि की भी हालत ठीक नहीं है। हमारी कृषि काफी पिछड़ी हुई है।

(iv) बाढ़ तथा सुखा की स्थिति— हर साल कम या अधिक बाढ़ बिहार में आना तय होता है, जिसके कारण जान-माल की काफी क्षति होती है, फसल, आवास बाद में बर्बाद हो जाते हैं। इस तरह विकास की स्थिति शून्य पर पहुँच जाता है।

(v) औद्योगिक पिछड़ापन— किसी भी देश या राज्य के लिए उद्योगों का विकास जरूरी होता है, पर बिहार में ऐसी स्थिति नहीं है। यहाँ के सभी खनिज क्षेत्र एवं बड़े उद्योग प्रतिष्ठित अभियांत्रिकी संस्था सभी झारखंड चले गये। इस कारण बिहार में कार्यशील औद्योगिक इकाईयों की संख्या नगण्य हो गई है।

(vi) गरीबी— राज्य में प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत के आधे से भी कम है । इस तरह बिहार पिछड़ा है।

(vii) खराब विधि व्यवस्था— बिहार में वर्षों तक कानून व्यवस्था कमजोर स्थिति में थी, जिसके चलते नागरिक शांतिपूर्वक उद्योग नहीं चला पा रहा था। यह खराब विधि व्यवस्था बिहार को पिछड़ा बना दिया है।

(viii) कुशल प्रशासन का अभाव— बिहार के पारदर्शिता का अभाव ही पिछड़ेपन का कारण बन जाता है। आए दिन भ्रष्टाचार के अनेक उदाहरण सामने आए हैं।

बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने के उपाय—

(i) बिहार में बाढ़ की समस्या का स्थायी निदान किया जाये ।

(ii) कृषि में उत्पादकता बढ़ाने के लिए पंजाब व हरियाणा के समान कार्य किए जायें ।

(iii) औद्योगीकरण को बढ़ावा दिया जाये, ताकि रोजगार के साधनों में भी वृद्धि हो ।

(iv) बिहार में बेरोजगारी को दूर करने के लिए सरकार को निजी क्षेत्र के उद्यमी को उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।


प्रश्न 2. ” सतत विकास समय की आवश्यकता है।” इस कथन को स्पष्ट करें। 

उत्तर – सतत पोषणीय विकास एक ऐसा विकास है जिसमें भविष्य की पीढ़ियाँ की आवश्यकता की पूर्ति को ध्यान में रखते हुए वर्तमान पीढ़ी अपनी आवश्यकता पूरी करे। ऐसा न हो कि आर्थिक विकास की लालसा में प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किया जाय, अधिक-से-अधिक उत्पादन के लिए कोयला, पेट्रोलियम अधिक-से-अधिक निकाला जाय और भविष्य के लिए कुछ बचे ही नहीं।

इस सम्बन्ध में भारत और विशेष कर बिहार के संदर्भ में सतत पोषणीय विकास के अंतर्गत निम्नांकित सुझाव समय के अनुकूल हैं—

(i) नहरी क्षेत्रों में अधिक सिंचाई पर बल नहीं दिया जाना चाहिए इससे पानी की बर्बादी और भूमि की उर्वरता घट जाती है।

(ii) कम वर्षा वाले क्षेत्रों में चना, बाजरा, मूंग की खेती करनी चाहिए। असमतल भूमि को समतल बनाकर खेती करनी चाहिए। इसमें जल की आवश्यकता कम होती है।

(iii) सिंचाई के लिए नई तकनीक को अपनाया जाना चाहिए।

(iv) खनिज सम्पदा एवं खनिज तेल निकालने में आधुनिक उपक्रम एवं नई तकनीक प्रयोग में लाना चाहिए ताकि निकालने के क्रम में कम-से-कम बर्बादी हो।

(v) वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।


Class 10th Economics Long Subjective Question 2024

प्रश्न 3. आर्थिक विकास के मुख्य क्षेत्रों का वर्णन करें।

उत्तर – एक अर्थव्यवस्था का मुख्य कार्य मनुष्य की भौतिक आवश्यकताओं को संतुष्ट कराना है परंतु इसके लिए कई प्रकार की आर्थिक क्रियाओं का संपादन होता है। इनमें निम्नांकित प्रमुख हैं—

(i) उत्पादन— किसी भी देश के नागरिकों को अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कई प्रकार की वस्तुओं और सेवाओं की जरूरत पड़ती है। एक अर्थव्यवस्था में ही उत्पाद के विभिन्न साधनों के सहयोग से वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन होता है। आर्थिक व्यवस्था या अर्थव्यवस्था का एक मुख्य कार्य उत्पादन के विभिन्न साधनों को एकत्र कर उनमें सामंजस्य स्थापित करना है।

(ii) विनिमय— सभ्यता के विकास के साथ ही मनुष्य की आवश्यकताएँ भी बहुत बढ़ गई हैं। आज समाज का कोई भी सदस्य अपनी सभी आवश्यकताओं को स्वयं नहीं पूरा कर सकता। वर्तमान समय में, प्रत्येक व्यक्ति केवल एक ही वस्तु का उत्पादन करता है और दूसरों से विनिमय या लेन-देन कर अपनी आवश्यकता की अन्य वस्तुएँ प्राप्त करता है। एक अर्थव्यवस्था ही देश में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के विनिमय की व्यवस्था करती है।

(iii) वितरण— आधुनिक समय में वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन कई साधनों के सहयोग से होता है। भूमि, श्रम, पूँजी एवं उद्यम उत्पादन के मुख्य साधन हैं, जो उत्पादन कार्य में हिस्सा लेते हैं अतः राष्ट्रीय उत्पादन, अर्थात उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य का भी इन्हीं के बीच वितरण कर दिया जाता है। एक अर्थव्यवस्था ही इस बात का भी निर्णय लेती है कि उत्पादन के साधनों या कारकों के बीच उत्पादित संपत्ति का किस प्रकार वितरण हो।,

(iv) आर्थिक विकास— अर्थव्यवस्था का एक अन्य महत्त्वपूर्ण कार्य आर्थिक विकास की गति को बनाए रखना है। इसके लिए वह वर्तमान उत्पाद के एक भाग को बचाकर उसका विनियोग करती हैं इससे देश या समाज की भावी उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है।


प्रश्न 4. आर्थिक विकास क्या है ? आर्थिक विकास तथा आर्थिक वृद्धि में अंतर बतावें ।

उत्तर – आर्थिक विकास आवश्यक रूप से परिवर्तन की प्रक्रिया है। इससे अर्थव्यवस्था के ढाँचे में परिवर्तन होते हैं। आर्थिक विकास के संबंध में अर्थशास्त्रियों के बीच काफी मतभेद रहा है। जैसा कि प्रो. मेयर एवं वाल्डविन आर्थिक विकास के अर्थ को पूर्णतः स्पष्ट करते हैं। इनके अनुसार, “आर्थिक विकास एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके कारण दीर्घकाल में किसी अर्थव्यवस्था की वास्तविक राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है।”

सामान्यतः आर्थिक विकास एवं आर्थिक वृद्धि में अन्तर नहीं माना जाता है। दोनों शब्दों को एक-दूसरे के स्थान पर प्रयोग किया जाता है। किन्तु अब अन्तर स्पष्ट होने लगा है। जैसा कि मैड्डीसन ने बताया कि धनी देशों में बढ़ता हुआ आय का स्तर आर्थिक वृद्धि का सूचक होता है, जबकि निर्धन देशों में आप का बढ़ता स्तर आर्थिक विकास का सूचक होता है। इस तरह ‘विकास’ शब्द में ‘वृद्धि’ शब्द का अर्थ निहित है


Economics Chapter 1 Subjective Question 2024

प्रश्न 5. अर्थव्यवस्था की संरचना से क्या समझते हैं ? इन्हें कितने भागों में बाँटा गया है ?

उत्तर – अर्थव्यवस्था की संरचना का मतलब विभिन्न उत्पादन क्षेत्रों में इसके विभाजन से है, क्योंकि अर्थव्यवस्था में विभिन्न प्रकार की आर्थिक क्रियाओं गतिविधियों को सम्पादित की जाती है, जैसे-कृषि, उद्योग, व्यापार, बैंकिंग, बीमा, परिवहन, संचार, बिजली आदि ।

सभी अर्थव्यवस्था की तरह भारतीय अर्थव्यवस्था को तीन भागों में बाँटा जाता हैं—

(i) प्राथमिक क्षेत्र — इसके अंतर्गत कृषि, पशुपालन, मछली पालन, जंगलों से वस्तुओं को प्राप्त करना जैसे व्यवसाय आते हैं।

(ii) द्वितीयक क्षेत्र— द्वितीयक क्षेत्र को औद्योगिक क्षेत्र कहा जाता है। इसके अन्तर्गत खनिज, व्यवसाय निर्माण कार्य, जनोपयोगी सेवाएँ, जैसे-गैस और बिजली आदि के उत्पादन आते हैं।

(iii) तृतीयक क्षेत्र या सेवा क्षेत्र— तृतीयक क्षेत्र को सेवा क्षेत्र कहा जाता है । इसके अन्तर्गत बैंक एवं बीमा, परिवहन, संचार एवं व्यापार आदि क्रियाएँ सम्मिलित होती हैं। ये क्रियाएँ प्राथमिक एवं द्वितीयक क्षेत्रों की क्रियाओं को सहायता प्रदान करती है। इसलिए इसे सेवा क्षेत्र कहा जाता है ।


प्रश्न 6. आर्थिक नियोजन किसे कहते हैं? नियोजन के मुख्य उद्देश्य क्या हैं ?

उत्तर – आर्थिक नियोजन का अर्थ एक समयबद्ध कार्यक्रम के अंतर्गत पूर्व निर्धारित सामाजिक एवं आर्थिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए अर्थव्यवस्था में उपलब्ध संसाधनों का नियोजित समन्वय एवं उपयोग करना है। योजना आयोग के शब्दों में “आर्थिक नियोजन का अर्थ राष्ट्र की प्राथमिकताओं के अनुसार देश के संसाधनों का विभिन्न विकासात्मक क्रियाओं में प्रयोग करना है।”

नियोजन के मुख्य उद्देश्य— भारत में नियोजन के मुख्य उद्देश्य हैं—

(i) आर्थिक विकास की दर को बढ़ाना।

(ii) कृषि एवं उद्योगों का आधुनिकीकरण करना ।

(iii) आत्मनिर्भरता को प्राप्त करना ।

(iv) सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना।


प्रश्न 7. पूंजीवादी अर्थव्यवस्था क्या है ? इसके अवगुणों की विवेचना कीजिए।

उत्तर – पूँजीवादी अर्थव्यवस्था वह अर्थव्यवस्था है जिसमें उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रों में निजी उद्यम पाया जाता है जो निजी लाभ के लिए काम करता है।

पूँजीवादी अर्थव्यवस्था के अवगुण—

(i) सम्पत्ति एवं आय की असमानताएँ— आय की असमानताओं के कारण देश की सम्पत्ति व पूँजी का केन्द्रीयकरण कुछ ही व्यक्तियों के हाथों में रहता है और समाज में गरीब व अमीर के बीच खाई बढ़ जाती है।

(ii) सामाजिक कल्याण का अभाव— पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में स्वहित एवं स्वकल्याण की भावना सर्वोपरि होती है तथा सामाजिक कल्याण की भावना का पूर्ण रूप से अभाव होता है।


प्रश्न 8. देश के आर्थिक विकास में बिहार के विकास की भूमिका का संक्षिप्त विवरण दें।

उत्तर – जैसा कि पूर्व राष्ट्रपति डा. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम ने कहा था कि “बिहार के विकास के बिना भारत का विकास संभव नहीं है।” हालांकि भौगोलिक क्षेत्रफल तथा जनसंख्या दोनों ही दृष्टिकोण से बिहार का स्थान भारत में अपना अलग महत्व रखता है । उपरोक्त कथन की सार्थकता इस बात में है कि बिहार को पिछड़ा और गरीब रखकर समृद्ध भारतवर्ष की कल्पना नहीं की जा सकती।

बिहार एक ऐसा राज्य है, जहाँ अत्यधिक उर्वरक भूमि (fertile land) है तथा नदियों में अविरल जल प्रवाह होता है। जल संसाधन का उपयोग कर योजना लागू कर उत्तरी बिहार को बाढ़ की विभीषिका से बचाया जा सकता है।

बिहार के दक्ष मानव संसाधन ही दूसरे राज्यों में जाकर वहाँ के विकास को फलीभूत बनाया है। पंजाब के कृषि विकास में बिहार के मानव संसाधनों का प्रगत योगदान है। विगत वर्षों में बिहार के विकास के कारगर प्रयत्न किए जा रहे हैं। बिहार में प्रगति के इस दौर की प्रशंसा देश भर में की जाने लगी है। यदि देश और बिहार में कंधे से कंधा मिलाकर विकास की वर्तमान दौर को कारगर करे तो आर्थिक विकास में भारत विश्व के अग्रणी देशों में आ जायेगा ।

अतः स्पष्ट है कि देश के आर्थिक विकास में बिहार की आर्थिक विकास की भूमिका महत्वपूर्ण है ।


Bihar Board Class 10th Economics Long Subjective Question 2024

प्रश्न 9. “नरेगा ( NAREGA ) ” क्या है ? यह गरीब मजदूरों के लिए किस प्रकार मदद करता है ?

उत्तर – देश के ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब मजदूरों के लिए राष्ट्रव्यापी रोजगार देने की योजना बनाई गई है । यह योजना ( Scheme) राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (National Rural Employment Guarantee Act) के तहत शुरू की गई है । यह संक्षेप में (नरेगा) “NAREGA ” कहा जाता है। ग्रामीण रोजगार देने की इस स्कीम को विश्व का सबसे बड़ा रोजगार योजना माना जाता है ।

इस राष्ट्रीय योजना के अन्तर्गत ग्रामीण मजदूरों को साल में कम-से-कम 100 दिनों के लिए रोजगार देने की व्यवस्था है तथा इसके लिए न्यूनतम मजदूरी निर्धारित सरकार के तरफ से की जाती है ।

इस प्रकार मजदूरों के मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति नरेगा एक निश्चित आय • उपलब्ध कराता है जो कि संपूर्ण समाज के विकास के लिए आवश्यक योजना है ।


Economics Important Question  Bihar Board 12th Result 2023 : बिहार बोर्ड 12वीं रिजल्ट यहाँ से करें डाउनलोड
Chapter Name Objective Que Subjective Que Long Subjective
1. अर्थव्यवस्था एवं इसके विकास का इतिहास Click HereClick HereClick Here
2. राज्य एवं राष्ट्र की आयClick HereClick HereClick Here
3. मुद्रा, बचत एवं साखClick HereClick HereClick Here
4. हमारी वित्तीय संस्थाएंClick HereClick HereClick Here
5. रोजगार एवं सेवाएं Click HereClick HereClick Here
6. वैश्वीकरणClick HereClick HereClick Here
7. उपभोक्ता जागरण एवं संरक्षणClick HereClick HereClick Here

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *