Class 10th Social Science Long Subjective Questions

Class 10th Social Science Long Subjective Questions 2024 : Economics Chapter 2 Subjective Question 2024

Social Science

Class 10th Social Science Long Subjective Questions 2024:- दोस्तों यहां पर बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2024 ( Bihar Board Matric Exam 2024 ) के लिए सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) का सब्जेक्टिव प्रश्न उत्तर दिया गया है यदि आप लोग मैट्रिक परीक्षा 2024 की तैयारी कर रहे हैं तो यहां पर कक्षा 10वीं के अर्थशास्त्र के सब्जेक्टिव प्रश्न उत्तर 2024 (class 10th economics subjective question answer 2024 ) यहां पर दीया गया है जो कि आने वाले परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है साथ ही इस वेबसाइट पर सभी सब्जेक्ट का ऑब्जेक्टिव एंड सब्जेक्टिव प्रश्न( Bihar Board Class 10th All Subjective Ka Objective And Subjective Question 2024 ) दिया गया है जिससे आप 2024 में बेहतर तैयारी कर सकते हैं

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Chapter 2 राज्य एवं राष्ट्र की आय

प्रश्न 1. प्रति व्यक्ति आय और राष्ट्रीय आय में अंतर स्पष्ट करें।

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उत्तर – राष्ट्रीय आय का मतलब किसी देश में एक वर्ष में उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं के कुल मूल्य से लगाया जाता है । दूसरे शब्दों में वर्ष भर में किसी देश में अर्जित आय की कुल मात्रा को राष्ट्रीय आय कहते हैं ।

राष्ट्रीय आय में देश की कुल जनसंख्या से भाग देने पर जो भागफल आता है, उसे प्रति व्यक्ति आय कहते हैं। इसका आकलन निम्न प्रकार से की जाती है ।

प्रति-व्यक्ति आय = राष्ट्रीय आय / देश की कुल जनसंख्या


प्रश्न 2. राष्ट्रीय आय की परिभाषा दें। इसकी गणना की प्रमुख विधियाँ कौन-कौन सी हैं ?

उत्तर – राष्ट्रीय आय का अर्थ किसी देश में एक वर्ष में उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं के कुल मूल्य से लगाया जाता है। अर्थात्, वर्ष भर में किसी देश में अर्जित आय की कुल मात्रा को राष्ट्रीय आय कहते हैं ।

इसे तीन प्रकार से गणना करते हैं—

(1) उत्पादन गणना विधि— राष्ट्रीय आय की गणना अनेक प्रकार से की जाती है। चूँकि राष्ट्र व्यक्तियों की आय उत्पादन के माध्यम से अथवा मौद्रिक आय के माध्यम से प्राप्त होता है, इसलिए इसकी गणना जब उत्पादन के योग के द्वारा किया जाता है, तो उसे उत्पादन गणना विधि कहते हैं ।

(2) आय गणना विधि— जब राष्ट्रों के व्यक्तियों की आय के आधार पर राष्ट्रीय आय की गणना की जाती है तो उस गणना विधि को आय गणना विधि कहते हैं ।

(3) व्यय गणना विधि— आय द्वारा व्यक्ति अपने उपभोग के लिए व्यय करता है, इसलिए राष्ट्रीय आय की गणना लोगों के व्यय के माप से किया जाता है। राष्ट्रीय आय की इस गणना को व्यय गणना विधि कहते हैं ।

मूल्य योग विधि— उत्पादित की हुई वस्तुओं का मूल्य विभिन्न परिस्थितियों में व्यक्तियों के द्वारा किए गए प्रयास से बढ़ जाता है, ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय आय की गणना को मूल्य योग विधि कहते हैं।

व्यवसायिक गणना— व्यवसायिक संरचना के आधार पर राष्ट्रीय आय की गणना की जाती है, व्यवसायिक आधार पर की गई गणना को व्यवसायिक गणना विधि कहते हैं ।


Class 10th Social Science Long Subjective Questions 2024

प्रश्न 3. क्या प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि राष्ट्रीय आय को प्रभावित करती है. वर्णन करें ?

उत्तर – राष्ट्रीय आय एवं प्रति व्यक्ति आय में परिवर्तन होने से इसका प्रभाव लोगों के जीवन स्तर पर पड़ता है। राष्ट्रीय आय वास्तव में देश के अंदर पूरे वर्ष भर में उत्पादित शुद्ध उत्पत्ति को कहते हैं लेकिन उत्पत्ति में वृद्धि तभी होगी जब | उत्पादन में अधिक श्रमिकों को लगाया जाए। इस प्रकार जैसे-जैसे उत्पादन में वृद्धि होगी वैसे-वैसे बेरोजगार लोगों को अधिक रोजगार मिलेगा, श्रमिकों का वेतन बढ़ेगी तथा उनको जीवन स्तर पूर्व की अपेक्षा बेहतर होगा। इस प्रकार प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होने से व्यक्तियों का विकास संभव हो सकेगा। यदि इस प्रकार राष्ट्रीय आय के सूचकांक में वृद्धि होती है तो इससे लोगों के आर्थिक विकास में अवश्य ही वृद्धि होगी ।


प्रश्न 4. स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् भारत सरकार ने कब और किस उद्देश्य से राष्ट्रीय आय समिति का गठन किया ?

उत्तर – स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत सरकार ने अगस्त, 1949 ई० में प्रो० पी० सी० महालनोबिस की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय आम समिति का गठन किया जिसका उद्देश्य भारत की राष्ट्रीय आय के संबंध में अनुमान लगाना था। इस समिति ने अप्रैल 1951 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसमें सन् 1948-49 के लिए देश की कुल राष्ट्रीय आय 8,650 करोड़ रुपये बताई गई तथा प्रति व्यक्ति आय 246.9 – रुपये बताई गई। सन् 1954 के बाद राष्ट्रीय आय के आँकड़ों का संकलन करने के लिए सरकार ने केन्द्रीय सांख्यिकीय संगठन की स्थापना की। वह संख्या नियमित रूप से राष्ट्रीय आय के आँकड़े प्रकाशित करती है राष्ट्रीय आय के सृजन में अर्थव्यवस्था के तीनों क्षेत्रों का विशेष योगदान होता है


प्रश्न 5. राष्ट्रीय आय में वृद्धि भारतीय विकास के लिए किस-किस तरह से लाभप्रद है? वर्णन करें।

उत्तर – यदि विकास की क्रिया के तहत अगर राष्ट्रीय आय एवं प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हो रही है, तो विकास की प्रक्रिया बढ़ती जाती है। जनसंख्या में भारी वृद्धि तथा अन्य व्यवसायों में उस गति से विकास न होने के कारण विगत वर्षों में भूमि पर जनसंख्या का भार निरंतर बढ़ता गया है जिससे गरीबी और बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हो गई। आज के आधुनिक युग में कृषि क्षेत्र में हुए सुधार, विज्ञान-प्रौद्योगिकी एवं अन्य क्षेत्रों में हो रहे गुणात्मक विकास के पश्चात् भी लोगों को रोजगार प्राप्त नहीं हो पाता है, जिस कारण स्वभावतः यह बेरोजगारी प्रति व्यक्ति आय को कम करके गरीबी को बढ़ावा देती है। ठीक इसी परिपेक्ष्य में इस अतिरिक्त श्रम शक्ति के बोझ को कम करके और उसे गैर कृषि क्षेत्रों में रोजगार प्रदान करके कृषि उद्योग, बेरोजगारी उन्मूलन और राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।


Economics Chapter 2 Subjective Question 2024

प्रश्न 6. विकास में प्रतिव्यक्ति आय पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

उत्तर – भारत जैसे बड़े देश में, जहाँ जनसंख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। यहाँ प्रति व्यक्ति आय कम है, अशिक्षा का स्तर ज्यादा है एवं भाषा, जीवन शैली और संस्कृति की बहुतायत है । इस बात का अहसास निरन्तर बढ़ता जा रहा है कि विभिन्न आर्थिक-सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हम अपनी प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि करें । ऐसा करके ही हम अपने जीवन को खुशहाल बना सकते हैं, तथा अपना जीवन-स्तर (standard of living) ऊँचा करा सकते हैं ।

यद्यपि पंचवर्षीय योजनाओं में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कायापलट के लिए अनेक उपाय किए गए हैं, पर जनसंख्या में भारी वृद्धि तथा अन्य व्यवसायों में उस गति से विकास न होने के कारण विगत् वर्षों में भूमि पर जनसंख्या का भार निरन्तर बढ़ता गया है, जिससे गरीबी और बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हो गई। आज के आधुनिक युग में कृषि क्षेत्र में हुई सुधार, विज्ञान-प्रौद्योगिकी एवं अन्य क्षेत्रों में हो रहे गुणात्मक विकास के पश्चात् भी लोगों को रोजगार प्राप्त नहीं हो पाता है, जिस कारण स्वभावत: यह बेरोजगारी प्रति व्यक्ति आय को कम करके गरीबी को बढ़ावा देती है। ठीक इसी परिपेक्ष्य में इस अतिरिक्त श्रमशक्ति के बोझ को कम करके और उसे गैर कृषि क्षेत्रों में रोजगार प्रदान करके कृषि उद्योग, बेरोजगारी उन्मूलन और राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।


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Chapter Name Objective Que Subjective Que Long Subjective
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