Class 10th History Long Subjective Question Answer

Class 10th History Long Subjective Question Answer 2024 | 10th SST Important Subjective Question Answer 2024

Social Science

Class 10th History Long Subjective Question Answer 2024 :- दोस्तों यहां पर बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2024 ( Bihar Board Matric Exam 2024 ) के लिए सामाजिक विज्ञान (इतिहास) का सब्जेक्टिव प्रश्न उत्तर दिया गया है यदि आप लोग मैट्रिक परीक्षा 2024 की तैयारी कर रहे हैं तो कक्षा 10 समाजवाद एवं साम्यवाद का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न( class 10th samajwad avn samyavad dirgh uttariy prashn ) यहां पर किया गया है जो कि आने वाले परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है साथ ही इस वेबसाइट पर सभी सब्जेक्ट का ऑब्जेक्टिव एंड सब्जेक्टिव प्रश्न( Bihar Board Class 10th All Subjective Ka Objective And Subjective Question 2024 ) दिया गया है जिससे आप 2024 में बेहतर तैयारी कर सकते हैं

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Class 10th History Long Subjective Question Answer 2024

प्रश्न 1. रूसी क्रांति के कारणों का उल्लेख करें।

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उत्तर ⇒ रूसी क्रांति के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं :

(i) जार की निरंकुशता और अकुशल शासन – जार निकोलस II एक स्वेच्छाचारी शासक था जहाँ आम लोगों की स्थितियाँ चिन्ताजनक थीं। आम लोग परेशान थे, जिस कारण क्रांति की शुरुआत हुई। जार निकोलस द्वितीय कठोर एवं दमनात्मक नीति का संरक्षक था। इसकी पत्नी भी घोर प्रतिक्रियावादी औरत थीं। उस समय रासपुटीन की इच्छा ही कानून थीं। गलत सलाहकार के कारण जार की स्वेच्छाचारिता बढ़ गई और जनता की स्थिति बद से बदतर होती गई।

(ii) मजदूरों की दयनीय स्थिति – रूस में मजदूरों की स्थिति अत्यन्त ही दयनीय थी । उन्हें कम मजदूरी में अधिक परिश्रम करना पड़ता था । इस परिस्थिति में भी क्रांति को बल दिया

(iii) कृषकों की समस्या — रूस में कृषकों की संख्या अत्यधिक थी और वे करों के बोझ से दबे हुए थे अर्थात् उनके पास क्रांति के सिवा और कोई चारा नहीं था । कृषि दासत्व की समाप्ति के बाद भी उनकी स्थिति में विशेष परिवर्तन नहीं हुआ

(iv) औद्योगिकीकरण की समस्या– रूसी औद्योगिकीकरण पश्चिमी पूँजीवादी औद्योगिकीकरण से बिल्कुल भिन्न था। यहाँ कुछ ही क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण उद्योगों का संकेंद्रण था। चारों ओर असंतोष व्याप्त था

(v) रूसीकरण की नीति- जार निकोलस II द्वारा जारी की गई रूसीकरण नीति से रूस में अल्पसंख्यक समूह काफी परेशान थे। जार ने रूसी भाषा और संस्कृति को सभी पर जबरन लादने का प्रयास किया, जिसका विरोध उन लोगों ने क्रांति के रूप में खुलकर किया।

(vi) विदेशी घटनाओं का प्रभाव – रूस की क्रांति में विदेशी घटनाओं का प्रमुख स्थान रहा। सर्वप्रथम क्रीमिया के युद्ध में रूस की पराजय । 1904-05 ई० के रूस-जापान युद्ध ने रूस में पहली क्रांति को जन्म दिया।


प्रश्न 2. नई आर्थिक नीति क्या है ?

उत्तर ⇒ लेनिन ने 1921 ई० में एक नई नीति की घोषणा की। नीति की कुछ बातें निम्नलिखित हैं-

(i) किसानों से अनाज लेने के स्थान पर एक निश्चित कर लगाना । बचा हुआ अनाज किसानों का स्वयं का था। वो जैसे चाहें इसका इस्तेमाल अपनी सूझबूझ से कर सकते थे ।

(ii) यद्यपि यह सिद्धान्त कायम रखा गया कि जमीन राज्य की है। फिर भी, व्यवहार में जमीन किसानों की हो गई ।

(iii) 20 व्यक्तियों से कम वाले व्यापार को स्वयं चलाने का अधिकार दिया गया ।

(iv) उद्योगों का विकेन्द्रीकरण किया गया ।

(v) विभिन्न स्तरों पर बैंक की व्यवस्था की गई ।

(vi) विदेशी पूँजी को भी सीमित तौर पर आमंत्रित किया गया ।

(vii) व्यक्तिगत सम्पत्ति और जीवन का बीमा भी राजकीय एजेंसी द्वारा किया गया।

(viii) ट्रेड यूनियन की अनिवार्य सदस्यता समाप्त कर दी गई।

(ix) नई आर्थिक नीति के द्वारा लेनिन ने उत्पादन की कमी को नियंत्रित किया । इसके परिणामस्वरूप कृषि एवं औद्योगिक क्षेत्र में काफी वृद्धि हुई ।


10th SST Important Subjective Question Answer 2024

प्रश्न 3. रूसी क्रांति के प्रभाव की विवेचना करें।

उत्तर ⇒ रूसी क्रांति के प्रमुख प्रभाव निम्न थे-

(i) इस क्रांति के पश्चात् श्रमिक अथवा सर्वहारा वर्ग की सत्ता रूस में स्थापित हो गई तथा इसने अन्य क्षेत्रों के आंदोलन को भी प्रोत्साहित किया।

(ii) रूसी क्रांति के बाद विचारधारा के स्तर पर विश्व दो खेमों में विभाजित हो गया, पूर्वी यूरोप और पश्चिमी यूरोप

(iii) द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात् पूँजीवादी विश्व तथा सोवियत संघ के बीच शीतयुद्ध की शुरुआत हुई और आगामी चार दशकों तक हथियारों की होड़ चलती रही।

(iv) रूसी क्रांति के बाद आर्थिक आयोजन के रूप में एक नवीन आर्थिक मॉडल आया। अन्य पूँजीवादी देशों ने भी रूस की इस नीति को अपनाया।

(v) इसकी सफलता ने एशिया और अफ्रीका में उपनिवेश मुक्ति को भी प्रोत्साहन दिया ।


प्रश्न 4. कार्ल मार्क्स की जीवन एवं सिद्धान्त का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ कार्ल मार्क्स का जन्म 5 मई, 1818 ई. को जर्मनी में राइन प्रांत के ट्रियर नगर में एक यहूदी परिवार में हुआ था । उनके पिता हेनरिक मार्क्स एक प्रसिद्ध वकील थे, जिन्होंने बाद में चलकर अपना धर्म परिवर्तन कर लिया और ईसाई धर्म को अपनाया। मार्क्स ने बोन विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण की। परन्तु, 1836 ई० में वे बर्लिन विश्वविद्यालय चले आये, जहाँ उनके जीवन को एक नया मोड़ मिला। कार्ल मार्क्स हीगल के विचारों से प्रभावित थे। उन्होंने अपने बचपन की मित्र जेनी से विवाह किया। कार्ल मार्क्स की मुलाकात पेरिस में 1844 ई० में फ्रेडरिक एंजेल्स से हुई और वे दोनों अच्छे मित्र बन गये। यह मित्रता जीवनभर साथ रही। मार्क्स ने एंजेल्स के साथ मिलकर 1848 ई० में एक साम्यवादी घोषणापत्र प्रकाशित किया, जिसे आधुनिक समाज का जनक कहा जाता है। उपर्युक्त घोषणापत्र में मार्क्स ने अपनी आर्थिक एवं सामाजिक और राजनीतिक स्थिति को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया है। मार्क्स ने 1867 ई० में ‘दास कैपिटल’ नामक पुस्तक की रचना की, जिसे ‘समाजवादियों की बाईबिल’ कहा जाता है।

मार्क्स के सिद्धान्त

1. द्वंद्वात्मक भौतिकवाद का सिद्धान्त ।

2. वर्ग संघर्ष का सिद्धान्त ।

3. मूल्य एवं अतिरिक्त मूल्य का सिद्धान्त ।

4. इतिहास की भौतिकवादी व्यवस्था ।

5. राज्यहीन एवं वर्गहीन समाज की स्थापना

मार्क्स के विचार में ऐतिहासिक प्रक्रिया में प्राचीन समाज का आधार – दासता, सामंतवादी समाज का आधार भूमि तथा मध्यवर्गीय समाज का आधार नकदपूँजी है यही मार्क्स की इतिहास की भौतिकवादी व्याख्या है।

मार्क्स का मानना था कि पूँजीपति वर्ग तथा सर्वहारा वर्ग के बीच जो संघर्ष है, उसमें निश्चित रूप से सर्वहारा वर्ग की विजय होगी और एक वर्गहीन समाज की स्थापना होगी। मार्क्सवाद का आदर्श एक वर्गहीन समाज की स्थापना है जिसमें व्यक्ति के हित और समाज के हित में कोई अन्तर नहीं होगा ।


SST Important Subjective Question 2024

प्रश्न 5. यूरोपियन समाजवादियों के विचारों का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ प्रथम यूरोपियन समाजवादी जिसने समाजवादी विचारधारा के विकास में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, फ्रांसीसी विचारक सेंट साइमन था। उनका मानना था कि राज्य और समाज को इस तरह से संगठित करना चाहिए कि लोग एक-दूसरे का शोषण करने के बदले मिलजुल के आगे बढ़ें। समाज के निर्धन वर्ग के भौतिक एवं नैतिक उत्थान के लिए कार्य करना चाहिए। उसने घोषित किया, “प्रत्येक को उसकी क्षमता के अनुसार, कार्य तथा प्रत्येक को उसके कार्य के अनुसार पुरस्कार मिलना चाहिए।” एक अन्य यूरोपियन विचारक चार्ल्स फुरियर था। वह आधुनिक औद्योगिकवाद का विरोधी था तथा उनका मानना था कि श्रमिकों को छोटे नगर और कस्बों में काम करना चाहिए, जिसके लिए उन्होंने नियम बनाये ‘फलांग्स’ ।

फ्रांसीसी यूरोपियन चिंतकों में लुई ब्लाँ प्रमुख था । उनके सुधारों की कार्यप्रणाली अधिक व्यावहारिक थी। उनका कहना था कि किसी भी कार्यप्रणाली में सुधार के पहले राजनीतिक सुधार आवश्यक है। रोबर्ट ओवेन फ्रांस के बाहर एक अच्छे ब्रिटिश उद्योगपति एवं चिंतक थे, जो कि अपनी फैक्टरी में श्रमिकों को अच्छा वेतन दिया करते थे और मुनाफा अधिक प्राप्त करते थे


Bihar Board Class 10th History Long Subjective Question Answer 2024

प्रश्न 6. रूसी क्रांति का विश्व पर क्या प्रभाव पड़ा ?

अथवा, रूसी क्रांति के प्रभाव की विवेचना करें ।

उत्तर ⇒ 20वीं सदी के इतिहास में रूसी क्रांति का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि इसका प्रभाव विश्व के सारे राष्ट्रों पर पड़ा, जो निम्न- लिखित है-

(i) शासन पर कृषकों व श्रमिकों का अधिकार— इस क्रांति के फलस्वरूप सर्वहारा वर्ग की सत्ता रूस में स्थापित हो गई तथा पूँजीपतियों एवं कुलीन वर्ग का प्रभाव समाप्त हो गया। इसने अन्य देशों में भी आन्दोलन के लिए प्रोत्साहन दिया ।

(ii) नवीन साम्यवादी विचारों का जन्म— रूसी क्रांति ने रूस में जो साम्यवादी ढाँचा उपस्थित किया उससे कई सभ्यता, संस्कृति तथा समाज का प्रसार हुआ। साथ ही विश्वभर में नवीन साम्यवादी विचारों का विस्तार हुआ ।

(iii) विश्व का दो खेमों में विभाजन— रूसी क्रांति के बाद विचारधारा के स्तर पर विश्व दो खेमों में विभाजित हो गया। साम्यवादी विश्व तथा पूँजीवादी विश्व । यूरोप भी दो भागों में विभाजित हो गया— पूर्वी यूरोप तथा पश्चिमी यूरोप ।

(iv) अन्तर्राष्ट्रीय तनाव का सूत्रपात — पूँजीवादी विश्व साम्यवाद को एक खतरा मानते हुए इसके प्रसार को रोकना चाहते थे जबकि साम्यवादी इसे विश्व क्रांति के रूप में देखना चाहते थे। अतः, दोनों खेमों के बीच तनाव का सूत्रपात हुआ ।

(v) औपनिवेशिक स्वतंत्रता को बढ़ावा— रूसी क्रांति की सफलता ने एशिया और अफ्रीका में औपनिवेशिक स्वतंत्रता को भी प्रोत्साहन दिया । रूस की साम्यवादी सरकार ने एशियाई और अफ्रीकी देशों में होनेवाले राष्ट्रीय आंदोलन को वैचारिक समर्थन प्रदान किया

(vi) नवीन आर्थिक मॉडल का उदय — रूसी क्रांति के उपरान्त रूस आर्थिक आयोजन के रूप में एक नवीन आर्थिक मॉडल आया । पूँजीवादी देशों ने भी परिवर्तित रूप इस मॉडल को अपनाया । इससे पूँजीवाद के चरित्र में भी परिवर्तन आया।

इस प्रकार, अपने व्यापक प्रभावों के कारण रूसी क्रांति एक युगान्तकारी घटना थी ।


History Important Question  Bihar Board 12th Result 2023 : बिहार बोर्ड 12वीं रिजल्ट यहाँ से करें डाउनलोड
Chapter Name Objective Que Subjective Que Long Subjective
1. यूरोप में राष्ट्रवादClick HereClick HereClick Here
2. समाजवाद एवं साम्यवाद Click HereClick HereClick Here
3. हिंद – चीन में राष्ट्रवादी आंदोलनClick HereClick HereClick Here
4. भारत में राष्ट्रवादClick HereClick HereClick Here
5. अर्थव्यवस्था और आजीविका Click HereClick HereClick Here
6. शहरीकरण एवं शहरी जीवनClick HereClick HereClick Here
7. व्यापार और भूमंडलीकरणClick HereClick HereClick Here
8. प्रेस- सांस्कृति एवं राष्ट्रवादClick HereClick HereClick Here

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