Social Science Subjective Question

Social Science Subjective Question 2024 | सामाजिक विज्ञान कक्षा 10 प्रश्न उत्तर 2023

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Social Science Subjective Question 2024 :- दोस्तों यहां पर बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2024 ( Bihar Board Matric Exam 2024 ) के लिए सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) का सब्जेक्टिव प्रश्न उत्तर दिया गया है यदि आप लोग मैट्रिक परीक्षा 2024 की तैयारी कर रहे हैं तो कक्षा 10 लोकतंत्र की उपलब्धियाँ का दीर्घ उत्तरीय प्रश्न( class 10th loktantra ki uplabdhiyan dirgh uttariy prashn ) यहां पर दीया गया है जो कि आने वाले परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है साथ ही इस वेबसाइट पर सभी सब्जेक्ट का ऑब्जेक्टिव एंड सब्जेक्टिव प्रश्न( Bihar Board Class 10th All Subjective Ka Objective And Subjective Question 2024 ) दिया गया है जिससे आप 2024 में बेहतर तैयारी कर सकते हैं

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Social Science Subjective Question 2024

प्रश्न 1. भारतवर्ष में लोकतंत्र कैसे सफल हो सकता है ?

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उत्तर ⇒ नि:संदेह भारतीय लोकतंत्र की साख पूरी दुनिया में बढ़ी है। लोकतंत्र के उत्तरोत्तर विकास में जनता की भागीदारी में विस्तार हुआ है। फिर भी, भारतीय लोकतंत्र उतना परिपक्व नहीं हुआ है जितना होना चाहिए था। इसका कारण है कि जनता का जुड़ाव उस स्तर तक नहीं पहुँचा है जहाँ जनता सीधे तौर पर हस्तक्षेप कर सके । अतएव इसकी सफलता के लिए आवश्यक है कि सर्वप्रथम जनता शिक्षित हो । शिक्षा हीं उनके भीतर जागरूकता पैदा कर सकती है। यह सही है कि लोकतांत्रिक सरकारें बहुमत के आधार पर बनती हैं, परन्तु लोकतंत्र का अर्थ बहुमत की राय से चलनेवाली व्यवस्था नहीं है, बल्कि यहाँ अल्पमत की आकांक्षाओं पर ध्यान देना आवश्यक होता है। भारतीय लोकतंत्र की सफलता के लिए आवश्यक है कि सरकारें प्रत्येक नागरिक को यह अवसर प्रदान करें ताकि वे किसी-न-किसी ‘अवसर पर बहुमत का हिस्सा बन सकें। लोकतंत्र की सफलता के लिए यह भी आवश्यक है कि व्यक्ति के साथ-साथ विभिन्न लोकतांत्रिक संस्थाओं के अंदर आंतरिक लोकतंत्र हो, अर्थात् सार्वजनिक मुद्दों पर बहस-मुबाहिसों में कमी नहीं हो । राजनीतिक दलों के लिए तो यह अति आवश्यक है, क्योंकि सत्ता की बागडोर संभालना उनका लक्ष्य होता है। विडम्बना है कि भारतवर्ष में नागरिकों के स्तर पर और खासतौर पर राजनीतिक दलों के अंदर आंतरिक विमर्श अथवा आंतरिक लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा का सर्वथा अभाव दिखता है। जाहिर है कि इसके दुष्परिणाम के तौर पर सत्ताधारी लोगों के चरित्र एवं व्यवहार गैर-लोकतांत्रिक दिखेंगे और लोकतंत्र के प्रति हमारे विश्वास में कमी होगी। इसे जनता अपनी सक्रिय भागीदारी एवं लोकतंत्र में अटूट विश्वास से दूर कर सकते हैं ।


प्रश्न. 2. भारतीय लोकतंत्र की किन्हीं चार विशेषताओं का वर्णन करें।

उत्तर ⇒ स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की स्थापना की गई। भारत का नया संविधान बना। संविधान की प्रस्तावना में स्पष्ट कहा. गया है कि भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य होगा।

भारतीय लोकतंत्र की चार विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

(i) वयस्क मताधिकार भारत में अप्रत्यक्ष लोकतंत्र है जिसमें निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा शासन संचालित होता है। इसके लिए निष्पक्ष निर्वाचन की व्यवस् की गई है। निर्वाचन द्वारा ही जनता अपने प्रतिनिधियों का चयन करती है। भारत में 18 वर्ष या इससे अधिक आयु वाले प्रत्येक स्त्री-पुरुष को बिना किसी भेदभाव के मताधिकार प्राप्त है।

(ii) संसदीय लोकतंत्र — भारतीय लोकतंत्र की दूसरी विशेषता है कि यहाँ संसदीय लोकतंत्र है। यद्यपि राष्ट्रपति कार्यपालिका का सर्वोच्च पदाधिकारी है, लेकिन वह नाममात्र का प्रधान है। वास्तविक कार्यपालिका शक्ति मंत्रिपरिषद् के हाथ में है जिसका प्रधान प्रधानमंत्री है मंत्रिपरिषद् अपने कार्यों के लिए सामूहिक रूप से संसद के प्रति उत्तरदायी है इसी अर्थ में भारत में संसदीय लोकतंत्र है।

(iii) नागरिकों का मौलिक अधिकार — स्वतंत्रता एवं समानता के सिद्धांत पर ही लोकतंत्र आधृत है। इसी कारण भारत के नागरिकों को संविधान द्वारा मौलिक अधिकार दिए गए हैं और उनके संरक्षण का उत्तरदायित्व सर्वोच्च न्यायालय को सौंपा गया है।

(iv) स्वतंत्र न्यायपालिका — भारतीय लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक स्वतंत्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका की व्यवस्था है। संविधान की रक्षा का भार सर्वोच्च न्यायालय पर सौंप दिया गया है।


प्रश्न 3. भारतीय लोकतंत्र कितना व्यापक है? अपने विचारों से इसको सत्यापित करें।

उत्तर ⇒ भारतीय लोकतंत्र व्यवस्था एक सर्वोत्तम शासन व्यवस्था है। यह भारतीय नागरिकों के समक्ष वाद-विवाद के पश्चात् एक सकारात्मक निष्कर्ष पर पहुँचने में मदद करती है। अपनी बातों को निर्भीकता से रखना, सुनने की परम्परा विकसित करना इसकी व्यापकता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था इन सब में सबसे आगे है। यह सामाजिक विषमताओं को पाटती है यह मत का अधिकार अपने जनता को प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाती है। यदि सरकार जन अपेक्षाओं के अनुकूल नहीं होती तो जनता मतदान कर उसे सत्ता से बाहर का रास्ता दिखला देती है। अतः भारतीय लोकतंत्र हर प्रकार से व्यापक एवं विशिष्ट है।


सामाजिक विज्ञान कक्षा 10 प्रश्न उत्तर 2023

प्रश्न 4. लोकतंत्र की विभिन्न प्राथमिकताओं पर एक निबन्ध लिखें।

उत्तर ⇒ लोकतंत्र की प्राथमिकताएँ लोकतंत्र को सर्वोत्तम शासन व्यवस्था का रूप माना गया है। इस दृष्टि से इसकी कुछेक प्राथमिकताएँ पूर्ण होने पर ही हम इसे सर्वोत्तम मान सकते हैं। प्रथम प्राथमिकता है उत्तरदायी एवं वैध शासन की। जनता द्वारा चुनी हुई सरकार होने के कारण यह स्वभावत: जनता के प्रति उत्तरदायी होती है तथा नियमानुसार चुने जाने के कारण वैध भी इसकी दूसरी प्राथमिकता है आर्थिक समृद्धि और विकास। चूँकि प्रतिनिधि सम्पूर्ण क्षेत्र से चुनकर आते हैं इसलिए सबका विकास भी इसका लक्ष्य होता है। सामाजिक विषमता में सामंजस्य लाना इसकी तीसरी प्राथमिकता है समाज में अनेक विषमताएँ विद्यमान होती हैं। जिन्हें आपसी समझदारी एवं विश्वास से दूर करना लोकतंत्र का लक्ष्य होता है। विभिन्न जातियों और वर्गों समुदायों के बीच की खाई को पाटना लोकतंत्र का विकट लक्ष्य है। अन्य शासन व्यवस्था प्रायः इन सब बातों से उदासीन रहती है।


प्रश्न 5. लोकतंत्र किस तरह उत्तरदायी एवं वैध सरकार का गठन करता है ?

उत्तर ⇒ लोकतंत्र लोगों का शासन है, लोगों द्वारा निर्मित होता है और लोगों की भलाई के लिए ही कार्य करता है। लोकतंत्र किस प्रकार लोगों के प्रति उत्तरदायी . है और किस हद तक वैध है, इसे परखने के लिए निम्नलिखित बिन्दुओं पर विचार करने की आवश्यकता होती है।

क्या लोकतंत्र में लोगों को चुनावों में भाग लेने और अपने प्रतिनिधियों को चुनने का अधिकार होता है ? चुनी हुई सरकार लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने में प्रभावी हो पाती है तथा क्या सरकार द्वारा फैसले शीघ्र लिये जाते हैं और फैसले कितने जनकल्याणकारी होते हैं?

उपर्युक्त बातों का मूल्यांकन करने पर हम पाते हैं कि लोग चुनावों में भाग लेते हैं, अपने प्रतिनिधियों को चुनने का कार्य करते हैं। यह अलग बात है कि आर्थिक एवं सामाजिक दृष्टि से मजबूत लोगों का दबदबा होता है। बावजूद इसके जनता में जागरूकता की वृद्धि एवं व्यापक प्रतिरोध से लगातार सुधार की संभावनाएँ बनी रहती हैं। आज शिक्षा के व्यापक प्रचार-प्रसार के कारण लोग अपने मताधिकार का बढ़-चढ़कर उपयोग कर रहे हैं। पहले लोगों को या तो वचित किया जाता था अथवा उनकी रुचि नहीं रहती थी। आज लोग सिर्फ मताधिकार का ही प्रयोग नहीं कर रहे कि सरकार की निर्णय प्रक्रिया में भी हस्तक्षेप कर रहे हैं। यही कारण है कि सरकार को जनता के प्रति उत्तरदायी बनना पड़ता है, क्योंकि जनता द्वारा उसे हटाने का खतरा बना रहता हैं |

दूसरी बात यह है कि यह सही है कि लोकतंत्र में बहस-मुबाहिसों के बाद ही फैसले किए जाते हैं। फैसलों में विधायिका की लंबी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। स्वाभाविक है कि फैसलों में अनिवार्य रूप से विलंब होता है। यहाँ पर यह गौर करने की बात है कि गैर-लोकतांत्रिक व्यवस्था में फैसले किसी खास व्यक्ति द्वारा बगैर बहस-मुबाहिसों के लिए किए जाते हैं। इन फैसलों को लंबी विधायी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता है परंतु गैर-लोकतांत्रिक व्यवस्था के फैसलों में व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों की अधिकता रहती है जो कभी सामूहिक जनकल्याण की दृष्टि से दुरुस्त नहीं होती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव नियमित रूप से होते हैं। सरकार जब भी कोई कानून बनाती है तो उसपर जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ आम जनता के बीच भी खुलकर चर्चाएँ होती हैं।

इस प्रकार लोकतांत्रिक व्यवस्था थोड़ी बहुत कमियों के बावजूद एक सर्वोत्तम शासन व्यवस्था है। गैर-लोकतांत्रिक व्यवस्था से अगर इसकी तुलना की जाए तो इसमें कोई संदेह नहीं कि लोकतांत्रिक व्यवस्था एक उत्तरदायी एवं वैध शासन व्यवस्था है। यही कारण है कि आज पूरी दुनिया में लोकतंत्र के प्रति विश्वास बढ़ता जा रहा है और सभी देश अपने को लोकतांत्रिक कहने में गर्व का अनुभव करते हैं।


Bihar Board Class 10th Social Science Subjective Question 2024

प्रश्न 6. लोकतंत्र किन स्थितियों में सामाजिक विषमताओं को पाटने में मददगार होता है और सामंजस्य के वातावरण का निर्माण करता है ?

उत्तर ⇒ समाज में विद्यमान अनेक सामाजिक विषमताओं जिसे हम विविधताओं के रूप में भी देख सकते हैं, उनके बीच आपसी समझदारी एवं विश्वास को बढ़ाने में लोकतंत्र मददगार होता है। तात्पर्य यह है कि लोकतंत्र नागरिकों को शांतिपूर्ण जीवन जीने में सहायक होता है।

यह सच है कि समाज में विभिन्न जातीय, भाषाई एवं सांप्रदायिक समूहों के बीच मतभेद एवं टकराव बने रहते हैं। लोकतंत्र विभिन्न जातियों एवं धर्मों के बीच वैमनस्य एवं भ्रांतियों को कम करने में सहायक हुआ है। साथ ही उनके बीच टकरावों को हिंसक एवं विस्फोटक बनने से रोका है। ऐसे मतभेदों के बने रहने के कई सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक कारण हैं। इनके बीच टकराव तब होते हैं जब इनकी बातों की अनदेखी की जाती है अथवा इन्हें दबाने की कोशिश की जाती है। सामाजिक मतभेदों एवं अंतरों के बीच बातचीत एवं आपसी समझदारी के माहौल के निर्माण में लोकतंत्र की अहम् भूमिका होती है लोकतंत्र लोगों के बीच एक-दूसरे के | सामाजिक एवं सांस्कृतिक विविधताओं के प्रति सम्मान भाव को विकसित करता है। इस बात को दावे के साथ कहा जा सकता है कि विभिन्न सामाजिक विषमताओं एवं विविधताओं के बीच संवाद एवं सामंजस्य के निर्माण में सिर्फ लोकतंत्र ही सफल रहा है।

इसके अतिरिक्त नागरिकों की गरिमा एवं उनकी आजादी की दृष्टि से भी लोकतंत्र अन्य शासन व्यवस्थाओं से सिफ़ आगे ही नहीं है, बल्कि सर्वोत्तम है। लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ लोगों के बीच नियमित संवाद की गुंजाईश बनी रहती है। संवाद का अर्थ है वाद-विवाद के पश्चात् एक सकारात्मक निष्कर्ष तक पहुँचने की कोशिश, अर्थात् अपनी बातों को निर्भीकता से रखना और दूसरों की बातों को गंभीरता से सुनने की स्वस्थ परंपरा निर्मित करना। इस दृष्टि से लोकतंत्र से बेहतर और कोई दूसरी शासन व्यवस्था नहीं हो सकती है जहाँ हर तरह की आजादी होती है।

इस प्रकार, हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि सामाजिक विषमताओं एवं विविधताओं के बीच आपसी समझदारी एवं सामंजस्य के निर्माण में लोकतंत्र अन्य गैर लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं से काफी आगे है।


प्रश्न 7. लोकतंत्र किस प्रकार आर्थिक संवृद्धि एवं विकास में सहायक बनता है ?

उत्तर ⇒ लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था वैध एवं जनता के प्रति उत्तरदायी होती है। इस आधार पर यह सोचना अप्रासंगिक नहीं होगा कि इस व्यवस्था में सरकारें अच्छी होंगी। साथ ही, यहाँ आर्थिक खुशहाली होगी और विकास की दृष्टि से भी अग्रणी होगा। लेकिन, हम जब लोकतांत्रिक शासन और तानाशाही शासन व्यवस्था में आर्थिक खुशहाली और विकास की दरों पर गौर करते हैं तो काफी निराशा होती है। इसे हम नीचे दिए हुए चार्ट से अवलोकन कर देखते और पाते हैं कि आर्थिक संवृद्धि के मामले में लोकतंत्र से तानाशाहियों का रिकॉर्ड थोड़ा अच्छा है।

विभिन्न देशों में आर्थिक विकास की दरें (1950-2000)

शासन का प्रकार और देशविकास दर
सभी लोकतांत्रिक शासन3.95
सभी तानाशाहियाँ4.42
 तानाशाही वाले गरीब देश4.34
 लोकतंत्र वाले गरीब देश4.28

उपर्युक्त आँकड़ों के अवलोकन से लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था से निराशा तो होती है परन्तु किसी देश का आर्थिक विकास उस देश की जनसंख्या, आर्थिक प्राथमिकताएँ, अन्य देशों से सहयोग के साथ-साथ वैश्विक स्थिति पर भी निर्भर करती है। लोकतांत्रिक शासन में विकास की दर में कमी के बावजूद, लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था का चयन सर्वोत्तम होगा, क्योंकि इसके अनेक सकारात्मक एवं विश्वसनीय फायदे हैं जिसका एहसास धीरे-धीरे होता है।


Class 10th Social Science Subjective Question 2024

प्रश्न 8. भारतवर्ष में लोकतंत्र के भविष्य को आप किस रूप में देखते हैं ?

उत्तर ⇒ आज दुनिया के लगभग 100 देशों में लोकतंत्र किसी-न-किसी रूप में विद्यमान है। लोकतंत्र का लगातार प्रसार एवं उसे मिलनेवाला जनसमर्थन यह साबित करता है कि लोकतंत्र अन्य सभी शासन व्यवस्थाओं से बेहतर है। इन व्यवस्था में सभी नागरिकों को मिलनेवाला समान अवसर व्यक्ति की स्वतंत्रता एवं गरिमा आकर्षण के बिन्दु हैं। साथ ही इसमें आपसी विभेदों एवं टकरावों को कम करने और गुण-दोष के आधार पर सुधार की निरंतर संभावनाएँ लोगों को इसके करीब लाती हैं। इस प्रसंग में सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि लोकतंत्र में फैसले किसी व्यक्ति विशेष द्वारा नहीं, बल्कि सामूहिक सहमति के आधार पर लिये जाते हैं। लोकतंत्र के प्रति लोगों की उम्मीदों के साथ-साथ शिकायतें भी कम नहीं होती है। लोकतंत्र से लोगों की अपेक्षाएँ इतनी ज्यादा हो जाती है कि इसकी थोड़ी-सी भी कमी खलने लगती है। कभी-कभी तो हम लोकतंत्र को हर मर्ज की दवा मान लेने का भी खतरा मोल लेते हैं और इसे तमाम सामाजिक, राजनैतिक एवं आर्थिक विषमता को समाप्त करनेवाली जादुई व्यवस्था मान लेते हैं। इस तरह का अतिवादी दृष्टिकोण लोगों में इसके प्रति अरुचि एवं उपेक्षा का भाव भी पैदा करता है परन्तु लोकतंत्र के प्रति यह नजरिया न तो सिद्धांत रूप में और न ही व्यावहारिक धरातल पर स्वीकार्य है। अतः लोकतंत्र की उपलब्धियों को जाँचने-परखने से पहले हमें यह समझ बनानी पड़ेगी कि लोकतंत्र अन्य शासन व्यवस्थाओं से बेहतर एवं जनोन्नमुखी है। अब नागरिकों का दायित्व है कि वे इन स्थितियों से लाभ उठाकर लक्ष्य की प्राप्ति करें।

भारतवर्ष में लोकतंत्र के भविष्य को देखने से पहले भारतीय लोकतंत्र की उपलब्धियों की ओर ध्यान से परखने की आवश्यकता है। यह सही है कि भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के काले पक्षों को दर्शानेवाले उदाहरणों की कमी नहीं है। आजादी के पश्चात् विगत 60 वर्षों के इतिहास में भ्रष्टाचार में डूबे राजनीतिज्ञ और लोकतांत्रिक संविधान के मूल उद्देश्यों को विनष्ट करनेवाले तत्वों की कमी नहीं है। इन तमाम कमजोरियों के बावजूद भारतीय लोकतंत्र पश्चिम के लोकतंत्र से नायाब है जो निरंतर विकास एवं परिवर्तन की ओर अग्रसर है गैर-लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में आनन-फानन तथा शीघ्रता से लिए गये निर्णयों के दुष्परिणामों से जब हम मुखातिब होते हैं तब लगता है कि लोकतंत्र से बेहतर और कोई शासन व्यवस्था हो नहीं सकती है। इसे जब हम भारतीय लोकतंत्र के 60 वर्षों की अवधि के संदर्भ में देखते हैं तो लगता है कि कालक्रम में हम काफी सफल रहे हैं। एक समय था जब शासन व्यवस्था में आम जनता अपने को भगीदार नहीं मानती थी। जनता जज्बातों एवं भावनाओं में अपना वोट करती थी। धनाढ्य एवं आपराधिक छवि के उम्मीदवार जनता के मतों को खरीदने का जज्बा रखते थे। लेकिन, जब हम 2009 ई. में 15वीं लोकसभा के चुनावों का मूल्यांकन करते हैं तो पता चलता है कि भारत की जनता ने एक साथ पूरे देश में आपराधिक छवि के उम्मीदवारों को 1 समूल खारिज कर दिया। जनता को अब विश्वास हो गया है कि वह अपने मत से किसी को गिरा एवं उठा सकती है। आज पूरी दुनिया में भारतीय लोकतंत्र की साख बढ़ी है और इसकी सफलता से अन्य लोकतांत्रिक देश अनुप्रेरित हो रहे हैं। आज भारतवर्ष में जनता का लगातार प्रजा से नागरिक बनने की प्रक्रिया जारी है।


Political Science Important Question  Bihar Board 12th Result 2023 : बिहार बोर्ड 12वीं रिजल्ट यहाँ से करें डाउनलोड
Chapter Name Objective Que Subjective Que Long Subjective
1. लोकतंत्र में सत्ता की साझेदारीClick HereClick HereClick Here
2. सत्ता में साझेदारी की कार्यप्रणालीClick HereClick HereClick Here
3. लोकतंत्र में प्रतिस्पर्धा एवं संघर्षClick HereClick HereClick Here
4. लोकतंत्र की उपलब्धियांClick HereClick HereClick Here
5. लोकतंत्र की चुनौतियां Click HereClick HereClick Here

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