Class 10th Social Science Long Subjective Question

Class 10th Social Science Long Subjective Question 2024 | Matric SST Long Subjective Important Question 2024

Social Science

Class 10th Social Science Long Subjective Question 2024 :- दोस्तों यहां पर बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2024 ( Bihar Board Matric Exam 2024 ) के लिए सामाजिक विज्ञान (भूगोल) का सब्जेक्टिव प्रश्न उत्तर दिया गया है यदि आप लोग मैट्रिक परीक्षा 2024 की तैयारी कर रहे हैं तो कक्षा 10 प्राकृतिक संसाधन का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न( class 10th prakritik sansadhan dirgh uttariy prashn ) यहां पर किया गया है जो कि आने वाले परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है साथ ही इस वेबसाइट पर सभी सब्जेक्ट का ऑब्जेक्टिव एंड सब्जेक्टिव प्रश्न( Bihar Board Class 10th All Subjective Ka Objective And Subjective Question 2024 ) दिया गया है जिससे आप 2024 में बेहतर तैयारी कर सकते हैं

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Class 10th Social Science Long Subjective Question 2024

प्रश्न 1. मैदानी क्षेत्रों में मृदा अपरदन के कारण एवं रोकथाम के उपायों का वर्णन कीजिए।

उत्तर ⇒ मैदानी क्षेत्रों में मृदा अपदरन के प्रमुख कारण निम्न हैं—

(i) कृषि के अवैज्ञानिक ढंग को अपनाकर कृषक स्वयं मृदा अपरदन को बढ़ाता है।

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(ii) तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या की माँग को पूरा करने के लिए वनों का निर्ममतापूर्वक काटा जाना।

(iii) अर्द्धशुष्क व चरागाह क्षेत्रों में भारी संख्या में भेड़-बकरी आदि पशुओं को पाला जाना आदि प्रमुख है।

मृदा अपरदन की रोकथाम के लिए निम्न उपाय करना आवश्यक है—

(i) बंजर भूमि और नदियों के किनारे वृक्षारोपण करना,

(ii) फसलों का हेर-फेर और कुछ भूमि को थोड़े समय के लिए परती छोड़ना,

(iii) बहते जल का वेग रोकने के लिए मेहबन्दी करना।


प्रश्न 2. जलाक्रांतता कैसे उपस्थित होता है ? मृदा अपरदन में इसकी क्या भूमिका है?

उत्तर ⇒ भूमि में अति सिंचाई से जलक्रांतता की समस्या उत्पन्न होती है जिससे मृदा में लवणीय और क्षारीय गुण बढ़ जाते हैं, जो भूमि के निम्नीकरण के लिए उत्तरदायी होते हैं।

मृदा अपरदन मिट्टी के ऊपरी आवरण के कटाव और बहाव जैसी प्रक्रिया के कारण उत्पन्न होती है। जल जब ढलान की ओर बहता है तो मृदा धीरे-धीरे जल से घुलकर उसके साथ बह जाती है। इसे चादर अपरदन कहा जाता है। कई बार तेजी से बहने वाला जल नीचे की नरम मृदा को काटते-काटते गहरी नालियाँ बना देती है। इस प्रकार जलक्रांतता के द्वारा मिट्टी का ऊपरी परत अपरदित हो जाता है जिससे मृदा अपरदन की समस्या उत्पन्न होती है।

मृदा अपरदन के कारक प्राकृतिक हो या मानवीय, उनका मृदा के उपजाऊपन पर बड़ा विनाशकारी प्रभाव पड़ता है, विशेषकर किसानों को बड़ी हानि होती है। फसल उगाने वाली उनकी सम्पन्नता स्वप्न बनकर रह जाती है।


Matric SST Long Subjective Important Question 2024

प्रश्न 3. भारत में अत्यधिक पशुधन होने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में इसका योगदान लगभग नगण्य है। स्पष्ट करें ।

उत्तर ⇒ भारत पशुओं की संख्या की दृष्टि से विश्व में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। भारत में अत्यधिक पशुधन होने के बावजूद भारत का पशुपालन उद्योग काफी पिछड़ी अवस्था में है।

भारत में विश्व का लगभग 16% गाय एवं बैल, 50% भैंस, 20% बकरी तथा 4% भेड़ पाए जाते हैं। बावजूद इसके भारत की कुल कृषि उत्पाद में पशु उत्पाद का योगदान लगभग 25% ही है। देश के दूध उत्पादन में भैंस, गाय, बकरी का हिस्सा क्रमश: 50% 46% तथा 4% है

भारतीय अर्थव्यवस्था में इसके योगदान की नगन्यता के कई कारण है— कृष्णा जलवायु, अच्छी नस्ल का अभाव, चारे का अभाव, जीवन निर्वाह के रूप में पशुपालन को अपनाना, सामाजिक-धार्मिक मान्यताएँ एवं माँग कम होना आदि ।

देश में पशुओं के लिए स्थायी चारागृहों के लिए बहुत कम भूमि ( मात्र 4% ) उपलब्ध है, जो पशुधन के लिए पर्याप्त नहीं है। अतः पशुपालन पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।


प्रश्न 4. मृदा संरक्षण पर एक निबंध लिखिए ।

उत्तर ⇒ मृदा अपरदन एक विकट समस्या है, इसका संरक्षण हमारे लिए एक चुनौती है। किन्तु सृष्टि को अक्षुण्ण रखना है, इस चुनौती को स्वीकार करते हुए संरक्षण पर ध्यान देना आवश्यक है। मृदा संरक्षण के विविध तरीके हो सकते हैं जो मानवीय क्रियाकलापों द्वारा प्रयोग में लाए जा सकते हैं। फसल चक्रण द्वारा मृदा के पोषणीय स्तर को बरकरार रखा जा सकता है। गेहूँ, कपास, आलू, मक्का आदि के लगातार उगाने से मृदा में ह्रास उत्पन्न होता है। इसे तिलहन दलहन पौधों की खेती द्वारा पुनर्प्राप्ति किया जा सकता है। इससे नाइट्रोजन का स्थिरीकरण होता है। पहाड़ी क्षेत्रों में समोच्च जुताई द्वारा मृदा अपरदन को रोका जा सकता है। मृदा की सतत् गुणवत्ता बनी रहे, इसके लिए वर्षा जल का संचयन, भू-पृष्ठीय जल का संरक्षण, भूमिगत जल की पुर्नपूर्ति का प्रबंधन आवश्यक है। आधुनिक सिंचाई पद्धतियों को अपनाकर भी मृदा एवं जल दोनों को संरक्षित किया जा सकता है। रसायन का उचित उपयोग तथा वृक्षारोपण कर मृदा का संरक्षण किया जा सकता है। रसायनिक उर्वरक की जगह जैविक खाद का उपयोग मृदा के संरक्षण में सहायक है।


  Chapter NameSub Ques
1. (क) प्राकृतिक संसाधनClick Here
1. (ख) जल संसाधनClick Here
1. ( ग ) वन एवं वन्य प्राणी संसाधनClick Here
1. (घ) खनिज संसाधनClick Here
1. (ड.) शक्ति (ऊर्जा) संसाधनClick Here
Geography Important Question   
Chapter Name Objective Que Subjective Que Long Subjective
1. भारत : संसाधन एवं उपयोगClick HereClick HereClick Here
2. कृषिClick HereClick HereClick Here
3. निर्माण उद्योग Click HereClick HereClick Here
4. परिवहन , संचार एवं व्यापारClick HereClick HereClick Here
5. बिहार : कृषि एवं वन संसाधन Click HereClick HereClick Here
6. मानचित्र अध्ययनClick HereClick HereClick Here

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