Class 10th Social Science Ka Subjective question

Class 10th Social Science Ka Subjective question 2024 | Matric SST Ka Subjective Question Answer 2024

Social Science

Matric Social Science Important Subjective Question 2024 :- दोस्तों यहां पर बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2024 ( Bihar Board Matric Exam 2024 ) के लिए सामाजिक विज्ञान (इतिहास) का सब्जेक्टिव प्रश्न उत्तर दिया गया है यदि आप लोग मैट्रिक परीक्षा 2024 की तैयारी कर रहे हैं तो कक्षा 10 अर्थव्यवस्था और आजीविका का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न( class 10th arthavyavastha aur aajeevika dirgh uttariy prashn ) यहां पर किया गया है जो कि आने वाले परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है साथ ही इस वेबसाइट पर सभी सब्जेक्ट का ऑब्जेक्टिव एंड सब्जेक्टिव प्रश्न( Bihar Board Class 10th All Subjective Ka Objective And Subjective Question 2024 ) दिया गया है जिससे आप 2024 में बेहतर तैयारी कर सकते हैं

Join For Latest News And Tips

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Matric Exam 2024 Whatsapp Group


Class 10th Social Science Ka Subjective question 2024

प्रश्न 1. औद्योगिकीकरण के कारणों का उल्लेख करें ।

उत्तर ⇒ औद्योगिकीकरण के निम्नलिखित कारण हैं :

(i) आवश्यकता आविष्कार की जननी है।

Join For Latest News And Tips

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

(ii) नए-नए मशीनों का आविष्कार ।

(iii) कोयले एवं लोहे की प्रचुरता ।

(iv) फैक्टरी प्रणाली की शुरुआत

(v) सस्ते श्रम की उपलब्धता।

(vi) यातायात की सुविधा ।

(vii) विशाल औपनिवेशिक स्थिति

अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में ब्रिटेन में नए-नए यंत्रों एवं मशीनों के आविष्कार ने उद्योग जगत् में ऐसी क्रांति का सूत्रपात किया जिससे औद्योगिकीकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ ।

चूँकि वस्त्र उद्योग की प्रगति कोयले एवं लोहे के उद्योग पर बहुत अधिक निर्भर करती थी इसलिए अंग्रेजों ने इन उद्योगों पर बहुत अधिक ध्यान दिया । मशीनों के नए-नए यंत्रों के आविष्कार ने फैक्टरी प्रणाली को विकसित किया। फलस्वरूप उद्योग तथा व्यापार के नए-नए केन्द्रों का जन्म हुआ।

औद्योगिकीकरण में ब्रिटेन में सस्ते श्रम की आवश्यकता की भूमिका अग्रणी रही है। सस्ते श्रम ने उत्पादन के क्षेत्र में सहायता पहुँचाई फैक्टरी में उत्पादित वस्तुओं को एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाने तथा कच्चे माल को फैक्टरी तक लाने के लिए ब्रिटेन में यातायात की अच्छी सुविधा उपलब्ध थी, जिसके कारण औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिला।

औद्योगिकीकरण की दिशा में ब्रिटेन द्वारा स्थापित विशाल उपनिवेशों ने भी योगदान किया। इन उपनिवेशों के कच्चा माल सस्ते दामों पर प्राप्त करना तथा उत्पादित वस्तुओं को वहाँ के बाजार में महंगे दामों पर बेचना ब्रिटेन के लिए आसान था।


प्रश्न 2. कुटीर उद्योग के महत्त्व एवं उनकी उपयोगिता पर प्रकाश डालें ।

उत्तर—कुटीर उद्योग के महत्त्व अनेक बातों को लेकर है। ऐसे उद्योग देश के गाँव-गाँव में फैले रहते हैं। इसे स्थानीय लोग ही बनाते हैं और स्थानीय लोग ही खरीदते भी हैं यदा-कदा मेले, बाजारों में भी ये सामान बिक जाते हैं। कारण कि सभी सामान सभी स्थानों पर नहीं बनते। एक स्थान की उत्पादित वस्तुएँ अन्य स्थान के लोगों को भी मेले में प्राप्त हो जाया करती है। कुटीर उद्योगों के लिए जो कच्चा माल होते हैं, वे सब स्थानीय तौर पर ही प्राप्त हो जाते हैं सबसे महत्त्व की बात है कि इसके लिए अधिक पूँजी की भी आवश्यकता नहीं होती। मजदूर या कारीगर भी नहीं रखने पड़ते, कारण कि सभी काम घर के लोग ही कर लेते हैं। घर में जितने लोग होते हैं, उतना ही सामान बनते हैं। तारीफ कि उन उत्पादित वस्तुओं को बेचने का काम भी घर के लोग ही कर लेते हैं। कुटीर उद्योग के उत्पादन में घर के बूढ़े जवान, स्त्री-पुरुष संभी बैठे-बैठे कुछ-न-कुछ काम कर देते हैं।

कुटीर उद्योग की उपयोगिता है कि कुटीर उद्योग वाले लगभग उन्हीं वस्तुओं को तैयार करते हैं, जिनकी आवश्यकता स्थानीय लोगों को रहती है। मिट्टी के बर्तन, खुरपी, कुदाल या कृषि के औजार स्थानीय रूप में ही तैयार हो जाते थे और उन सभी वस्तुओं के ग्राहक भी स्थानीय किसान-मजदूर ही हुआ करते थे विवाह श्राद्ध से लेकर अनेक धार्मिक । – कृत्यों में मिट्टी के बर्तन की आवश्यकता होती है कलश हो या दीपक, इसके लिए घी हो या तेल, सब स्थानीय स्तर में ही उपलब्ध हो जाते है । कारण कि इनके निर्माण या तैयार करने वाले स्थानीय लोग ही होते है।

औद्योगिकीकरण के विकास के पहले भारतीय निर्मित वस्तुओं का विश्वव्यापी बाजार था। भारतीय मलमल और छींट तथा सूतीवस्त्र की माँग पूरे विश्व में थीं ब्रिटेनवासी भारतीय हाथों से बनी हुई वस्तुओं को ज्यादा महत्त्व देते थे। स्वदेशी आन्दोलन के समय खादी जैसे वस्त्रों की माँग ने कुटीर उद्योग को बढ़ावा दिया।

औद्योगिकीकरण और बाजारीकरण वाले आज के युग में भी स्थानीय कारीगरों की उपयोगिता पहले के तरह ही जैसी की तैसी बनी हुई है। खासकर भारत जैसे देश में, जहाँ के निवासियों का कोई भी काम बिना पूजा-पाठ के नहीं होता ।


Matric SST Ka Subjective Question Answer 2024

प्रश्न 3. औद्योगिकीकरण के परिणामस्वरूप होने वाले परिवर्तन पर प्रकाश डालें।

उत्तर—औद्योगिकीकरण के परिणाम निम्नलिखित हैं :

(i) नगरों का विकास।

(ii) कुटीर उद्योगों का पतन ।

(iii) साम्राज्यवाद का विकास।

(iv) समाज में वर्ग विभाजन एवं बुर्जुआ वर्ग का उदय ।

(v) फैक्टरी मजदूर वर्ग का जन्म ।

(vi) स्लम पद्धति की शुरुआत।

1850 से 1950 ई० के बीच भारत में वस्त्र उद्योग, कोयला उद्योग, सीमेंट उद्योग जैसे कई उद्योगों का विकास हुआ। बड़ी-बड़ी फैक्टरियों के कायम हो जाने से प्राचीन गृह उद्योग का पतन आरंभ हो गया। उद्योगों के विकास के कारण नये-नये नगरों का अभ्युदय होने लगा औद्योगिकीकरण की प्रवृत्तियों के कारण नगरों का संकेन्द्रण संसाधन बहुल क्षेत्रों में होने लगा, जैसे जमशेदपुर, सिन्द्री धनबाद तथा डालमियानगर इत्यादि

औद्योगिकीकरण के परिणामस्वरूप इंग्लैण्ड में हाथ के करने से काम करने वाले पुराने बुनकरों की तबाही के साथ-साथ नए मशीनों का आविष्कार हुआ था। ढाका, मुर्शिदाबाद, सूरत आदि पर औद्योगिकीकरण का बुरा प्रभाव पड़ा।

औद्योगिकीकरण के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू हुआ। जिसकी खपत के लिए यूरोप में उपनिवेशों की होड़ शुरू हो गई और आगे चलकर इस उपनिवेशवाद ने साम्राज्यवाद का रूप ग्रहण कर दिया। औद्योगिकीकरण के फलस्वरूप ब्रिटिश सहयोग से भारत के उद्योग में पूँजी लगाने वाले उद्योगपति पूँजीपति बन गये। अतः समाज में तीन वर्गों का उदय हुआ— पूँजीपति वर्ग, बुर्जुआ वर्ग (मध्यम वर्ग) एवं मजदूर वर्ग

औद्योगिकीकरण ने एक नए तरह के मजदूर वर्ग को जन्म दिया। फैक्टरी मजदूर का उद्योगपतियों के द्वारा काफी शोषण हो रहा था ।

औद्योगिकीकरण ने स्लम पद्धति की शुरुआत की। मजदूर शहरों में छोटे-छोटे घरों में रहते थे जहाँ किसी भी प्रकार की सुविधा (रोशनी, पानी आदि) नहीं थी।


प्रश्न 4. औद्योगिकीकरण ने सिर्फ आर्थिक ढाँचे को ही प्रभावित नहीं किया, बल्कि राजनीतिक परिवर्तन का भी मार्ग प्रशस्त किया, कैसे ?

उत्तर—उन्नीसवीं शताब्दी में ब्रिटेन की औद्योगिक नीति ने जिस तरह औपनिवेशिक शोषण की शुरुआत की, भारत में राष्ट्रवाद की नींव उसका प्रतिफल था। यही कारण था कि जब महात्मा गाँधी ने असहयोग आंदोलन की शुरुआत की तो राष्ट्रवादियों के साथ अहमदाबाद और खेड़ा मिल के मजूदरों ने उनका साथ दिया। महात्मा गाँधी ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार एवं स्वदेशी को अपनाने पर बल डालते हुए कुटीर उद्योग को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया तथा उपनिवेशवाद के खिलाफ इसका प्रयोग किया। पूरे भारत में मिलों में काम करने वाले मजदूरों ने ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ में इनका साथ दिया। अतः औद्योगिकीकरण ने, जिसकी शुरुआत एक आर्थिक प्रक्रिया के तहत हुई थी, उसने न केवल आर्थिक ढाँचे को प्रभावित किया, बल्कि राजनीतिक परिवर्तन का भी मार्ग प्रशस्त किया। 1950 ई. के बाद सम्पूर्ण विश्व में अग्रणी औद्योगिक शक्ति समझा जाने वाला ब्रिटेन अपने स्थान से वंचित हो गया और अमेरिका एवं जर्मनी जैसे देश औद्योगिक विकास की दृष्टि से ब्रिटेन से काफी आगे निकल गए।


Bihar Board Class 10th Social Science Ka Subjective question 2024

प्रश्न 5. उपनिवेशवाद से क्या समझते हैं ? औद्योगिकीकरण ने उपनिवेशवाद को जन्म दिया, कैसे ?

उत्तर—मशीनों के आविष्कार तथा फैक्टरी की स्थापना से उत्पादन में काफी वृद्धि हुई । उत्पादित वस्तुओं की खपत के लिए नए बाजार की आवश्यकता थी। इससे उपनिवेशवाद को बढ़ावा मिला। उपनिवेशवाद में तकनीकी रूप से कमजोर देश पर आर्थिक नियंत्रण स्थापित किया जाता है। इसी क्रम में भारत ब्रिटेन के एक विशाल उपनिवेश के रूप में उभरा। संसाधन की प्रचुरता ने उन्हें भारत की तरफ व्यापार करने के लिए आकर्षित किया। भारत ब्रिटेन के लिए एक वृहत् बाजार के रूप में उभरा।

18वीं शताब्दी तक भारतीय उद्योग विश्व में सबसे अधिक विकसित थे। भारत विश्व की सबसे बड़ी कार्यशाला था, जो बहुत ही सुंदर और उपयोगी वस्तुओं का उत्पादन करता था।

1850 ई. के बाद ब्रिटिश सरकार ने अपने उद्योगों को विकसित करने के लिए अनेक ऐसे कदम उठाये, जिनकी वजह से इस अवधि में एक के बाद एक देशी उद्योग खत्म होने लगे ब्रिटिश सरकार द्वारा अपनायी गई मुक्त व्यापार नीति की वजह से भारत में निर्मित वस्तुओं पर ब्रिटेन में बिक्री के लिए भारतीय कर लगा दिया गया। भारत से कच्चा माल निर्यात किया जाने लगा। धीरे-धीरे ब्रिटिश पूँजी से भारत में कारखानों की स्थापना की जाने लगी। सूती वस्त्रों का आयात भी किया जाने लगा। भारत के कुटीर उद्योग मृतप्राय हो गए। एक तरफ जहाँ मशीनों के आविष्कार ने उद्योग एवं उत्पादन में वृद्धि कर औद्योगिकीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत की थी, वहीं भारत में उद्योगों के लिए निरुद्योगीकरण की प्रक्रिया आरंभ हुई। औद्योगिकीकरण की इस प्रक्रिया ने उपनिवेशवाद को बढ़ावा दिया।।


History Important Question  Bihar Board 12th Result 2023 : बिहार बोर्ड 12वीं रिजल्ट यहाँ से करें डाउनलोड
Chapter Name Objective Que Subjective Que Long Subjective
1. यूरोप में राष्ट्रवादClick HereClick HereClick Here
2. समाजवाद एवं साम्यवाद Click HereClick HereClick Here
3. हिंद – चीन में राष्ट्रवादी आंदोलनClick HereClick HereClick Here
4. भारत में राष्ट्रवादClick HereClick HereClick Here
5. अर्थव्यवस्था और आजीविका Click HereClick HereClick Here
6. शहरीकरण एवं शहरी जीवनClick HereClick HereClick Here
7. व्यापार और भूमंडलीकरणClick HereClick HereClick Here
8. प्रेस- सांस्कृति एवं राष्ट्रवादClick HereClick HereClick Here

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *